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पकौड़े वाले तेल से दौड़ेगी कार, मोदी सरकार ने कर ली है पूरी तैयारी

aajtak.in
12 August 2019
पकौड़े वाले तेल से दौड़ेगी कार, मोदी सरकार ने कर ली है पूरी तैयारी
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मोदी सरकार ने पर्यावरण से प्रदूषण कम करने के लिए अब दूसरा कदम भी बढ़ा दिया है. सरकार जहां एक ओर देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल पर फोकस कर रही है. वहीं दूसरी ओर अब बायोडीजल को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने रोडमैप तैयार कर लिया है.
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दरअसल इस्तेमाल हो चुके खाने के तेल से अब बायोडीजल बनेगा. पहले चरण में देश के 100 शहरों में इसके लिए प्लांट लगेंगे. यानी भविष्य में बायोडीजल के जरिये भी वाहनों की आवाजाही हो सकेगी. (फोटोः भारत पेट्रोलियम)

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बता दें, बायोडीजल के इस्तेमाल से जहां पर्यावरण को प्रदूषण से निजात मिलेगी. वहीं इससे चलने वाहनों को भी कई फायदे होंगे. सबसे खास बात यह है कि बायोडीजल से चलने वाले वाहनों के इंजन की आयु बढ़ जाएगी. यही नहीं, बायोडीजल का बीएस 6 वाहनों में आसानी से प्रयोग किया जा सकता है. 
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मोदी सरकार ने बायोडीजल के निर्माण को लेकर तेल कंपनियों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है. इसी कड़ी में 10 अगस्त को 'वर्ल्ड बायोफ्यूल डे' के मौके पर सरकारी पेट्रोलियम कंपनियां इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के इस प्रोजेक्ट को पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लॉन्च किया.
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अब आगे तेल कंपनियां बायोडीजल के निर्माण को लेकर प्राइवेट कंपनियों से समझौता करेंगी, जो बायोडीजल बनाने के लिए प्लांट लगाएंगी. शुरुआत में तेल कंपनियां बायोडीजल 51 रुपये प्रति लीटर लेंगी और दूसरे साल इसकी कीमत बढ़कर 52.7 रुपये लीटर होगी और तीसरे साल बढ़कर 54.5 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी.
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इस नई योजना को शुरू करते ही केंद्रीय मंत्री ने रीपर्पज यूज्ड कुकिंग ऑयल (RUCO) स्टीकर और यूज्ड कुकिंग ऑयल (UCO) के लिए मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया. इसके जरिये नजर रखी जाएगी कि इस्तेमाल हो चुका तेल दोबारा इस्तेमाल न किया जाए. इसके लिए बाकायदा होटल और रेस्टोरेंट्स में स्टीकर लगाए जाएंगे. स्टीकर लगाकर होटल-रेस्टोरेंट्स को बताना होगा कि वह बायोडीजल के लिए UCO की आपूर्ति करता है.
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धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि कुकिंग ऑयल के अलावा बायोडीजल कई रूपों में मौजूद है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में हर साल 2700 करोड़ लीटर खाने का तेल इस्तेमाल होता है, जिसमें से हर साल 140 करोड़ लीटर होटल, रेस्टोरेंट और कैंटीन से जमा किया जा सकता है, और उससे करीब 110 करोड़ लीटर बायोडीजल तैयार होगा.
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गौरतलब है कि कई इस्तेमाल हुए तेल सेहत के लिए भी खतरनाक है. खुद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बायोडीजल की मुहिम को सराहा, उन्होंने पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रयासों की तारीफ करते हुए कहा कि इस्तेमाल हो चुके तेल को दोबारा इस्तेमाल से हाइपरटेंशन, ऐथिरोस्कलेरोसिस, अल्जाइमर और लिवर से जुड़ी बीमारियां होती हैं.
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