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पेनल्टी शूटआउट में इंग्लैंड को हराकर भारतीय हाकी टीम फाइनल में

रोमांच की पराकाष्ठा तक पहुंचे सेमीफाइनल मुकाबले में मंगलवार को इंग्लैंड को पेनल्टी शूट आउट में 5-4 से हराकर भारत ने पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों की पुरूष हाकी स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश कर लिया जहां उसका सामना विश्व चैम्पियन आस्ट्रेलिया से होगा.

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भाषानई दिल्ली, 12 October 2010
पेनल्टी शूटआउट में इंग्लैंड को हराकर भारतीय हाकी टीम फाइनल में

रोमांच की पराकाष्ठा तक पहुंचे सेमीफाइनल मुकाबले में मंगलवार को इंग्लैंड को पेनल्टी शूट आउट में 5-4 से हराकर भारत ने पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों की पुरूष हाकी स्पर्धा के फाइनल में प्रवेश कर लिया जहां उसका सामना विश्व चैम्पियन आस्ट्रेलिया से होगा.

खचाखच भरे स्टेडियम में दर्शकों और खिलाड़ियों में वही जोश था जो पाकिस्तान के खिलाफ आखिरी लीग मैच में देखने को मिला था. दो गोल से पिछड़ने के बाद भारत ने शानदार वापसी करते हुए मैच को अतिरिक्त समय तक खींच दिया. उसमें भी स्कोर 3-3 से बराबर रहने के बाद फैसला पेनल्टी शूट आउट पर चला गया.

इसमें भारत के लिये सरवनजीत सिंह, विक्रम पिल्लै, संदीप सिंह, अर्जुन हलप्पा और शिवेंद्र सिंह ने गोल किये. वहीं, इंग्लैंड के लिये रिचर्ड स्मिथ, रिचर्ड मेंटल, एशले जैकसन और साइमन मेंटल ने सही निशाना लगाया, जबकि ग्लेन किरखम का शाट भरत छेत्री ने बचा लिया. राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुष हाकी में अब तक पदक से अछूते भारत की जीत पर मुहर लगते ही पूरा मैदान आंदोलित हो गया.

दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहटें लंबे समय तक नहीं रुकीं. भारतीय हाकीप्रेमियों को ऐसा नजारा कम ही देखने को मिलता है. अब फाइनल में भारत 14 अक्तूबर को आस्ट्रेलिया से भिड़ेगा जिसने न्यूजीलैंड को 6-2 से हराया. इससे पहले दो गोल से पिछड़ी भारतीय टीम ने चार मिनट में दो गोल करके शानदार वापसी की.

भारत के लिये सरवनजीत सिंह (19वां और 61वां मिनट) और विक्रम पिल्लै (57वां मिनट) ने गोल किये जबकि इंग्लैंड के लिये ड्रैग फ्लिकर एशले जैकसन (35वां और 41वां मिनट) और साइमन मेंटल (45वां मिनट) ने गोल दागे. निर्धारित समय तक स्कोर 3-3 से बराबर रहने के बाद मैच अतिरिक्त समय में खींच गया. भारत को 78वें मिनट में पेनल्टी कार्नर मिला लेकिन संदीप सिंह का निशाना चूक गया.

इसके दो मिनट बाद तुषार खांडेकर ने गोल के ठीक सामने आसान सा मौका गंवाया. अगले मिनट में कप्तान राजपाल सिंह से मिले क्रास पर वह फिर सही निशाना लगाने से चूके. अतिरिक्त समय में कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी. पहले हाफ में भारतीयों ने दबदबा बनाये रखा. भारत ने शुरूआती क्षणों में आसान मौका गंवाया जब शिवेंद्र गोल के सामने गेंद को पकड़ नहीं सके. भारत के लिये पहला गोल 19वें मिनट में सरवनजीत सिंह ने किया.

पहले पेनल्टी कार्नर को वेरिएशन आजमाते हुए धनंजय महाडिक ने फ्लिक किया लेकिन इंग्लैड के गोलकीपर जेम्स फेयर ने इसे बचा लिया. कार्नर के लिये पुश देने वाले सरवनजीत ने गोलपोस्ट के पास से गेंद को भीतर डाल दिया. इसके तीन मिनट बाद इंग्लैंड ने बराबरी का बेहद आसान मौका गंवाया. राब मूरे का हिट गोलपोस्ट के पास से गुजरा लेकिन वहीं खड़े रिचर्ड मेंटल फुर्ती से गेंद को स्टिक से छूकर गोल की तरफ नहीं भेज सके.

इंग्लैंड ने हालांकि पहले ही हाफ में आखिरी मिनट में बराबरी का गोल दागकर भारत को मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने नहीं दिया. अनुभवी ड्रैग फ्लिकर जैकसन ने यह गोल किया. दूसरे हाफ में इंग्लैंड अधिक आक्रामक नजर आया और इसका फायदा उसे 41वें मिनट में पेनल्टी कार्नर के रूप में मिला जिसे जैकसन ने गोल में बदलकर इंग्लैंड को बढ़त दिला दी. बढ़त बनाने के बाद भी इंग्लैंड ने जबर्दस्त आक्रामक हाकी खेलना जारी रखा.

इंग्लैंड ने बेहतरीन वेरिएशन दिखाते हुए 45वें मिनट में मिले पेनल्टी कार्नर पर तीसरा गोल दागा. गेंद को रोककर दूसरे खिलाड़ी को सौंपा गया जिसने मेंटल को पास दिया. उसके तूफानी शाट को भारतीय गोलकीपर भरत छेत्री बचा नहीं सके. इंग्लैंड को तीन मिनट बाद एक और पेनल्टी कार्नर मिला और इस बार छेत्री ने कोई चूक नहीं की.

दूसरे हाफ में भारत को पहला पेनल्टी कार्नर 55वें मिनट में मिला लेकिन अनुभवी ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह का निशाना चूक गया. इसके दो मिनट बाद ही हालांकि संदीप ने भारत के दूसरे गोल में सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए दाहिने फ्लैंक से लंबा पास दिया जिसे विक्रम ने गोल की तरफ डिफ्लैक्ट किया.

भारत ने चार मिनट के भीतर दूसरा गोल दागकर स्टेडियम में भारी तादाद में जमा दर्शकों को आंदोलित कर दिया. इंग्लिश डिफेंस में सेंध मारते हुए भारतीय फारवर्ड खिलाड़ियों ने बेहतरीन मूव बनाया. गोलपोस्ट के सामने कप्तान राजपाल सिंह चूके लेकिन बायें पोस्ट के पास से सरवनजीत ने कोई गलती नहीं की.

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