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निर्भया केस: दोषी की पत्नी ने दाखिल की तलाक याचिका, कहा- विधवा बन कर नहीं जी सकती

देश के बहुचर्चित न‍िर्भया गैंगरेप केस में चार आरोप‍ियों को फांसी की सजा म‍िली हुई है. इस केस में तीन बार फांसी टल चुकी है. अब चौथी बार 20 मार्च को उन्हें फांसी देने की तारीख तय हुई है. इससे पहले ही उनमें से एक आरोपी की पत्नी ने आरोपी पत‍ि से कोर्ट में तलाक की अर्जी लगा दी है.

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aajtak.in
सुजीत झा औरंगाबाद , 17 March 2020
निर्भया केस: दोषी की पत्नी ने दाखिल की तलाक याचिका, कहा- विधवा बन कर नहीं जी सकती आरोपी अक्षय (Photo: India Today)

  • 20 मार्च को न‍िर्भया केस के चार दोष‍ियों को होनी है फांसी
  • एक आरोपी की पत्नी ने कोर्ट में किया तलाक का केस

निर्भया कांड के आरोपी अक्षय की पत्नी ने ब‍िहार के औरंगाबाद की अदालत में तलाक की अर्जी दाखिल की है. दायर अर्जी में अक्षय की पत्नी ने कहा कि वो विधवा बनकर नहीं जी सकती, इसलिए उसे तलाक दिया जाए. औरंगाबाद के लहंग कर्मा गांव के रहने वाला अक्षय ठाकुर निर्भया कांड का दोषी है और 20 मार्च को उसके तीन साथियों के साथ उसे दिल्ली के तिहाड जेल में फांसी दी जाने वाली है. उससे पहले उसकी पत्नी ने औरंगाबाद कोर्ट में ये अर्जी दाखिल की है जिस पर सुनवाई 19 मार्च को होनी तय हुई है.

अक्षय ठाकुर की पत्नी पुनीता ने कोर्ट में दी अर्जी में कहा कि पति को निर्भया के दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया गया है और कोर्ट से मिली सजा के तौर पर उसे फांसी दी जानी है. अक्षय की पत्नी ने अर्जी में लिखा है कि मेरे पति निर्दोष हैं, ऐसे में मैं उनकी विधवा बनकर नहीं रहना चाहती, इसलिए उसे अपने पति से तलाक चाहिए.

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बलात्कारी की पत्नी ले सकती है तलाक

पुनीता ने हिन्दू विवाह अधिनियम 13.2.2 के अंतर्गत तलाक मामला दायर किया है. पुनीता ने अदालत में दी गई अर्जी में लिखा है कि वैसे तो उसका पति निर्दोष है लेकिन न्यायालय के दृष्टिकोण से वो दोषी है. कानून के मुताबिक बलात्कारी की पत्नी तलाक ले सकती है क्योंकि वो विधवा के रूप में गुजर-बसर करने के लिए तैयार नहीं है.

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अक्षय की पत्नी के वकील मुकेश कुमार सिंह का कहना है कि महिला को विधिक अधिकार है कि हिन्दू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत बलात्कार या अन्य मामलों में तलाक ले सकती हैं. वकील का कहना है कि दुष्कर्म के मामले में अगर पति दोषी ठहरा दिया जाता है तो महिला को अधिकार है कि वो तलाक ले सकती हैं. औरंगाबाद परिवार न्यायालय इस पर 19 मार्च को सुनवाई करेगा. 20 मार्च को निर्भया के आरोपियों को फांसी का दिन मुकर्रर किया गया है.

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