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विश्‍वकप में सट्टेबाजों के लिए माकूल मौका

अथाह पैसा लगा है क्रिकेट की सट्टेबाजी में. क्रिकेट पर दांव इतने ऊंचे हैं कि आप इसे मैच के नतीजे पर अपना साया डालने से रोक नहीं सकते. मोटी आमदनी के लिए फिक्सिंग की जाएगी.
विश्‍वकप में सट्टेबाजों के लिए माकूल मौका
टी. सुरेंदर/किरण तारे/मिहिर श्रीवास्‍तव/शुतपा पॉल 17 February 2011

अथाह पैसा लगा है क्रिकेट की सट्टेबाजी में. क्रिकेट पर दांव इतने ऊंचे हैं कि आप इसे मैच के नतीजे पर अपना साया डालने से रोक नहीं सकते. मोटी आमदनी के लिए फिक्सिंग की जाएगी. विश्व कप बहुत बड़ा मौका है.'' यह राय आयकर विभाग के एक ऐसे संयुक्त आयुक्त की है, जो आईपीएल घोटाले की जांच से जुड़े हैं. भारत क्रिकेट की विश्वव्यापी अर्थव्यवस्था का नया केंद्र है. यह क्रिकेट की बहुतबड़ी काली अर्थव्यवस्था का भी केंद्र है. मुंबई के सट्टेबाजों का कहना है कि 19 फरवरी से शुरू होने होने वाले विश्व कप-2011 के मैचों पर पहले ही 60,000 करोड़ रु. का सट्टा लग चुका है. प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों का मोटा अनुमान है कि 15,000 करोड़ रु. सट्टे पर लगा है. आरपीजी समूह की कंपनियों के अध्‍यक्ष हर्ष गोयनका का आकलन है कि 20,000 करोड़ रु. से अधिक का सट्टा लगा है. भारत में जुए के कानून के तहत घुड़दौड़ को छोड़ बाकी सारे खेलकूद में सट्टेबाजी अवैध है. इसलिए सट्टे का पूरा धंधा भूमिगत हो गया है.

इस खेल के प्रमुख प्रशासक देश के भूमिगत सट्टा सिंडिकेटों और मैच फिक्सिंग में उनकी भूमिका से वाकिफ हैं. वैसे, भ्रष्टाचार का यह इकलौता केंद्र नहीं है. पिछले हफ्ते, आइसीसी पंचाट ने तीन पाकिस्तानी क्रिकेटरों-सलमान बट्ट, मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमिर-को अगस्त, 2010 के दौरान इंग्लैंड में मैच फिक्सिंग करने का दोषी ठहराया. आईसीसी के चीफ एक्जिक्यूटिव हारून लोर्गाट का मानना है कि सट्टेबाजी को वैध बना देने से परिस्थितियां पारदर्शी हो जाएंगी और सट्टेबाजों के लिए मुश्किल हो जाएगी. उन्होंने 7 फरवरी को मीडिया से कहा, ''मैं इस राय से सहमत हूं कि अगर इसे नियमित कर दिया जाए तो यह नियमित न होने से बेहतर होगा.'' इस तरह का सुझाव देने वाले वे पहले आला क्रिकेट प्रशासक नहीं हैं. 2003 से 2006 के दौरान आईसीसी के अध्‍यक्ष रहे एहसान मनी ने पिछले साल पत्रिका द विज्‍डन क्रिकेटर को दिए इंटरव्यू में कहा, ''काले बाजारों में (खासकर भारत के, जहां सट्टा पूरी तरह अनियमित है) भ्रष्टाचार निरोधक विशेष इकाइयों की खुफिया जानकारी छिछली ही हो सकती है. लिहाजा, आईसीसी के लिए भारत सरकार को यह कहने का मौका आ गया है कि इसे नियमित कर ले. मुझे मालूम नहीं है कि इसे नियमित क्यों नहीं किया गया है क्योंकि सरकार इससे काफी पैसा कमा सकती है.''

