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कोलकाताः मरे पशुओं का मीट करते थे सप्लाई, पुलिस के हत्थे चढ़ा गिरोह

क्या मीट खाना सुरक्षित है? कोलकाता के हर नागरिक की जुबान पर इन दिनों यही सवाल है. दरअसल, कोलकाता में एक ऐसा गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ा है जो कथित तौर पर मरे हुए पशुओं का मीट बेच रहा था. प्रशासन और पुलिस इस मामले में कुछ मीट विक्रेताओं की भूमिका की जांच कर रही है. बताया जा रहा है कि एक नेटवर्क के जरिए कोलकाता में खाने के स्टॉल्स तक ये अवैध मीट पहुंचाया जा रहा था.

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aajtak.in
परवेज़ सागर/ इंद्रजीत कुंडू/ खुशदीप सहगल कोलकाता, 02 May 2018
कोलकाताः मरे पशुओं का मीट करते थे सप्लाई, पुलिस के हत्थे चढ़ा गिरोह पुलिस मामले की छानबीन कर रही है

क्या मीट खाना सुरक्षित है? कोलकाता के हर नागरिक की जुबान पर इन दिनों यही सवाल है. दरअसल, कोलकाता में एक ऐसा गिरोह पुलिस के हत्थे चढ़ा है जो कथित तौर पर मरे हुए पशुओं का मीट बेच रहा था. प्रशासन और पुलिस इस मामले में कुछ मीट विक्रेताओं की भूमिका की जांच कर रही है. बताया जा रहा है कि एक नेटवर्क के जरिए कोलकाता में खाने के स्टॉल्स तक ये अवैध मीट पहुंचाया जा रहा था.

पुलिस को पहली बार मीट के इस अवैध कारोबार का तब पता चला जब दक्षिण 24 परगना के बज बज में स्थानीय नागरिकों ने दो ऐसे लोगों को पकड़ा जो मरे हुए पशु का मीट लेकर जा रहे थे. म्युनिसिपल डम्प यार्ड में लाए गए मृत पशुओं से ये मीट कथित तौर पर निकाला गया था. पुलिस ने फिर दो प्रिजर्वेशन यूनिट पर छापा मारा और ऐसा खतरनाक मीट जब्त किया. पुलिस ने इस अवैध धंधे में शामिल 6 लोगों को गिरफ्तार भी किया. इस गिरोह के कथित सरगना सनी मलिक को बिहार के नवादा से 25 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया. बज बज में दो लोगों की 20 अप्रैल को गिरफ्तारी के बाद से ही सनी शहर छोड़ कर भाग गया था.

गिरफ्तार लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारियों ने शहर के नाकेरलडंगा क्षेत्र में स्थित एक कोल्ड स्टोरेज से 20 टन पैक्ड मीट जब्त किया. ये मीट शहर में खाने की दुकानों-स्टॉल्स को सप्लाई किया जाना था. पुलिस के मुताबिक इस प्रोसेस्ड मीट को 60-65 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जाता था.

डायमंड हार्बर के एसपी कोटेश्वर राव ने बताया, ‘हमने बिहार में सनी मलिक को पकड़ने के लिए विशेष टीम भेजी थी. हमारी जांच से सामने आया कि ये गिरोह मरे हुए पशुओं का मीट पहले प्रोसेस्ड करता था फिर कोल्ड स्टोरेज में इकट्ठा रखता था. मीट को प्रिजर्व करने के लिए केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता था.’

गिरोह किस तरह इस अवैध धंधे को अंजाम देता था, एसपी राव ने इस बारे में बताया, ‘उन्होंने एक मुखबिर रखा हुआ था जो जैसे ही म्युनिसिपल यार्ड में कोई मृत पशु आता तो वो इस बारे में गिरोह को सूचना दे देता था. गिरोह के सदस्य वहां पहुंच कर मृत पशु का मीट लेकर कोल्ड स्टोरेज पहुंचा देते थे. फिर मीट के छोटे टुकड़े कर प्रोसेस किया जाता था और उसे ताजा मीट के साथ मिला दिया जाता. फिर इसे पैक कर शहर के रेस्त्राओं में पहुंचा दिया जाता. इसे सोनारपुर, टांगरा जैसे इलाकों में सप्लाई किया जाता था. हम सप्लाई के अन्य इलाकों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.'

कोलकाता के अन्य हिस्सों में भी जांच कराई गई. बिधाननगर पुलिस ने अप्रैल के आखिरी हफ्ते में न्यू टाउन क्षेत्र में कई छापे मारे और एक फार्म से मरे हुए चिकन का बड़ी मात्रा में मीट जब्त किया.

बिधाननगर के पुलिस कमिश्नर अमित जगालवी ने बताया, ‘हमने कई सैम्पल इकट्ठा किए हैं और इन्हें फॉरेन्सिक जांच के लिए भेजा है. मीट न्यू टाउन में स्थित एक गोदाम से सप्लाई किया जाता था. हमने एक रेस्त्रा मालिक, एक मीट सप्लॉयर और गोदाम इंचार्ज समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है. जगालवी ने बताया कि एयरपोर्ट के पास एक होटल में मृत पशुओं का मीट सप्लाई किए जाने की सूचना मिली थी. दम दम से हेल्थ इंस्पेक्टर ने वहां जाकर मीट का एक बॉक्स पकड़ा. उसे देखने के बाद इंस्पेक्टर ने कहा कि वो पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि ये मरे हुए चिकन का मीट है या कैमिकल से इसे ट्रीट किया गया है. हमने सेम्पल लेकर फॉरेन्सिक लैब में भेजे हैं.’

गिरोह के पकड़े जाने के बाद से कोलकाता के लोगों में इस तरह के खतरनाक मीट को लेकर दहशत है. ममता बनर्जी सरकार ने इस पूरे मामले की गहन जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम का गठन किया है. कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (केएमसी) की ओर मीट की क्वालिटी चेक करने के लिए व्यापक मुहिम छेड़ी है. इसके तहत शहर के रेस्त्राओं और ईटिंग स्टाल्स में जाकर पके हुए मीट के सैम्पल लिए जा रहे हैं.

जांच में शामिल अधिकारियों का कहना है कि इस अवैध मीट के विक्रेता नादिया, हावड़ा, नॉर्थ और साउथ परगना समेत कई जिलों में फैले हुए हैं. स्थानीय प्रशासन को मीट सप्लायर्स और दुकानों पर अचानक छापे मारने के निर्देश दिए गए हैं.

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