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नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड: आरोपियों को 4 जून तक की CBI हिरासत में भेजा

सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रकाश सूर्यवंशी ने अदालत से कहा कि दोनों ही आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे. इनसे पूछताछ के लिए और वक्त चाहिए. उन्होंने अदालत को बताया कि पुनालेकर का एक मोबाइल फोन, दो लैपटॉप जब्त किया गया है. आगे की जांच के लिए हार्ड डिस्क और मोबाइल डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है.

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aajtak.in
पंकज खेलकर पुणे, 01 June 2019
नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड: आरोपियों को 4 जून तक की CBI हिरासत में भेजा Narendra Dabholkar

चर्चित नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड मे आरोपी वकील संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को पुणे की विशेष अदालत ने 4 जून तक हिरासत में भेज दिया है. सीबीआई के वकील ने अदालत को 7 दिन की रिमांड के दौरान जांच में हुई प्रगति की जानकारी दी और अधिक पूछताछ के लिए 14 दिन की रिमांड मांगी. एडिशनल सेशन जज एवी रोट्टे ने सीबीआई के अनुरोध पर दोनों को 4 जून तक सीबीआई की हिरासत में भेज दिया.

सीबीआई की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रकाश सूर्यवंशी ने अदालत से कहा कि दोनों ही आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे. इनसे पूछताछ के लिए और वक्त चाहिए. उन्होंने अदालत को बताया कि पुनालेकर का एक मोबाइल फोन, दो लैपटॉप जब्त किया गया है. आगे की जांच के लिए हार्ड डिस्क और मोबाइल डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है. सीबीआई ने कहा कि आगे जांच के लिए पुनालेकर से और पूछताछ की जरुरत है. उन्होंने कहा कि पुनालेकर केवल वकील नहीं है, बल्कि वह सनातन संस्था से भी जुड़ा हुआ है. हिंदू विधिज्ञा परिषद के कथित पदाधिकारी पुनालेकर ने 2013 के इस हत्याकांड में कुछ आरोपियों की पैरवी की थी.

सूर्यवंशी ने कहा कि पुनालेकर ने दाभोलकर के कथित शूटरों में से एक शरद कालस्कर को 3 पिस्तौल नष्ट करने के लिए कहा था. पुनालेकर ने अन्य आरोपियों के साथ इस मामले में साजिश रची थी. जिसमें वह लोग भी शामिल हैं, जो आरोपपत्र में नामजद हैं. भावे ने भी इसमें पुनालेकर की मदद की थी. विशेष लोक अभियोजक सूर्यवंशी ने कहा कि आरोपी भावे 2008 के ठाणे बम विस्फोट मामले में दोषी है. वह भी जांच के दौरान सहयोग नहीं कर रहा है.

गौरतलब है कि दाभोलकर मामले में सीबीआई ने सनातन संस्था के सदस्य और ईएनटी सर्जन विरेंद्रसिंह तावड़े, कथित शूटर सचिन अंडुरे और शरद कालस्कर को गिरफ्तार किया है. बता दें कि नरेंद्र दाभोलकर की 20 अगस्त 2013 की सुबह गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. उस समय वह सैर के लिए निकले थे. दाभोलकर ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर बनने की बजाय खुद को सामाजिक कार्यों में लगा दिया. उन्होंने साल 1982 में अंधविश्वास निर्मूलन के लिए आंदोलन शुरू किया और 1989 में महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की स्थापना की थी.

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