भारत में क्रिकेट में सट्टेबाजी को पहली बार 1983 में उस समय बढ़ावा मिला जब भारत ने विश्व कप जीता. टेलीविजन और सीधे प्रसारण के साथ ही यह और भी फैलती गई. 2011 के विश्व कप में 14 टीमों के बीच कई दिनों तक मैच चलेंगे. इस वजह से काफी सट्टेबाजी हो रही है. भूमिगत कारोबार में कागज पर कोई लिखाई-पढ़ाई नहीं होती. लोग भरोसे पर काम करते हैं. और यही इस व्यवस्था को कारगर बनाए रखने के लिए जरूरी है. सट्टे में प्रायः पैसा लगाने वाले मुंबई के एक व्यापारी का कहना है, ''मेरे लेन-देन में कभी कोई गलती या गलतफहमी नहीं हुई.'' सटोरिए अपने तरीके हमेशा बदलते रहते हैं. इससे प्रवर्तन एजेंसियों का काम मुश्किल हो जाता है. सटोरियों को कभी भी नकद से भरे बक्से नहीं दिए जाते. अब निवेशक को सट्टे की रकम एक पूर्व निर्धारित बैंक खाते में जमा करने को कहा जाता है. उसके बाद सटोरिए उस खाते से पैसे निकाल लेते हैं. वह खाता किसी सटोरिए के नाम नहीं होता.

सटोरिया एजेंट से पुलिस के मुखबिर बने गुलजार उर्फ दानिश पटेल का कहना है, ''सटोरिए पैसे के जरूरतमंद आम आदमी को 10,000 रु. देकर उसके नाम खाता खुलवाते हैं. जब निवेशक उस खाते में पैसा जमा करता है तो उन्हें एसएमएस या ईमेल के जरिए जानकारी मिल जाती है. फिर वे उस पैसे को निकालकर खाता बंद कर देते हैं.'' पटेल के मुताबिक, पूरे देश में नामी-गिरामी बैंकों में इस तरह के कम-से-कम 13 लाख खाते हैं और उनमें करीब पांच लाख अकेले महाराष्ट्र में हैं. मुंबई में सटोरियों ने पटेल जैसे 2,000 एजेंट नियुक्त कर रखे हैं, जो उन्हें क्रिकेट में सट्टे के प्रति दिलचस्पी रखने वालों की जानकारी देते हैं. पटेल का कहना है, ''इस तरह के एजेंट को पोपट कहा जाता है क्योंकि वे सटोरियों का प्रचार करते हैं.''एक और बदलाव यह हुआ है कि अब क्रिकेट में सट्टेबाजी का बड़ा धंधा ऑनलाइन हो गया है. प्रवर्तन एजेंसियों का कहना है कि उन देशों की सट्टेबाजी वेबसाइटों के खिलाफ कुछ करना बहुत मुश्किल है जहां क्रिकेट में सट्टेबाजी अवैध नहीं है, भले ही उसमें भारतीय सटोरिए और उनके दलाल शामिल हों. आईपीएल घोटाले की जांच से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पूछते हैं, ''एशेज सीरीज के दौरान किसी मैच पर इंग्लैंड की वेबसाइट पर भारतीय सटोरियों को सट्टेबाजी करने से कैसे रोकेंगे?'' इंडिया बेट डॉटकॉम, क्रिकेट बेटलाइव डॉटकॉम, बेट 365 डॉटकॉम और बेटफेयर-फर्स्ट डॉटकॉम जैसी कई सट्टेबाजी वेबसाइट खूब धंधा कर रही हैं. विश्व कप जम कर माल कूटने का मौका है.

