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बुलंदशहर हिंसाः सुमित की अर्थी को बीजेपी सांसद ने दिया कंधा

अभी तक इस हिंसा में 7 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है. उन्होंने बताया कि अभी तक 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 4 ही लोगों को हिरासत में लिया गया है.

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Assembly Elections 2018
अरविंद ओझा [Edited By: मोहित ग्रोवर/सुरेंद्र]नई दिल्ली, 04 December 2018
बुलंदशहर हिंसाः सुमित की अर्थी को बीजेपी सांसद ने दिया कंधा UP एडीजी आनंद कुमार (फोटो- ANI)

बुलंदशहर हिंसा पर राजनीति लगातार जारी है. हिंसा में मारे गए सुमित की अर्थी को बुलंदशहर से बीजेपी सांसद भोला सिंह ने कंधा दिया तो शहीद इंस्पेक्टर सुबोध के परिजनों से मिलने आप सांसद संजय सिंह पहुंचे. वहीं यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) आनंद कुमार ने कहा कि बुलंदशहर में अब हालात काबू में है.

घटना पर स्थानीय सांसद भोला सिंह ने कहा कि यह बात सही है कि इलाके में लगातार गौकशी हो रही है. गौकशी की शिकायत लगातार लोग कर रहे थे. लेकिन प्रशासन ने इसे नजरअंदाज किया तभी यह बड़ी घटना घट गई. बुलंदशहर में इल्तेदा (मुस्लिम समुदाय का प्रोग्राम ) का प्रोग्राम चल रहा था. पुलिस को इन लोगों ने गुमराह किया और कई लाख लोग आए. पुलिस उन्हीं के इंतजार में लगी रही और फिर इधर बड़ी घटना हो गई. मौके पर प्रशासन नहीं पहुंच सका.

भोला सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन ने सुमित के परिजनों को 5 लाख रुपए देने का वादा किया है. प्रशासन ने यह भी वादा किया है कि FIR से सुमिता का नाम हटेगा.

वहीं बुलंदशहर की घटना में शहीद इंस्पेक्टर सुबोध सिंह के परिजनों की मदद के लिए एसएसपी डॉक्टर अजयपाल शर्मा की पहल पर गौतम बुद्ध नगर पुलिस ने बड़ा फैसला लिया है. जिले में तैनात करीब 2300 पुलिसकर्मी अपनी एक दिन की सैलरी (करीब 40 लाख रुपये) सुबोध सिंह के परिजनों प्रदान करेंगे.

प्रशांत कुमार (एडीजी मेरठ जोन) ने कहा कि उसका (सुमित) नाम अभी भी एफआईआर में दर्ज है लेकिन वह मर चुका है, ऐसे में अगर उस पर आरोप भी सिद्ध होता है तो भी हम उसके खिलाफ कुछ नहीं कर सकते. राज्य सरकार के आदेश पर एसआईटी गठित की जा चुकी है और अब वही इस मामले में फैसला लेगी.

इससे पहले बुलंदशहर हिंसा के मुद्दे पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर आनंद कुमार ने मंगलवार को कहा कि बुलंदशहर में अब हालात काबू में है. अभी तक इस हिंसा में 7 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है. उन्होंने बताया कि अभी तक 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 4 ही लोगों को हिरासत में लिया गया है.

ADG ने बताया कि इस हिंसा में 582/18 के तहत गोकशी और हिंसा के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है. हमारी 6 टीमें अभी छापेमारी कर रही है. वीडियो फुटेज, चश्मदीदों के बयान पर ही कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है.

'काबू में है माहौल'

उन्होंने बताया कि बुलंदशहर में इज्तेमा भी चल रहा था, लेकिन वो कोतवाली क्षेत्र में था. वहां पर करीब 15 लाख लोग आए हुए थे, अभी सिर्फ 15-20 हजार लोग बचे हैं. हालात काबू में हैं.

'परिवारवालों की चिंता दूर करेंगे'

सुबोध कुमार के बारे में उन्होंने कहा कि उनकी अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ की गई है. परिवार की जो भी शिकायतें हैं उन सभी को दूर कर दिया जाएगा.

'गोली लगने से सुमित की मौत'

हिंसा में मारे गए युवक सुमित के बारे में यूपी एडीजी ने कहा कि उनका पोस्टमार्टम हो गया है, शरीर में से गोली निकली है. वो गोली किस कैलिबेर की है, इसकी जांच चल रही है. सुमित भी प्रदर्शन में शामिल था, लेकिन उसका क्या रोल था ये नहीं पता है.

'चार लोग गिरफ्तार, संगठन का पता नहीं'

जो लोग गिरफ्तार हुए हैं उनमें चमन, देवेंद्र, आशीष चौहान, सतीश हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन का नाम सामने नहीं आया है. ये वो लोग हैं जो भीड़ में आगे थे. योगेश राज का भी नाम सामने आया है, उनकी गिरफ्तारी की कोशिशें की जा रही हैं. योगेश राज अभी ना गिरफ्तार है ना ही हिरासत में है.

'अखलाक कांड की शुरुआती जांच में थे सुबोध'

एडीजी ने बताया कि सुबोध कुमार अखलाक कांड की शुरुआती जांच के अधिकारी रहे थे, उन्होंने केस को फाइनल नहीं किया था. इस घटना को किसी का फेलियर बताना जल्दबाजी होगी, एसआईटी की जांच से ये पता लगेगा कि क्या इसमें किसी की गलती थी या नहीं. सुबोध कुमार 28 सितंबर से 9 नवंबर तक केस के IO रहे थे. उसके बाद दूसरे IO नियुक्त रहे. बाद में उनका ट्रांसफर कर दिया गया था.

उन्होंने कहा कि शुरुआती तौर पर ग्रामीणों की तरफ से फायरिंग की बात सामने आई है, हालांकि इसके बारे में एसआईटी ही बताएगी. पुलिस की ओर से हवाई फायरिंग की गई थी. अभी तक किसी पुलिसवाले पर कार्रवाई नहीं की गई है. जब भीड़ की ओर से पथराव शुरू हुआ, तो सीओ की तरफ से फोर्स की डिमांड की गई थी.

ऐसे हुई सुबोध कुमार की हत्या...

एडीजी आनंद कुमार ने बताया कि सुबोध सिंह को पहले पत्थर लगा, जिसके बाद वे गिर गए. पुलिस वाले पीछे के गेट से अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन भीड़ का एक हिस्सा तभी वहां पर आ गया. पुलिसवालों पर पथराव और गोलीबारी की गई. जिसके बाद दूसरी गाड़ी में सुबोध कुमार को अस्पताल ले जाया गया.

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