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रो पड़े युवराज और भज्जी, सचिन को कंधे पर घुमाया

सचिन तेंदुलकर के लिये विश्व कप जीतने का वादा करने वाली टीम इंडिया ने जब श्रीलंका को फाइनल में हराकर इसे पूरा किया तो खिलाड़ी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और इस चैम्पियन बल्लेबाज को कंधे पर बिठाकर टीम इंडिया ने वानखेड़े स्टेडियम का चक्कर लगाया.

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भाषा/आजतक ब्‍यूरोमुंबई, 02 April 2011
रो पड़े युवराज और भज्जी, सचिन को कंधे पर घुमाया

सचिन तेंदुलकर के लिये विश्व कप जीतने का वादा करने वाली टीम इंडिया ने जब श्रीलंका को फाइनल में हराकर इसे पूरा किया तो खिलाड़ी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और इस चैम्पियन बल्लेबाज को कंधे पर बिठाकर टीम इंडिया ने वानखेड़े स्टेडियम का चक्कर लगाया.

कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने छक्का लगाकर ज्यों ही टीम को जीत दिलाई, दूसरे छोर पर उनके साथ खड़े युवराज सिंह दौड़कर उनके गले मिले और फफक पड़े. ड्रेसिंग रूम में बैठे तमाम भारतीय खिलाड़ियों ने मैदान पर दौड़कर युवराज और धोनी को गले लगा लिया. हरभजन सिंह हो या सचिन तेंदुलकर या फिर पहला विश्व कप खेल रहे विराट कोहली, सभी की आंखों में खुशी के आंसू थे.

युसूफ पठान, सुरेश रैना और विराट कोहली ने मिलकर सचिन को कंधे पर उठा लिया और पूरी टीम ने ‘सचिन-सचिन’ चिल्लाते हुए वानखेड़े स्टेडियम का चक्कर लगाया. विराट ने कहा, ‘इस चैम्पियन खिलाड़ी ने 21 साल तक देश की उम्मीदों का बोझ उठाया है और आज हमारी बारी थी उन्हें कंधे पर उठाकर सम्मान देने की.’

फाइनल में 97 रन की मैच जिताऊ पारी खेलने वाले गौतम गंभीर ने कहा, ‘हम सभी की आंखों में खुशी के आंसू हैं. हमने 2007 विश्व कप में खराब खेला था लेकिन आज जीतने का सपना सच हो गया.’गंभीर ने इस विश्व कप को सचिन के नाम करते हुए कहा, ‘हम सभी ने सचिन के लिये विश्व कप जीतने का वादा किया था और आज उसे निभाकर खुशी हो रही है.’

ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने कहा, ‘विश्व कप जीतने की खुशी बयान नहीं की जा सकती. मैं तीन विश्व कप खेल चुका हूं और जीत का अहसास अपने आप में अलग है. यह जीत देश के नाम है.’ विराट ने कहा, ‘मेरा यह पहला विश्व कप है और हम विजयी रहे. मैं इससे ज्यादा क्या मांग सकता हूं.’ तेज गेंदबाज जहीर ने कहा, ‘यह अद्भुत है. हमने सचिन के लिये यह विश्व कप जीता और इससे ज्यादा खुशी की बात क्या हो सकती है.’

वीरेंद्र सहवाग ने टीम प्रयास को जीत का श्रेय देते हुए कहा, ‘पिछले तीन मैच काफी कठिन रहे और टीम प्रयासों की बदौलत ही हमें जीत मिल सकी. सभी ने फील्डिंग, बल्लेबाजी और क्षेत्ररक्षण में अपना शत प्रतिशत योगदान दिया. सचिन तेंदुलकर ने 38 बरस की उम्र में फील्डिंग में इतनी चुस्ती दिखाई जो काबिले तारीफ है.’

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