सट्टा सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि विश्व कप कौन जीतेगा या एक-एक मैच कौन जीतेगा. स्पॉट इवेंट की भविष्यवाणी पर भी काफी पैसा लगा है. मिसाल के तौर पर, क्या किसी विशेष ओवर में तीसरी गेंद वाइड करार दी जाएगी. स्पॉट इवेंट पर सट्टेबाजी से फिक्सिंग की प्रकृति बदल गई है. यह पूरे मैच को फिक्स करने से अलग है और छोटा होता है जिसकी वजह से इस पर ध्यान नहीं जाता. अगर न्यूज ऑफ द वर्ल्ड ने दिखावे को उत्सुक सटोरिए का स्टिंग ऑपरेशन नहीं किया होता तो बहुतकम लोगों को अंदेशा होता कि आसिफ और आमिर ने पैसे के बदले जान-बूझकर नो बॉल डाले थे. भ्रष्टाचार निरोधक जासूसों के लिए किसी संदिग्ध मैच के परिणाम के मुकाबले संदिग्ध नो बॉल को समझना ज्‍यादा मुश्किल है.

कोलकाता के सटोरियों का कहना है कि मैच के नतीजों और स्पॉट इवेंट पर सट्टेबाजी के बाद अब 'सेशन बेटिंग' का रुझान है. इसमें प्रत्येक ओवर में बनाए जाने वाले रनों या कुछ निश्चित ओवरों के बाद गंवाए जाने वाले विकेटों पर सट्टेबाजी होती है.सट्टेबाजी के कुल कारोबार में मुंबई के नागपाड़ा, मझगांव, डोंगरी, चेंबूर, जोगेश्वरी, बोरिवली और मीरा रोड जैसे इलाकों में काम कर रहे सटोरियों का योगदान सबसे ज्‍यादा है. माफिया सरगनाओं से भी उनके मजबूत संबंध हैं. सूत्रों के मुताबिक, मुंबई के ज्‍यादातर सट्टेबाजी सिंडिकेट भगोड़े सरगना दाऊद इब्राहिम के सहयोगी चला रहे हैं. पटेल का कहना है कि मुंबई में दाऊद का एक करीबी रिश्तेदार इन सिंडिकेटों को नियंत्रित करता है. खुफिया सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान स्थित चूटानी और नुमान, दुबई स्थित सुनील चंदानी उर्फ सुनील दुबई और देवेंद्र उर्फ जूनियर कोलकाता, जो अब मुंबई में रहता है, दाऊद के भारतीय सटोरियों को नियंत्रित करते हैं. खुफिया सूत्रों का कहना है कि सट्टेबाजी के मामले में भी दाऊद को अपने कट्टर दुश्मन छोटा राजन से टक्कर मिल रही है. राजन का भरोसेमंद संतोष मलेशिया के कुछ सट्टा कारोबार को संभालता है.

अगर सटोरियों को पहले से तय माहौल में मुनाफा होने की जगह घाटा हो जाए तो क्या होता है? खुफिया सूत्रों के मुताबिक, 2010 में इंग्लैंड के खिलाफ मैच के दौरान पाकिस्तानी गेंदबाज आसिफ के तीसरे नो बॉल से दाऊद को 50 करोड़ रु. का झटका लगा. सूत्रों का कहना है कि दाऊद के सटोरियों को आमिर और आसिफ के पहले दो फिक्स नो बॉल के बारे में मालूम था लेकिन उन्हें सटोरिए मजहर मजीद के कहने पर आसिफ की ओर से फेंकी गई तीसरी नो बॉल के बारे में बताया नहीं गया था. मैदान के बड़े खिलाड़ी इस तरह की हार के अभ्यस्त नहीं हैं.

पटेल का कहना है, ''ऐसे में कठोर दंड शुरू हो जाता है. घाटे के कारण, विशेषकर प्रतिद्वंद्वी सटोरिए, प्रायः सुपारी के शिकार हो जाते हैं.''लोर्गाट का मानना है कि विश्व कप-2011 से मोटी रकम जुड़ी है, इसके बावजूद यह भ्रष्टाचार मुक्त होगा. उन्होंने कहा, ''ज्‍यादातर खिलाड़ी ईमानदार हैं. वे उतने ही जोश के साथ इसे खेलते हैं जितने से खेला जाना चाहिए. वे किसी बेजा तरीके से फायदा उठाने की फिराक में नहीं हैं.'' हाल में तीन पाकिस्तानी खिलाड़ियों को आईसीसी की ओर से दंडित किया जाना भी चेतावनी का काम करेगा. लोर्गाट ने कहा, ''मुझे लगता है कि जो कुछ हुआ है उस पर बहुतढीठ लोग ही ध्यान नहीं देंगे.'' इंग्लैंड के कप्तान एंड्रयू स्ट्रॉस का कहना है, ''किसी भी सजा के साथ सबसे अहम बात यह है कि इससे उन लोगों को कड़ा संदेश मिलता है जो भविष्य में इस तरह के उकसावे में आ सकते हैं. अगर आपने ऐसा किया तो आपका कॅरियर भले ही पूरी तरह खत्म न हो पर काफी हद तक सीमित हो जाएगा.''

