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नाभा जेल कांडः जेल में रची गई थी पूरी साजिश, KLF चीफ मिंटू से बरामद हुए 19 हजार रुपये

खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के मुखिया हरमिंदर सिंह मिंटू को सोमवार को गिरफ्तार करने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 7 दिनों की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है. वहीं जेल कांड के मुख्य आरोपी परविंदर सिंह को भी 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक, मिंटू ने जेल परिसर में ही भागने की पूरी साजिश रची थी.

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चिराग गोठी / राहुल सिंह नई दिल्ली, 28 November 2016
नाभा जेल कांडः जेल में रची गई थी पूरी साजिश, KLF चीफ मिंटू से बरामद हुए 19 हजार रुपये खालिस्तान लिबरेशन फोर्स का मुखिया हरमिंदर सिंह मिंटू

खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के मुखिया हरमिंदर सिंह मिंटू को सोमवार को गिरफ्तार करने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 7 दिनों की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया है. वहीं जेल कांड के मुख्य आरोपी परविंदर सिंह को भी 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक, मिंटू ने जेल परिसर में ही भागने की पूरी साजिश रची थी. जेल में ही एक अज्ञात शख्स ने उसे पैसे उपलब्ध कराए थे. गिरफ्तारी के वक्त उसके पास से 19 हजार रुपये भी बरामद हुए हैं.

नाभा जेल कांड में खुलासा हुआ है कि जेल से भागने के बाद खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के मुखिया हरमिंदर सिंह मिंटू ने अपना हुलिया बदल लिया था. मिंटू कुरुक्षेत्र से 20 किलोमीटर पहले ही आरोपियों की कार से उतर गया था, जिसके बाद वह दिल्ली के लिए रवाना हुआ.

कार से उतरने के बाद मिंटू ने अपना हुलिया बदल लिया था. पहचान छिपाने के लिए उसने अपने बाल कटवा लिए थे. बाल कटवाने के बाद वह अलग-अलग बसों में सवार होकर दिल्ली के निजामुद्दीन स्टेशन पहुंचा था, जहां सोमवार सुबह पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.

बताते चलें कि मिंटू पर किसी को शक न हो, इसके लिए उसने अपने पास कोई हथियार नहीं रखा था. दिल्ली के निजामुद्दीन स्टेशन पहुंचकर मिंटू ने मुंबई जाने के लिए टिकट खरीदा था. जिसके बाद उसका मुंबई से गोवा और फिर वहां से विदेश भागने का प्लान था. पुलिस ने मिंटू की गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से कुछ नकदी भी बरामद की है. पुलिस आशंका जता रही है कि फरार होने के बाद से लगातार कोई शख्स मिंटू की आर्थिक तौर पर मदद कर रहा था.

गौरतलब है कि तकरीबन 300 कैदियों वाली नाभा जेल में घटना के समय महज 40 सुरक्षाकर्मी तैनात थे. जेल की दीवारों पर कंटीले तार बहुत जगहों पर टूटे हुए थे. वहीं चौंकाने वाली बात यह है कि जेल परिसर में एक प्राइमरी स्कूल भी चलाया जा रहा था. इस स्कूल में तकरीबन 230 बच्चे पढ़ते हैं. 230 बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी 9 शिक्षकों पर हैं. रविवार के दिन स्कूल बंद था. अगर इस वारदात को किसी दूसरे दिन अंजाम दिया गया होता, तो बदमाश स्कूली बच्चों को भी आसानी से अपना निशाना बना सकते थे.

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