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कठुआ गैंगरेप केस: पीड़ित परिवार ने वकील दीपिका सिंह को हटाया, जानिए क्यों

कठुआ गैंगरेप और हत्या मामले में पीड़िता के परिवार ने वकील दीपिका सिंह राजावत को हटा दिया है. पठानकोट कोर्ट में हुई 110 सुनवाई में वह सिर्फ दो बार ही मौजूद रहीं.

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aajtak.in
देवांग दुबे गौतम नई दिल्ली, 15 November 2018
कठुआ गैंगरेप केस: पीड़ित परिवार ने वकील दीपिका सिंह को हटाया, जानिए क्यों दीपिका सिंह (फाइल फोटो)

कठुआ गैंगरेप और हत्या मामले में पीड़िता के परिवार ने वकील दीपिका सिंह राजावत को हटा दिया है. बताया जा रहा है कि दीपिका के पास कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेश होने का समय नहीं था. पठानकोट कोर्ट में हुई 110 सुनवाई में वह सिर्फ दो बार ही मौजूद रहीं. 

इस पूरे मामले पर 'आजतक' ने जब दीपिका सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि यह खबर हैरान कर देने वाली है, इससे मुझे तकलीफ हुई है. मेरे यहां से पठानकोठ 250 किमी दूर है और कोई भी युवा वकील जम्मू में मुझसे जुड़ना नहीं चाहता है क्योंकि उन्हें मुझसे जुड़ने से डराया जाता है.

दीपिका ने कहा कि लोअर और हाई कोर्ट दोनों का काम मेरे ऊपर है और मैं वित्तीय संकट से जूझ रही हूं. पीड़िता के परिवार ने कभी मुझसे संपर्क नहीं किया. वह संपर्क से दूर हैं.

दीपिका ने कहा कि सुनवाई के लिए वह खुद एक दो बार जा चुकीं हैं. राज्य का मामला सार्वजनिक अभियोजक द्वारा संभाला जाता है. 2 सीनियर क्रिमिनल एडोकेट पठानकोट कोर्ट में वास्तव में इसे अच्छी तरह से संभालने में कामयाब रहे हैं. उस समय कोई नहीं था, मैं सबसे आगे थी, तब मेरी जरूरत थी, अब मेरी जरूरत नहीं है.

पीड़िता की वकील ने कहा कि मेरे जीवन के लिए कोई खतरा नहीं है. अगर मेरी वहां रहने की जरूरत पड़ी तो इससे मुझे कोई नहीं रोक सकता. लेकिन मुझे पेशेवर प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए यहां रहने की जरूरत है. कुछ नए चेहरे इसे भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, मैं उन्हें शुभकामनाएं देती हूं. लेकिन उनका नाम नहीं लूंगा.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्थानांतरित करने का आदेश

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पठानकोट स्थानांतरित करने का आदेश दिया था. इसके अलावा इस मामले की सुनवाई बंद कमरे में और रोजाना आधार पर करने के भी निर्देश दिए. उनकी उपस्थिति और आशंका को ध्यान में रखा गया था कि जब भी वह पठानकोट जाते थे तो उन्हें उनके जीवन का खतरा होता था.

जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ जिले के रासाना गांव में एक आठ वर्षीय लड़की लापता हो गई थी. उसका शव एक सप्ताह बाद उसी क्षेत्र से बरामद हुआ था. वकील-सामाजिक कार्यकर्ता दीपिका सिंह राजावत ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि जम्मू बार एसोसिएशन के सदस्य उसे धमका रहे हैं और उनसे अदालत में पेश नहीं होने के लिए कह रहे हैं. 

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