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Delhi Violence: दिल्ली में कल जहां पलती थीं खुशियां, आज है मातम वहां

दिल्ली का उत्तर पूर्वी इलाका यानी वो जगह जो पिछले पांच दिनों से लगातार हिंसा की आग में झुलसता रहा. इस नफरत की आग ने सबकुछ जला दिया.

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aajtak.in
aajtak.in/ परवेज़ सागर नई दिल्ली, 28 February 2020
Delhi Violence: दिल्ली में कल जहां पलती थीं खुशियां, आज है मातम वहां दिल्ली हिंसा में 41 लोगों की मौत हो चुकी है (फोटो- PTI)

  • दिल्ली हिंसा की आग में जल गई इंसानियत
  • 12 थाना क्षेत्रों में तीन दिन होता रहा बवाल

उत्तर पूर्वी दिल्ली का एक बड़ा इलाका वैसे तो पूरा ही हिंसा की आग में झुलसता रहा लेकिन कुछ इलाके तो ऐसे हैं, जिन्हें देख कर ये पहचान पाना भी मुश्किल है कि कभी वहां ज़िंदगी गुलज़ार रहा करती थी. अब सवाल ये है कि आख़िर कौन से हैं वो इलाक़े? इन इलाक़ों में नफरत की आग सबसे ज़्यादा क्यों भड़की?

राजधानी दिल्ली का उत्तर पूर्वी इलाक़ा यानी वो जगह जो पिछले पांच दिनों से लगातार हिंसा की आग में झुलसता रहा. वैसे तो ये हिंसा पूरे के पूरे उत्तर पूर्वी ज़िले के सभी 12 थाना इलाक़ों में हुई है, लेकिन चांदबाग, शिवपुरी, मुस्तफ़ाबाद, कर्दमपुरी, कबीरनगर, बाबरपुर, गोकुलपुरी और जाफराबाद कुछ ऐसे इलाके हैं, जहां हिंसा की आग सबसे ज़्यादा भड़की.

अब सवाल ये है कि आख़िर इन इलाक़ों के साथ ऐसी क्या बात थी कि पूरे उत्तर पूर्वी जिले में सबसे ज़्यादा नफरत का खेल यहीं खेला गया?

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दरअसल, इन इलाकों की आबादी मिलीजुली है यानी यहां अलग-अलग तबकों और सियासी सोच के लोगों की आबादी करीब-करीब बराबर की तादाद में है. फिर इन सभी के सभी इलाकों की आबादी न सिर्फ बेहद घनी हैं, बल्कि गलियां भी बेहद तंग हैं, जहां उपद्रवियों के लिए न सिर्फ हिंसा फैलाना आसान है, बल्कि हिंसा फैलाकर छुप जाना भी आसान है. इसके अलावा मकान भी एक-दूसरे से बिल्कुल सटे हुए हैं. ऐसे में उपद्रवियों के लिए एक मकान से दूसरे मकान में पहुंचना और छुपना भी बेहद आसान है.

इतना ही नहीं, इन इलाक़ों में पहले दो दिनों तक पुलिस की मौजूदगी नहीं के बराबर थी और जब पुलिस पहुंची भी तो शुरू में इलाके की इसी बनावट और बसावट के चलते उसके लिए हरेक कोने तक पहुंचना मुमकिन नहीं हो पाया. ऐसे में दोनों पक्षों के उपद्रवियों ने खुलकर पुलिस की गैर मौजूदगी का फायदा उठाया और तोड़-फोड़, आगज़नी और हत्याओं की वारदात को अंजाम दिया.

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चांदबाग में जलाए गए पेट्रोल पंप को ही देख लीजिए, यहां जब उप्रदवी वहां पर मनमानी कर रहे थे, तो दूर-दूर तक पुलिस नहीं थी. सड़क पर बिखरे पत्थर, हर तरफ जली हुई गाड़ियां और गोकुलपुरी की ये पूरी की पूरी जली हुई टायर मार्केट इस बात की गवाह है कि यहां नफरत में अंधे लोगों ने कैसे इंसानों के साथ इंसानियत को भी मिटाने की पूरी कोशिश की.

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