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बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने डीयू लॉ कोर्स की मान्यता रद्द की

दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ ग्रेजुएट स्टूडेंट्स का भविष्य खतरे में है. लॉ एजुकेशन और करियर की सर्वोच्च रेग्‍यूलेटरी बॉडी बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने डीयू के तीन लॉ सेंटरों की मान्यात को मानने से इंकार कर दिया है.

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aajtak.in [Edited by: स्‍नेहा]नई दिल्ली, 26 September 2014
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने डीयू लॉ कोर्स की मान्यता रद्द की दिल्‍ली यूनिवर्सिटी की लॉ फैकल्‍टी

दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ ग्रेजुएट स्टूडेंट्स का भविष्य खतरे में है. लॉ एजुकेशन और करियर की सर्वोच्च रेग्‍यूलेटरी बॉडी बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने डीयू के तीन लॉ सेंटरों की मान्यात को मानने से इंकार कर दिया है. इन सेंटरों में लॉ सेंटर, लॉ सेंटर-1 और लॉ सेंटर-2 शामिल हैं.

बार काउंसिल के इस फैसले का मतलब ये है कि 2011-12 के बाद जितने भी स्‍टूडेंट्स ने इन तीनों लॉ सेंटरों से लॉ की पढ़ाई की है वे लॉ के फील्‍ड में न तो प्रैक्टिस कर सकते हैं अौर न ही वकील बनने के लिए एलिजिबल हैं. इस बात की जानकारी बीसीआई ने डीयू के कुलपति और सभी राज्‍यों के बार काउंसिल को दी है. नोटिस में बीसीआई ने कहा है कि इन सेंटरों का एफिलिएशन नहीं करवाया गया है.

बीसीआई का कहना है कि यूनिवर्सिटी को इस मामले में जल्द से जल्द कदम उठाते हुए एफिलिएशन के लिए एप्‍लीकेशन देनी चाहिए. सूत्रों के अनुसार 2010-11 के बाद बीसीआई ने यूनिवर्सिटी को नोटिस भेजा था, जिसमें कहा गया था कि इन सेंटरों के एफिलिएशन के लिए डीयू को एप्‍लीकेशन लगानी चाहिए. इसके बावजूद डीयू ने कुछ नहीं किया.

बीसीआई का यह भी कहना है कि यूनिवर्सिटी 2008 के लीगल एजुकेशन नियम का पालन भी नहीं कर रही है. नियम के अनुसार लॉ कॉलेज,  लॉ इंस्टीट्यूट और लॉ स्कूल जिसने पांच साल तक निरीक्षण नहीं करवाया था उसे बीसीआई से 31 जुलाई 2010 तक मान्यता लेनी थी. जिन कॉलेजों ने इस नियम का पालन नहीं किया उन्हें कानूनी डिग्री देने का कोई हक नहीं है.

बीसीआई के सचिव पुनीत मित्तल ने कहा कि 2011-12 के बाद यूनिवर्सिटी के इन सेंटरों के स्टूडेंट्स की डिग्री मान्य नहीं है. इस कारण से इन सेंटरों के स्टूडेंट्स प्रैक्टिस नहीं कर सकते.

वहीं, लॉ फैकल्टी के डीन अश्विनी कुमार ने कहा है कि छात्रों को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है. उन्‍होंने कहा, 'हमने बीसीआई को याद दिलाया है कि उन्होंने मान्यता देने के लिए इस वर्ष 31 दिसंबर तक का समय दिया था. यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है. डीयू में लॉ फैकल्टी 1924 से है, जबकि बीसीआई का जन्म 1960 में हुआ है. कुछ वर्ष पहले उन्होंने यह नियम बनाया है और हमसे चाहते हैं कि हम नियम का पालन करें'.

उन्होंने कहा, 'हमारे 80 से ज्यादा एल्युमिनाई विभिन्न कोर्ट के जज, जबकि चार सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं. हमारी मान्यता रद्द करने से पहले हमारे रिकॉर्ड को देखना चाहिए. हम इस मुद्दे को जल्द से जल्द हल कर लेंगे और स्टूडेंट्स को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है'.

गौरतलब है कि रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री अरुण जेटली और पूर्व मंत्री कपिल सिब्बल भी डीयू लॉ फैकल्‍टी के छात्र रहे हैं.

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