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स्कूली दौर से था माही में ‘मिडास टच’

महेंद्र सिंह धोनी को क्रिकेट का ककहरा सिखाने वाले उनके पहले कोच केशव रंजन बनर्जी का कहना है कि माही के जिस ‘मिडास टच’ की बात आजकल की जाती है, वह दरअसल उसमें स्कूली दौर से था और उसने लगातार चार साल टीम को चैम्पियन बनाया.
स्कूली दौर से था माही में ‘मिडास टच’ महेंद्र सिंह धोनी
भाषानई दिल्ली, 06 April 2011

महेंद्र सिंह धोनी को क्रिकेट का ककहरा सिखाने वाले उनके पहले कोच केशव रंजन बनर्जी का कहना है कि माही के जिस ‘मिडास टच’ की बात आजकल की जाती है, वह दरअसल उसमें स्कूली दौर से था और उसने लगातार चार साल टीम को चैम्पियन बनाया.

धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने टी20 विश्व कप और एक दिवसीय क्रिकेट का विश्व कप जीता. इसके अलावा टीम टेस्ट रैंकिंग में नंबर वन तक पहुंची. धोनी ने इंडियन प्रीमियर लीग में चेन्नई सुपर किंग्स को चैम्पियन बनाया और उनकी टीम चैम्पियंस लीग भी जीती.

रांची के जवाहर विद्या मंदिर के खेल प्रशिक्षक बनर्जी ने कहा, ‘माही में मिडास टच बचपन से था. नौवीं से 12वीं तक उसने अपने जबर्दस्त खेल की बदौलत टीम को इंटर स्कूल चैम्पियन बनाया. बारहवीं में वह टीम का कप्तान भी था और तभी मैं समझ गया था कि एक दिन यह भारतीय टीम की कप्तानी करेगा.’

धोनी को फुटबाल से क्रिकेट खेलने के लिये प्रेरित करने वाले इस अनुभवी कोच ने कहा कि माही का आत्मविश्वास उन्हें हमेशा हैरान कर देता था.

उन्होंने कहा, ‘2000-01 में उसे भारत की अंडर 19-ए टीम में चुना गया. टीम में दो विकेटकीपर थे माही और अजय रात्रा. उस समय उसकी कलाई में फ्रेक्चर हो गया और उसे पीलिया भी हो गया था लिहाजा उसने खेलने से इनकार कर दिया.’

बनर्जी ने कहा, ‘मैंने उससे कहा कि ऐसे मौके बार बार नहीं मिलते तो उसका जवाब था कि मैं अगले तीन साल में भारतीय टीम के लिये खेलूंगा और ऐसा ही हुआ. वह इरादों का पक्का था और आज भी है.’

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