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फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर मालविंदर सिंह को ED ने किया गिरफ्तार

प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर मालविंदर सिंह और रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी को गिरफ्तार कर लिया. दोनों की गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है.

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aajtak.in
मुनीष पांडे नई दिल्ली, 14 November 2019
फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर मालविंदर सिंह को ED ने किया गिरफ्तार अधिकारियों के साथ मालविंदर सिंह (Photo: Reuters)

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर मालविंदर सिंह और रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड के पूर्व सीएमडी सुनील गोधवानी को गिरफ्तार कर लिया. दोनों की गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है. दोनों आरोपी फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं.

मामले से जुड़े एक वकील ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दोनों आरोपियों को तिहाड़ केंद्रीय जेल से अपनी हिरासत में ले लिया. यहां वे दिल्ली पुलिस द्वारा कथित घोटाले के संबंध में दायर एक मामले में बंद थे. सिंह और गोधवानी दोनों को जेल में एक मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा. ईडी उनसे पूछताछ कर सकती है.

इसी साल अक्टूबर के महीने में दिल्ली की एक अदालत ने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटर सिंह बंधुओं और तीन अन्य को रेलिगेयर धोखाधड़ी मामले में 31 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा था. मालविंदर व शिविंदर सिंह के साथ सुनीत गोधवानी, अनिल सक्सेना व कवि अरोड़ा को न्यायाधीश निशांत गर्ग के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, क्योंकि मुख्य महानगर दंडाधिकारी दीपक सेहरावत अवकाश पर थे.

बता दें कि आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) मालविंदर को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. मालविंदर के अलावा ईओडब्ल्यू रेलीगेयर के पूर्व एमडी शिविंदर, सुनील गोधवानी, कवि अरोड़ा व सुनील सक्सेना को भी गिरफ्तार कर चुकी है. गिरफ्तार किए गए लोगों पर रेलीगेयर इंटरप्राइजेज को 2,397 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है.

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के मुताबिक फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रोमोटर मालविंदर सिंह और उनके भाई शिविंदर ने खुलासा किया था कि कर्ज लेने वाली कंपनियों से विभिन्न व्यक्तियों को 1,000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया गया जिसका कथित तौर पर गबन कर लिया गया.

रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) के मनप्रीत सिंह सूरी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील विकास पाहवा ने पहले ही आरोप लगाया था कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध है. सूरी ने ही पिछले साल दिसंबर में शिकायत दर्ज कराई थी.

रेलिगेयर ने उन पर फंड की हेराफेरी करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि कंपनी का प्रबंधन करते समय शिविंदर ने कर्ज लिए लेकिन धन को अन्य कंपनियों में निवेश किया गया.

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