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तीन बहनों के अपहर्ता 'फर्जी-दारोगा' को असली पुलिस ने दबोचा

माता-पिता की मौत के बाद अपने चाचा-चाची से नाराज तीन नाबालिग बहनों को अपनी बातों में फंसाकर आरोपी अपने साथ फरीदाबाद ले गया. उसने खुद को एक एनजीओ का अधिकारी बताकर तीनों किशोरियों को उसके चाचा-चाची से हक दिलाने का झूठा वादा किया.

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aajtak.in
अनुज मिश्रा फरीदाबाद, 25 August 2019
तीन बहनों के अपहर्ता 'फर्जी-दारोगा' को असली पुलिस ने दबोचा तीन बहनों के अपहर्ता 'फर्जी-दारोगा' को असली पुलिस ने दबोचा (फोटो-पुनीत शर्मा)

दक्षिण-पूर्वी जिला पुलिस ने तीन सगी बहनों का अपहरण करने के आरोप में एक शख्स को गिरफ्तार किया है. पुलिस के चंगुल में फंसा अपहर्ता खुद को दिल्ली पुलिस का दारोगा बताकर मोटी रकम ऐंठने की जुगत में था. पुलिस ने आरोपी के कब्जे से तीनों बहनों को भी सकुशल रिहा करा लिया है.

जानकारी के मुताबिक माता-पिता के मौत की बाद अपने चाचा-चाची से नाराज तीन नाबालिग बहनों को अपनी बातों में फंसाकर आरोपी उन्हें अपने साथ फरीदाबाद ले गया. उसने खुद को एक एनजीओ का अधिकारी बताकर तीनों किशोरियों को उसके चाचा-चाची से हक दिलाने का झूठा वादा किया. दूसरी तरफ कालिंदी कुंज पुलिस ने परिवार की शिकायत पर अपहरण का केस दर्ज कर लिया और उनकी खोजबीन शुरू कर दी. सरिता विहार एसीपी ढाल सिंह के देखरेख में एक टीम बनाई गई.

पुलिस ने बताया कि 22 अगस्त की दोपहर करीब 12 बजे खड्डा कालोनी निवासी यशपाल सिंह जब अपने गुरुग्राम ऑफिस में थे, तब उनके पास एक फोन आया. खुद को कालिंदी कुंज का दारोगा बताते हुए फोन करने वाले ने कहा कि उनकी 17 साल, 15 साल और 11 साल की तीनों भतीजियों ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. वह तुरंत पुलिस स्टेशन पहुंच जाएं.

यशपाल की पत्नी माजरा समझने के लिए थाने पहुंचीं. थाने में उन्हें बताया गया कि उनके पति के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है. न ही थाने में तीन नाबालिग लड़कियां मौजूद हैं.'

डीसीपी विश्वाल ने कहा, 'यशपाल की पत्नी के थाने पहुंचने पर पूरा मामला संदिग्ध लगा. इसके कुछ ही देर बाद संदिग्ध की फोन कॉल जब दोबारा आई तो उसने कहा कि तीनों लड़कियां खड्डा कॉलोनी पुलिस बूथ पर किसी और पुलिस वाले के कब्जे में हैं. न कि थाना कालिंदी कुंज में. थोड़ी देर में जांच के बाद यह बात भी झूठी साबित हो गई. पुलिस ने जब यशपाल के घर के आसपास के सीसीटीवी फुटेज देखे तो मामले को सुलझाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे.'

पुलिस ने किशोरियों की तलाश में फरीदाबाद, बदरपुर, जैतपुर और कालिंदी कुंज समेत कई जगहों पर छापेमारी की. कई सीसीटीवी की जांच की. 23 अगस्त को आरोपी को खड्डा कॉलोनी, जैतपुर से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में पता चला कि किशोरियों को आरोपी ने फरीदाबाद में किराये के कमरे में छिपा रखा था. आरोपी ने मकान मालकिन को बताया था कि तीनों उसकी बेटियां हैं. पत्नी से अनबन के चलते इनको यहां रखा है.

पुलिस को आरोपी ने बताया कि 16 अगस्त को तीनों बहनें स्कूल से अपने घर जा रही थीं. उसने तीनों को उदास देखकर खुद को एंटी करप्शन विभाग का पुलिस अधिकारी बताया. उसने मदद का भरोसा दिलाकर तीनों बहनों को विश्वास में ले लिया. जब तीनों बहनों ने बताया कि उनके माता-पिता की मौत हो चुकी है और वह अपने चाचा-चाची के पास रहते हैं. चाचा-चाची उन्हें प्यार नहीं करते हैं. तब आरोपी ने तीनों को संपत्ति में हिस्सा दिलाने का झांसा देकर अपने साथ ले गया.

जिला पुलिस उपायुक्त चिन्मय बिस्वाल ने बताया, 'आरोपी का नाम बिमल कुमार है. जिसकी उम्र 38 वर्ष है. वह दिल्ली से सटे उप्र के हाईटेक शहर नोएडा के सेक्टर-5 हरौला में रहता था. बिमल ने पूछताछ में बताया कि वह एक एनजीओ (गैर-सरकारी संगठन) में मार्केटिंग हेड के रूप में काम कर रहा है. इससे पहले वह दिल्ली के जैतपुर इलाके से संचालित एक एनजीओ में कार्यरत था.

पुलिस के मुताबिक, अभी जांच पड़ताल चल ही रही थी कि किसी तरह से संदिग्ध ने पीड़ित परिवार से 12 हजार रुपये की अवैध वसूली कर ली. इसी बीच पुलिस ने खुफिया सूत्रों की मदद से 23 अगस्त को सुबह बिमल कुमार को पकड़ लिया. गिरफ्तारी के वक्त वह मोटर साइकिल से कहीं जा रहा था. आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने बंधक बनी तीनों लड़कियों को भी सकुशल रिहा करा लिया.

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