एडवांस्ड सर्च

Advertisement

GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई

अरविंद ओझा [ Edited By: आदित्य बिड़वई ]
09 April 2019
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
1/17
संसद में महिलाओं की सुरक्षा और आरक्षण से लेकर नारी सशक्तिकरण तक की बातें तमाम पार्टियों के नेता करते हैं, लेकिन हर चुनाव के बाद नेता अपना वादा भूल जाते हैं. इसी बीच महिलाओं का एक तबका ऐसा भी सामने आता है जिनके लिए महिला अधिकार, आरक्षण और सुरक्षा जैसे अल्फाज सब बेमानी हो जाते हैं. हम बात कर रहे हैं उन महिलाओं की, जो दिल्ली की बदमान गलियों में रहकर अपना जिस्म बेचने को मजबूर होती हैं. लेकिन भारतीय संविधान ने इन महिलाओं को भी वोट डालने का अधिकार दिया है. लोकतंत्र के इस पर्व में दिल्ली के कोठों से निकलकर मतदान केंद्रों तक जाने वाली महिलाओं की दास्तान....किसी भी आम आदमी के रौंगटे खड़े कर सकती है.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
2/17
ये है दिल्ली का जीबी रोड यानी रेड लाइट एरिया. जहां होता है जिस्म का धंधा. इन कोठों की सीढ़ियां पर कोई दरवाजा नहीं है. ये चौबीसों घंटे हरेक के लिए खुली रहती हैं. यहां खाकी की भी एंट्री है और खादी की भी. शरीफों की भी और बदमाशों की भी.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
3/17
दिल्ली की इन बदनाम कोठों की सीढ़ियों से लोकतंत्र के सबसे बड़े घर यानी की संसद दहलीज़ महज पांच किलोमीटर दूर है. ये दूरी नापनी जरूरी थी ताकि आप उस फ़ासले को समझ सकें जो देश की राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया और देश के संसद के करीब है.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
4/17
इसी संसद की 543 सीटों को भरने के लिए एक बार फिर चुनाव हो रहा है. हर पार्टी हर वोटर को लुभाने की जी-तोड़ कोशिश कर रही है. मगर क्या इन कोशिशों में पचास लाख की ये आबादी भी शामिल है? जी हां. पचास लाख. हिंदुस्तान के अलग-अलग कोठों में बसने वाली पचास लाख की ये आबादी जो वोटर भी है.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
5/17
पर क्या ये चुनाव इनके लिए कोई मायने रखता है? क्या इन चुनावों से इन्हें कोई उम्मीद रहती है? और क्या देश की राजनीतिक पार्टियां चुनावी मौसम में इन्हें याद रखते है? आपको यह बात हैरान कर देगी कि अकेले दिल्ली में करीब दो सौ कोठों के छोटे-बड़े दरबों में चार से पांच हजार सेक्स वर्कर्स रहती हैं. जो हर रोज़ हर पल अपनी मजबूरियों का. अपनी ज़मीर का, अपनी खुशियों का, अपनी बेबसी का सौदा करने को मजबूर हैं.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
6/17
ये खेल कोई आज से नहीं बल्कि बरसों से है. अजीब फसाना ये है कि इन सेक्स वर्कर्स के साथ ही इन्हीं कोठों पर लगभग हजार बच्चे भी परवरिश पा रहे हैं. जो इन्हीं कोठों की पैदाइश हैं. वो हर मज़हब के मर्दों को पहचानती है. कौन कमज़ोर है. कौन ताक़तवर. कौन अय्याश है. कौन बेघर. वो हर कहानी जानती है. वो तवायफ़ है. शायद इसीलिए दुनिया को ज्यादा पहचानती है.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
7/17
उसके कमरे की दीवारों पर हर धर्म की एक एक तस्वीर लटकी है. किसी में काबा जगमगा रहा है. किसी तस्वीर में कृष्ण को राधा पर बहुत प्यार आ रहा है. एक फ्रेम में गुरु नानक का चेहरा गुनगुना रहा है. एक सलीब पर ईसा का लहूलुहान जिस्म नज़र आ रहा है.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
8/17
कहां हैं खोखली तकरीरें करते हुए हमारे मुल्क के इज्ज़तमआब लीडर. जो पिछले 70 बरसों से मुल्क में कौमी एकता लाने के लिये दिन और रात एक किए देते हैं और उनकी हर कोशिश एक नया साम्प्रदायिक वातावरण तैयार कर देती है. जिसमें लहू बहता है... मांगे उजडती हैं... बच्चे यतीम होते हैं.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
9/17
हमारे मुल्क में हर जगह ऐसे गली कूचे हैं जहां दुनिया का पहला आदमी और दुनिया की पहली औरत आज भी जिंदा है. मर्द का नाम वही पुराना है. आदम. लेकिन औरत का नाम बदल दिया गया है अब उसे हव्वा नहीं... तवायफ़ कहते हैं.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
10/17
यहां ना कोई 15 लाख का वादा है. ना 12 हज़ारा का दावा है. ना इनकी पेंशन का ख्याल है. ना इनकी सेहत की फिक्र है. अफसोस इस बात का है कि इन्हें तो झांसा देने भी कोई नहीं आता है.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
11/17
मगर वोट का सवाल है तो कभी कभार दुनिया से नज़रें छुपाते हुए कभी कोई आ भी गया तो अगले पांच साल तक फिर मुंह दिखाने भी नहीं आता है. कोई सुने.. भले ना.. मगर ये कह तो दें.. जान तो लें कि इनके दिल में क्या है.

GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
12/17
इन तंग गलियों में रहने वालियों को अपने नेताओं से उम्मीद है कि वो इनके इस असंगठित पेशे को संगठित बना दें. सेहत.. शिक्षा.. साफ सफाई का ख्याल रखें.. और अगर उनसे इतना भी ना हो सके...तो रहने दें.. बस चैनों सुकून से कमाने खाने दें. बाकी इंतजाम और अपनी ज़िंदगी का सामान ये खुद जुटा लेंगी.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
13/17
सेक्स वर्कर्स का बस इतना ही कहना है कि जो उन्हें कमाने दे वही ठीक है. जो मदद करेगा उसकी तरफ हैं. कितनी अदना और मासूम सी मांग है. बदनाम गली की इन बेचारियों की. अगर ये भी पूरी ना हो तो ये और क्या उम्मीद करें आपसे.

GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
14/17
मुल्क तो आपसे 15 लाख का हिसाब मांगेगा.. 2 करोड़ रोज़गार का सवाल करेगा.. किसान फसल के दाम मांगेगा.. मज़दूर काम मांगेगा.. मगर इन्होंने अपनी विश लिस्ट.. यानी तमन्नाओं की फेहरिस्त में सिर्फ एक तमन्ना लिखी है.. जियो और जीने दो.. परेशान मत करो कभी एनजीओ के ज़रिए.. कभी पुलिसवालों के ज़रिए.. कभी नोट बंद कर के..

GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
15/17
पुरानी दिल्ली में जो चांद निकलता है वो सिर्फ चांदनी चौक में ही चांदनी नहीं बिखेरता.. बल्कि जीबी रोज की ये 20 बदनाम गलियां भी उसी से रौशन होती हैं.. संसदीय क्षेत्र भी वही है.. जो बल्ली मारां और चांदनी चौक वालों का है. वोटर उधर भी हैं.. वोटर इधर भी हैं.. तो सारी नज़रें उधर क्यों हैं.. इन्हें कोई क्यों नहीं पूछ रहा और इनसे वोट मांगने के लिए भी अगर नेताओं को दुनिया से नज़रें चुरानी पड़े तो फिर वो किस बात के रहनुमा है.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
16/17
एक बात और समझ लीजिए.. चुनाव आते ही देश के हर कोने में हिंदू मुस्लिम भले खतरे में आ जाता हो.. भले नेता उन्हें एक दूसरे का दुश्मन साबित कर देते हों.. मगर ये इकलौती ऐसी जगह है.. जहां हिंदु.. मुस्लिम.. सिख.. ईसाई.. खाते भी साथ हैं.. पीते भी साथ हैं.. हंसते भी साथ हैं.. रोते भी साथ हैं.. और इनकी इबादत का तरीका देखेंगे तो आपको अपने पढ़े लिखे होने पर भी शर्म आ जाएगी.
GB रोड के कोठों से पोलिंग बूथ तक की कहानी, रौंगटे खड़े कर देगी सच्चाई
17/17
असल मायने में तो यही सच्चा हिंदुस्तान है.. बहरहाल चुनाव का माहौल है तो सिर्फ चुनाव की बात करते हैं.. आइये जान तो लें कि इन्हें नेता कौन सा पसंद है.. ये किसकी विचारधारा से इत्तेफाक रखती हैं.. और देश की राजनीति में इनका कितना दखल है. जहां से चंद कदमों की दूरी पर देश की सियासत की दशा और दिशा तय हो.. वहां से चंद कदमों पर ये गलियां रौशनी से महरूम रह जाएं.. ये कितने शर्म की बात है.. कभी सियासत से ऊपर उठ के सोचिए.. बहुत अफसोस होगा.

Advertisement
Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay