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रंग लाया गीता के श्लोक पर भरोसा: नारंग के पिता

स्टार निशानेबाज गगन नारंग के राष्ट्रमंडल खेलों की 10 मीटर एयर राइफल पेयर स्पर्धा में अभिनव बिंद्रा के साथ मिलकर भारत को आज यहां स्वर्ण पदक दिलाने से देशवासियों में खुशी की लहर फैल गयी है, लेकिन सबसे ज्यादा प्रसन्नता पिता बी एस नारंग को हुई है.

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Sahitya Aajtak 2018
भाषानई दिल्‍ली, 05 October 2010
रंग लाया गीता के श्लोक पर भरोसा: नारंग के पिता

स्टार निशानेबाज गगन नारंग के राष्ट्रमंडल खेलों की 10 मीटर एयर राइफल पेयर स्पर्धा में अभिनव बिंद्रा के साथ मिलकर भारत को आज यहां स्वर्ण पदक दिलाने से देशवासियों में खुशी की लहर फैल गयी है, लेकिन सबसे ज्यादा प्रसन्नता पिता बी एस नारंग को हुई है.

नारंग के पिता का कहना है कि राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिये नहीं चुने जाने के बाद उनका बेटा काफी निराश था और यहां तक की उसने इन खेलों में भाग नहीं लेने का मन बना लिया था.

बीएस नारंग ने बताया, ‘मैं बहुत खुश हूं. मैं अपने बेटे पर गर्व महसूस करता हूं कि उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमेशा अपने देश का नाम रोशन किया है.’ हाल में जब गगन की अंतरराष्ट्रीय स्तर की सफलता को नजरअंदाज करते हुए खेल रत्न के लिये उनका नाम नहीं चुना गया तो वह काफी निराश थे और उन्होंने घोषणा कर दी थी कि वह देश में आयोजित हो रहे राष्ट्रमंडल खेलों में शिरकत नहीं करेंगे. लेकिन जब करीबी दोस्तों और परिवार ने उन्हें समझाया तो उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने की हामी भरी.

बी एस नारंग से यह पूछे जाने पर ऐसे समय में उन्होंने अपने बेटे को किस तरह प्रेरणा दी तो उनका जवाब था, ‘गीता में लिखा है कर्म करते रहो, फल की चिंता मत करो. हमने उसे इसी श्लोक से प्रेरणा दी.’
बी एस नारंग ने कहा, ‘वह काफी दुखी था और इसी निराशा के कारण वह राष्ट्रमंडल खेलों में नहीं खेलना चाहता था. हमने उसे समझाया कि उसका खेल देश के लिये है और उसे अपने प्रदर्शन पर ही ध्यान रखना चाहिए.’ दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में आज भारत को पहला स्वर्ण दिलाते हुए दस मीटर एयर राइफल पेयर्स में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज अभिनव बिंद्रा और गगन नारंग ने नया रिकार्ड भी बनाया. दोनों ने 1193 अंक बनाकर चार साल पहले मेलबर्न में बनाया अपना ही 1189 अंक का रिकार्ड तोड़ा.

नारंग के पिता ने कहा कि गगन ने इस मुकाम को हासिल करने के लिये काफी कड़ी मेहनत की है और उसे बहुत सी कठिनाईयों से गुजरना पड़ा है लेकिन खुशी इस बात की है कि वह हमेशा ही सफलता हासिल कर देश का नाम रोशन करता रहा है.

बी एस नारंग ने कहा, ‘अभी गगन के साथ रेंज में उसकी मां भी मौजूद है. मेरे पैर में चोट है इसलिये मैं वहां नहीं जा सका लेकिन हमें उम्मीद है कि गगन अभी और भी स्वर्ण पदक दिलायेगा.’ उन्होंने कहा, ‘हम पति पत्नी दोनों बाहर रहते थे क्योंकि हम दोनों काम करते हैं. कभी हमारी पोस्टिंग कहीं तो कहीं होती रहती थी. लेकिन गगन ने इन सभी परेशानियों के बावजूद यह मुकाम हासिल किया है.’

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