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व्यंग्य: सोनिया को मां की सलाह - प्रियंका लाओ राहुल बचाओ

थकाऊ मॉनसून सेशन के खूबसूरत खात्मे के बाद सोनिया गांधी रिलैक्स कर रही थीं. राहुल और प्रियंका छुट्टियां प्लान करने के लिए ममा को मनाने में लगे थे लेकिन इधर उधर की बात चलती रही. बीच बीच में झपकी आ रही थी इसलिए फाइनल फैसला टाल दिया गया.

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मृगांक शेखरनई दिल्ली, 14 August 2015
व्यंग्य: सोनिया को मां की सलाह - प्रियंका लाओ राहुल बचाओ राहुल गांधी, प्रियंका गांधी

थकाऊ मॉनसून सेशन के खूबसूरत खात्मे के बाद सोनिया गांधी रिलैक्स कर रही थीं. राहुल और प्रियंका छुट्टियां प्लान करने के लिए ममा को मनाने में लगे थे लेकिन इधर उधर की बात चलती रही. बीच बीच में झपकी आ रही थी इसलिए फाइनल फैसला टाल दिया गया. नींद बड़ी मीठी आई वैसे भी सरकार को छकाने के बाद इतना तो बनता ही है.

आंख लगे ज्यादा देर भी नहीं हुई कि कब सपने में लक्षद्वीप पहुंच गईं, पता ही नहीं चला. सपने में सोनिया की मां भी साथ थीं - और बच्चे भी.

नई पुरानी बातों के अलावा सेहत को लेकर भी मां ने हाल चाल पूछे. प्रियंका के बच्चों की भी बात चली - अब तो डैडू के साथ जिम भी जाने लगे हैं. घूम फिर कर बात राहुल पर आ टिकी . और मां शुरू हो गईं जैसे सोनिया अब भी बच्ची ही हों. खैर, मां के लिए तो ऐसा लगना लाजिमी है.

"तू इसे कब तक आंचल में छुपा कर रखना चाहती है? ये बड़ा हो गया है. अब इसे खुला छोड़ दे ."

"श्योर ममा."

"आखिर तू इस पर अपने फैसले क्यों थोपना चाहती है? इसे जीने दे अपनी जिंदगी. आखिर इसके भी तो कुछ सपने होंगे..."

"बट ममा..."

"नो इफ-बट नहीं. देख, यही तेरे मुल्क..."

"ममा, डोन्त से अबाउत माय मुल्क..."

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