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ग्लासगो में फिर मिलेंगे ...अलविदा दिल्ली

राष्ट्रमंडल खेलों के सफल आयोजन के बाद भारत ने गुरुवार को समापन समारोह में राष्ट्रमंडल ध्वज ग्लासगो के प्रतिनिधियों को सौंप दिया जहां 2014 में अगले खेलों का आयोजन किया जाएगा.

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भाषानई दिल्ली, 15 October 2010
ग्लासगो में फिर मिलेंगे ...अलविदा दिल्ली

राष्ट्रमंडल खेलों के सफल आयोजन के बाद भारत ने गुरुवार को समापन समारोह में राष्ट्रमंडल ध्वज ग्लासगो के प्रतिनिधियों को सौंप दिया जहां 2014 में अगले खेलों का आयोजन किया जाएगा. इसके साथ ही राष्ट्रमंडल खेल 2014 की उलटी गिनती भी शुरू हो गई.

स्काटलैंड के ग्लासगो शहर को ध्वज सौंपने के कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत से पहले राष्ट्रमंडल खेल महासंघ का ध्वज उतारा गया. इस ध्वज को दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी को सौंपा गया जिन्होंने इसे दिल्ली के उप राज्यपाल तेजिंदर खन्ना के सुपुर्द किया.

उप राज्यपाल ने यह ध्वज लार्ड प्रोवोस्ट आफ स्काटलैंड राबर्ट विंटर के हवाले किया जिन्होंने इसे लार्ड स्मिथ आफ केलविन को सौंप दिया. स्काटलैंड के कलाकारों ने इसके बाद अपने देश के जज्बे, संस्कृति और परंपरा की बानगी पेश कर समां बांध दिया.

भारत और स्काटलैंड की अगुवाई में राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने वाले सभी देशों के खिलाडियों ने अपने अपने झंडो के साथ अंग्रेजी वर्णमाला के शब्दों के हिसाब से स्टेडियम में प्रवेश किया और वालंटियरों द्वारा बनायी गयी पंक्ति से गुजरे.

दो मिनट के लिये दिल्ली खेलों के स्वर्णिम क्षणों को दिखाया गया और इसके साथ ही खेलों के शुभंकर शेरा को ‘गुडबाय’ कहा गया. भारतीय गायक शान शेरा को लेकर सजे धजे ‘आटो रिक्शा’ में स्टेडियम पहुंचे जिन्होंने भारत के नागरिकों और एथलीटों की तरफ से शेरा को ‘गुडबाय शेरा.. बड़ा याद आयेगा तू शेरा’ गाना गाकर उसे विदा किया. शान और शेरा ने वीवीआईपी बाक्स के सामने प्रस्तुति दी और इसी आटो रिक्शा में बैठकर ‘हाथ हिलाकर बाय करते हुए’ स्टेडियम से बाहर निकल गये.

समारोह को आयोजन समिति के अध्यक्ष कलमाड़ी ने संबोधित किया और उन्होंने इन खेलों को सफल बनाने के लिये वालंटियरों और दर्शकों समेत सभी का धन्यवाद किया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का उन्होंने विशेष शुक्रिया अदा किया जिस पर दर्शकों ने काफी उत्साह से तालियां बजायीं.

राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के झंडे को उतारा गया और 2014 राष्ट्रमंडल खेलों के मेजबान शहर ग्लासगो के प्रतिनिधियों को सौंप दिया गया. शीला दीक्षित और ग्लासगो के लार्ड प्रोवोस्ट रोबर्ट विंटर ने झंडे का आदान प्रदान किया. ग्लासगो ने मंच पर 10 मिनट के लिये अपने देश की सांस्कृतिक प्रस्तुति का वीडियो दिखाया और स्टेडियम की स्क्रीन पर स्काटलैंड के लोगों और उनकी संस्कृति की झलकियां दिखायी दीं.

स्काटलैंड के एक बैगपाइपर ने अपना पाइप बजाना शुरू किया और वह वीवीआईपी बाक्स के करीब पहुंच गया. फिर 352 कलाकारों ने बैगपाइपर की ओर बढ़ना शुरू किया जो पूरे स्काटलैंड की संस्कृति को दर्शाता है. ग्लासगो के इस हिस्से में विभिन्न तरह की रंगारंग आकृतियां भी बनायी गयी. इसके बाद सीजीएफ अध्यक्ष फेनेल ने दर्शकों को संबोधित कर सीजीएफ के उप संरक्षक प्रिंस एडवर्ड को आमंत्रित किया और 2010 राष्ट्रमंडल खेलों का अधिकारिक तौर पर समापन किया.

उन्होंने कहा, ‘मैं 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों को अधिकारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा करता हूं.’ फेनेल ने डेविड डिक्सन पुरस्कार के लिये जमैका की महिला एथलीट ट्रेसिया स्मिथ के नाम की घोषणा की और उन्हें पुरस्कार प्रदान किया. सात मिनट तक चले लेजर शो ने दर्शकों को उत्साहित कर समां बांध दिया.

भारत के मशहूर संगीतकारों और गायकों ने आधे घंटे तक एथलीटों और दर्शकों को अपने गानों से मंत्रमुग्ध कर दिया जिसमें डीजे नशा, सन्नी सरीद, डीजे सुकेतु और मिडवियल पुंडिज, तौफिक कुरैशी, कमल साबरी, निलाद्री कुमार, बिक्रम घोष, शिवमणि, रघु सच्चर, कैलाश खेर, जिला खान, सुखविंदर, इला अरूण, उषा उथुप, शान, श्यामक डावर, शंकर महादेवन, शुभा मुद्गल, सुनिधि चौहान और श्रीराम शामिल थे.

रंग बिरंगी आतिशबाजियों से स्टेडियम गूंज उठा और सुखविंदर ने ‘चक दे इंडिया’ गाकर सभी को रोमांचित कर दिया तो कैलाश खेर ने ‘अल्लाह के बंदे’ तथा शुभा मुदगल ने ‘अब के सावन, ऐसे बरसे’ से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर दिया.

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