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दिल्ली पुलिस ने पकड़े गैंग के 7 शातिर, 60 लाख के 311 स्मार्टफोन हुए बरामद

इस गैंग के बदमाश अब तक 10 हजार से ज्यादा मोबाइल नेपाल भेज चुके हैं जिनकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है. पुलिस ने गैंग के सात सदस्यों की गिरफ्तारी के साथ इनके पास से कुल 311 स्मार्टफोन बरामद किए हैं, जिनकी कीमत 60 लाख से ज्यादा बताई जा रही है.

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aajtak.in
अनुज मिश्रा नई दिल्ली , 02 June 2019
दिल्ली पुलिस ने पकड़े गैंग के 7 शातिर, 60 लाख के 311 स्मार्टफोन हुए बरामद गैंग के सात बदमाश गिरफ्तार

दिल्ली में अपराध लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा मामले मोबाइल झपटमारी के सामने आते हैं. रोजाना लाखों के फोन या तो छीने जाते हैं या चोरी होते हैं. ऐसे में पुलिस चाहकर भी इन वारदातों को रोकने में नाकाम रही है. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस बार एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है जो दिल्ली में न सिर्फ मोबाइल की चोरी करते, बल्कि चोरी की इन मोबाइल को देश से बाहर नेपाल में बेच दिया करते थे.

ये गैंग बेहद शातिर तरीके से झपटमारों से मोबाइल लेकर नेपाल भेजते थे. अब तक ये लोग 10 हजार से ज्यादा मोबाइल नेपाल भेज चुके हैं जिनकी कीमत करोड़ों में बताई जा रही है. पुलिस ने इनके पास से कुल 311 स्मार्टफोन बरामद किए हैं जिनकी कीमत 60 लाख से ज्यादा बताई जा रही है.

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आईफोन से लेकर सैमसंग तक वीवो से लेकर ओपो तक ऐसा कोई महंगा फोन नहीं जो यहां न रखा हो. ये 311 स्मार्टफोन जिनकी कीमत करीब 60 लाख से ज्यादा है, ये किसी शोरूम में नहीं, बल्कि झपटमारी और जेबतराशी कर इकठ्ठे किए गए वो फोन हैं, जिनको नेपाल भेजने की तैयारी चल रही थी. लेकिन इससे पहले ही क्राइम ब्रांच ने ये मोबाइल बरामद कर लिए और पूरा गैंग पकड़ में आ गया.

क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश देव के मुताबिक, इस गैंग के कुल 7 लोग गिरफ्तार हुए हैं, जिनमें झपटमार, खरीददार, बिचौलिया और आखिर में फोन को नेपाल भेजने वाला भी शामिल है. इस गैंगे में रोहित नाम का शख्स जो मोबाइल छीनता था. मुकेश, नरेश, गोपाल पाठक और राजन ये वो लोग हैं जो रोहित और दिल्ली के दूसरे दर्जनों झपटमारों से मोबाइल खरीदते थे.

करोलबाग में एक दफ्तर खोलकर बैठा दूसरा नरेश इन चारों से मोबाइल खरीदता था, फिर नरेश ये मोबाइल नेपाल के रहने वाले एक राम सिंह नाम के शख्स को थोक में बेच देता था. राम सिंह नेपाल में बैठे मोबाइल रिसीवर का कर्मचारी है जिसे यहां इसी काम के लिए नौकरी पर रखा गया था.

पुलिस इस गैंग को करीब एक महीने से ट्रैक कर रही थी. जांच के दौरान पता चला कि इस गैंग का मुखिया नरेश है जिसने बाकायदा बीडनपुरा में अपना दफ्तर खोलकर बैठा हुआ है. इस गैंग में सबके काम बटे हुए हैं. सिस्टमैटिक तरीके से गैंग अपना काम कर रहा था. इस गैंग में ज्यादातर वो लोग हैं जो करोलबाग के गफ्फार मार्केट में मोबाइल रिपेयरिंग का काम करते थे, लेकिन उसमें मुनाफा कम होने के चलते इस धंधे में आ गए.

पुलिस के मुताबिक ये लोग हर हफ्ते करीब 60 मोबाइल दिल्ली से बाहर नेपाल भेजते थे. पिछले डेढ़ साल में ये गैंग करीब 10 हजार से ज्यादा मोबाइल नेपाल भेज चुका है, जिसकी कीमत करोड़ो में बताई जा रही है.

पकड़े गए मोबाइल फोनों में 90 आईफोन है. पुलिस के मुताबिम ये लोग मोबाइल इस लिए नेपाल में बेचते थे, ताकि फोन में आईएमईआई नंबर के जिरए भी इन्हें पकड़ा न जा सके. दरअसल, भारत में किसी भी फोन को आईएमआई नंबर के जरिए सिर्फ भारत में पकड़ा जा सकता है. ऐसे में एक बार ये फोन इंडिया से बाहर गया तो उसे पकड़ पाना बेहद मुश्किल है और यही वजह है कि ये बिना फोन का आईएमईआई नंबर चेंज किए इसे नेपाल भेज दिया करते थे.

क्राइम ब्रांच इनसे बरामद हुए 311 मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबर दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर दो दिन में लोड कर देगी. ऐसे में पुलिस ने उन लोगों से अपील की है जिनके मोबाइल फोन चोरी हुए हो या गुम हुए हो, वो अपने गायब हुए फोन के आईएमईआई नंबर के जरिये ये चेक कर ले कि कहीं इन फोन में उनका भी फोन तो नहीं है.

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