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अपने काम के स्टाइल से यह फॉरेस्ट रेंजर कहलाता है 'वन सिंघम'

पश्चिम बंगाल के 38 साल के फॉरेस्ट रेंजर संजय दत्ता 'वन सिंघम' के नाम से मशहूर हैं. इसके पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है. जंगलों और जंगली जानवरों को शिकारियों से बचाने के लिए वह कुछ भी कर सकते हैं. पिछले 8 सालों में उन्होंने 200 शिकारियों और 300 से भी ज्यादा लकड़ी तस्करों को गिरफ्तार करने में अहम भूमिका निभाई है.

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Sahitya Aajtak 2018
aajtak.in [Edited by: राहुल सिंह]कोलकाता, 05 June 2017
अपने काम के स्टाइल से यह फॉरेस्ट रेंजर कहलाता है 'वन सिंघम' लोग अपने इस 'वन सिंघम' से बेहद प्यार करते हैं

देश की बागडोर असल मायने में अफसरों के हाथों में होती है. यदि नौकरशाही दुरुस्त हो तो कानून-व्यवस्था चाक-चौबंद रहती है. जिस तरह से भ्रष्टाचार का दीमक नौकरशाही को खोखला कर रहा है, लोगों का उसपर से विश्वास उठता जा रहा है. लेकिन कुछ ऐसे भी अफसर हैं, जो देशसेवा का जुनून लिए नौकरशाही की साख बचाए हुए हैं. उनकी दिलेरी के किस्से आज मिसाल के तौर पर पेश किए जा रहे हैं. aajtak.in ऐसे ही जांबाज अफसरों पर एक सीरीज पेश कर रहा है. इस कड़ी में पेश है पश्चिम बंगाल के फॉरेस्ट रेंजर संजय दत्ता उर्फ 'वन सिंघम' की कहानीः

'वन सिंघम' के नाम से मशहूर
पश्चिम बंगाल के 38 साल के फॉरेस्ट रेंजर संजय दत्ता 'वन सिंघम' के नाम से मशहूर हैं. इसके पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प है. जंगलों और जंगली जानवरों को शिकारियों से बचाने के लिए वह कुछ भी कर सकते हैं. पिछले 8 सालों में उन्होंने 200 शिकारियों और 300 से भी ज्यादा लकड़ी तस्करों को गिरफ्तार करने में अहम भूमिका निभाई है.

टीम के मुखिया हैं 'वन सिंघम'
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, फॉरेस्ट रेंजर संजय दत्ता तस्करों, शिकारियों और अवैध वन्यजीव व्यापारियों को पकड़ने वाली टीम के मुखिया हैं. संजय दत्ता की मानें तो उन्होंने तस्करों के पास से ऐसी प्रजाति के जीव-जंतु पकड़े हैं, जो विलुप्तप्राय और संरक्षित श्रेणी में आते हैं. इस लिस्ट में बाघ, तेंदुआ, हाथी दांत, गैंडा, अजगर की खाल, दोमुंहा सांप के नाम से मशहूर रेड सेंड बोआ सांप, रंगीन छिपकली गेंको और तमाम समुद्री जीव भी शामिल हैं.

जंगलों को बचाने में खाईं हैं गोलियां
फॉरेस्ट रेंजर संजय दत्ता कहते हैं कि 'मुझे अपना काम और जंगल बेहद पसंद हैं. मेरे पिता भी फॉरेस्ट रेंजर रह चुके हैं और उन्होंने अपना जीवन इन्हीं जंगलों में गुजारा है.' वह कहते हैं कि जंगलों को बचाने के लिए उन्होंने गोलियां भी खाई हैं. वहीं वह अपने एक सबसे करीबी सहयोगी को भी खो चुके हैं. वन्यजीव अपराध और अवैध व्यापार को रोकने के लिए अपने समर्पित प्रयासों के लिए दत्ता को पिछले साल 'क्लार्क आर बावियन वन्यजीव कानून प्रवर्तन पुरस्कार' से नवाजा गया.

उपलब्धियों ने दिया नया नाम, 'वन सिंघम'
इस साल दत्ता को बंगाल सरकार ने बेस्ट वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया. दत्ता की इन्हीं उपलब्धियों ने उन्हें 'वन सिंघम' बना दिया. आसपास के इलाकों के लोग अपने इस सिंघम को बेहद प्यार करते हैं. बताते चलें कि फॉरेस्ट रेंजर संजय दत्ता 3300 हेक्टेयर में फैले बेलकोबा क्षेत्र में पड़ने वाले बैकंठपुर जंगल की निगरानी करते हैं. दत्ता के दफ्तर के बाहर जंग खा रहे वाहनों का जमावड़ा है. ये सभी वाहन उत्तर बंगाल के जंगलों के अवैध वन्यजीव व्यापारियों और लकड़ी चोरों से जब्त किए गए हैं.

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