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दाऊद के साथी फारुक टकला को दुबई से मुंबई लाया गया, 1993 धमाके के बाद से था फरार

1993 मुंबई ब्लास्ट के आरोपी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी फारुक टकला को दुबई से गिरफ्तार कर मुंबई लाया गया है. 1993 ब्लास्ट के बाद 1995 में फारुक के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. 

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aajtak.in
मुनीष पांडे मुंबई, 08 March 2018
दाऊद के साथी फारुक टकला को दुबई से मुंबई लाया गया, 1993 धमाके के बाद से था फरार दाऊद इब्राहिम (फाइल)

1993 मुंबई ब्लास्ट के आरोपी अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी फारुक टकला को दुबई से गिरफ्तार कर मुंबई लाया गया है. 1993 ब्लास्ट के बाद 1995 में फारुक के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. 

1993 ब्लास्ट के बाद ही फारुक टकला भारत से भाग गया था. गुरुवार सुबह ही एयर इंडिया के विमान से फारुक को मुंबई लाया गया. फारूक को सीबीआई दफ्तर ले जाया गया है. जिसके बाद उसे टाडा कोर्ट में पेश किया जाएगा.

कौन है फारुक टकला?

नोटिस कंट्रोल नंबर - A-385/7-1995

जन्म - 17 फरवरी, 1961 (मुंबई)

आरोप  - साजिश, मर्डर, आतंकी गतिविधियों में शामिल

क्या था मामला?

12 मार्च, 1993 को मुंबई में एक के बाद एक 12 बम धमाके हुए थे. बम धमाके में 257 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. बताया जाता है कि धमाकों में 27 करोड़ रुपये संपत्ति नष्ट हुई थी. इस मामले में 129 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया था.

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साल 2007 में टाडा कोर्ट ने 100 लोगों को सजा सुनाई. इसी मामले में याकूब मेमन को 2015 में फांसी हुई थी. ब्लास्ट से जुड़े एक अन्य मामले में ही फिल्म अभिनेता संजय दत्त अवैध हथियार रखने के दोषी पाए गए और उन्हें टाडा कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई थी. वहीं ब्लास्ट का मास्टरमाइंड दाऊद इब्राहिम 1995 से फरार है.

जब अदालत में सुनवाई के दौरान जज ने मांगा दाऊद इब्राहिम का फोन नंबर

भारत आना चाहता था दाऊद!

आपको बता दें कि दाऊद इब्राहिम का भाई इकबाल कासकर इस समय मुंबई पुलिस की गिरफ्त में ही है. मंगलवार को एक अदालत में सुनवाई के दौरान कासकर ने बताया था कि गिरफ्तारी से पहले उसकी बात दाऊद से हुई थी. जिसपर जज ने तुरंत कहा कि वह उन्हें दाऊद का नंबर दे, लेकिन कासकर ने कहा कि जिसपर फोन आया था उस फोन पर डिस्प्ले नहीं हो रहा था. हालांकि, कासकर ने ये भी बताया कि दाऊद भारत आना चाहता था, लेकिन उसकी कुछ शर्तें थीं जिसे सरकार ने मानने से मना कर दिया था.

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