पिछले एक दशक के दौरान और उससे पहले मैदान के बाहर के खिलाड़ियों ने क्रिकेटरों का कॅरियर तबाह कर दिया. मैच फिक्सिंग में भूमिका के चलते दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान हैंसी क्रोनिए और पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन जैसे प्रमुख खिलाड़ियों पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया. लेकिन बट, आसिफ और आमिर ने उनसे कोई सबक नहीं सीखा. मुंबई में क्रिकेट की काली अर्थव्यवस्था के संचालक लंदन और दुबई में क्रिकेट के प्रशासकों के मुकाबले ज्‍यादा दक्ष साबित हुए हैं.


भलेमानुसों के खेल के दगाबाज

हैंसी कांड

दिल्ली पुलिस ने 2007 में दक्षिण अफ्रीका के कप्तान हैंसी क्रोनिए और सटोरिया संजीव चावला के बीच फोन पर बातचीत का ट्रांस्क्रिप्ट जारी किया, जिससे संकेत मिला कि 2000 में दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच एकदिवसीय मैचों की सीरीज फिक्स थी.

कार्रवाईः क्रोनिए पर आजीवन प्रतिबंध, हालांकि विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई.


प्रभाकर का वार

मनोज प्रभाकर ने आरोप लगाया कि 1994 में पाकिस्तान के खिलाफ मैच में बेहतर प्रदर्शन न करने के लिए कपिल देव ने 25 लाख रु. की पेशकश की थी. सीबीआई ने कपिल को बरी करते हुए प्रभाकर, अजय जाडेजा, अजय शर्मा, मोहम्मद अजहरुद्दीन और टीम के फीजियोथेरेपिस्ट अली ईरानी के सटोरियों से संबंध होने के लिए लपेट लिया.

कार्रवाईः बीसीसीआइ ने अजय शर्मा और अजहरुद्दीन पर आजीवन तथा जाडेजा पर पांच साल तक प्रतिबंध लगा दिया. दिल्ली हाइकोर्ट ने 2003 में जाडेजा के प्रतिबंध को खारिज कर दिया और 2006 में बीसीसीआइ ने अजहरुद्दीन पर से प्रतिबंध हटा लिया.


सलीम मलिक

1994 में जस्टिस कय्यूम कमेटी ने दो पाकिस्तानी खिलाड़ियों को मैच फिक्सिंग का दोषी पाया.

कार्रवाईः सलीम मलिक और अताउर रहमान पर आजीवन प्रतिबंध, सहयोग न करने पर वसीम अकरम को दंडित किया गया.


वॉ को चेतावनी

1995 में शेन वार्न और मार्क वॉ ने पिच की जानकारी देने के एवज में भारतीय सटोरिए 'जॉन' से पैसा लेने की बात कबूल की.

कार्रवाईः क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें दंडित किया.


लार्ड्स में स्पॉट फिक्सिंग

ब्रिटेन के एक अखबार ने 2010 में भंडाफोड़ किया कि पाकिस्तानी गेंदबाजों ने इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट में नो बॉल फेंकने के लिए पैसा लिया.

कार्रवाईः आईसीसी पंचाट ने तत्कालीन पाकिस्तानी कप्तान सलमान बट्ट पर 10 साल (पांच निलंबित), आसिफ पर सात साल (दो निलंबित), आमिर पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाया.

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