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सीमा विवाद में उलझी दो थानों की पुलिस, 2 माह बाद भी हत्या की FIR नहीं

दिल्ली में दो थानों की पुलिस के सीमा विवाद में कत्ल का एक मामला करीब दो माह से दर्ज ही नहीं हो पाया है. पीड़ित परिवार दोनों थानों के चक्कर काट-काट कर थक गया है, लेकिन पुलिस ने अभी भी उनकी कोई सुनवाई नहीं की है.

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तनसीम हैदर [Edited by: परवेज़ सागर]नई दिल्ली, 14 November 2017
सीमा विवाद में उलझी दो थानों की पुलिस, 2 माह बाद भी हत्या की FIR नहीं पीड़ित परिवार दोनों थानों के चक्कर काट रहा है

दिल्ली में दो थानों की पुलिस के सीमा विवाद में कत्ल का एक मामला करीब दो माह से दर्ज ही नहीं हो पाया है. पीड़ित परिवार दोनों थानों के चक्कर काट-काट कर थक गया है, लेकिन पुलिस ने अभी भी उनकी कोई सुनवाई नहीं की है.

मामला दक्षिणी पश्चिमी दिल्ली के द्वारका सैक्टर 23 का है. जहां शाहाबाद मोहम्मदपुर गांव का एक परिवार पिछले दो महीनों से अपने जवान बेटे की मौत को लेकर दिल्ली पुलिस के दो थानों के चक्कर काट रहा है. वो परिवार कभी रेलवे थाना दिल्ली कैंट जाता है तो कभी द्वारका सेक्टर 23 थाने के चक्कर लगाता है.

मगर पुलिस वाले उनकी एक नहीं सुनते. घटना बीती 2 अक्टूबर की है. जब 22 वर्षीय एक युवक का शव रेलवे ट्रैक पर मिला था. बाद में परिजनों का पता चला था कि युवक की हत्या कर शव रेलवे ट्रैक पर फेंका गया था. लेकिन रेलवे पुलिस ने इस मामले को द्वारका सैक्टर 23 थाना पर टाल दिया.

इसके बाद दोनों थानों की पुलिस पीड़ित परिवार को यहां से वहां घूमा रही है. दोनों थानों की पुलिस इस हत्या के मामले को एक दूसरे के थाना क्षेत्र का बता रही है. ऐसे में पीड़ित परिवार मजबूर हो कर दोनों थानों के चक्कर काट रहा है और न्याय की गुहार लगा रहा है.

मृतक युवक का नाम योगेश लांबा था. जिसका शव शाहाबाद मोहम्मदपुर गांव के पास ही रेलवे ट्रेक पर रेलवे पुलिस को मिला था. पहले तो परिवार वालों ने इसे दुर्घटना मानकर शव का अंतिम संस्कार कर दिया लेकिन बाद में पीड़ित परिवार को चश्मदीदों से पता चला की योगेश की मौत दुर्घटना से नहीं बल्कि उसकी हत्या की गई थी.

रेलवे ट्रेक पर जहां उसका शव मिला था. उससे 500 मीटर की दूरी पर उसकी हत्या कर शव घसीट कर रेलवे ट्रेक पर फेंका गया था. हत्या वाले दिन योगेश को कोई बाइक पर बैठा कर लेकर गया था. रेलवे ट्रेक के पास बने पेट्रोल गोदाम की दीवारों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं. पुलिस अगर चाहे तो उससे भी वारदात का खुलासा हो सकता है.

इन सब बातों के बावजूद पिछले दो माह दोनों थानों की पुलिस अभी तक ये डिसाइड नहीं कर सकी है कि आखिर ये मामला किस थाने के तहत आएगा. परेशान होकर पीड़ित परिवार ने पुलिस के आलाधिकारियों से गुहार लगाई है.

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