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93 साल पुराने बैंक का होगा विलय, सीधे ग्राहकों पर पड़ेगा असर

aajtak.in [Edited by: दीपक कुमार]
08 April 2019
93 साल पुराने बैंक का होगा विलय, सीधे ग्राहकों पर पड़ेगा असर
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बीते 1 अप्रैल से बैंक ऑफ बड़ौदा में देना बैंक और विजया बैंक का विलय अस्तित्‍व में आ चुका है. इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा देश का तीसरा बड़ा बैंक बन चुका है. अब एक और बड़े बैंक लक्ष्मी विलास बैंक ने विलय की घोषणा की है. यह विलय इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस (आईबीएच) के साथ का प्रस्‍ताव है. हालांकि इस विलय विलय के लिए भारतीय रिजर्व बैंक समेत अन्य नियामकों से मंजूरी लेनी होगी. इस विलय के अस्तित्‍व में आने के बाद इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ेगा. 
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दरअसल, करीब 93 साल पुराने लक्ष्मी विलास बैंक ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस (आईबीएच) के साथ विलय की घोषणा की है. इस विलय का मकसद अधिक पूंजी और व्यापक भौगोलिक पहुंच वाला वेंचर बनाना है. इस विलय के बाद जो वेंचर अस्तित्‍व में आएगा उसके कर्मचारियों की संख्या 14,302 हो जाएगी.
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 वर्तमान में लक्ष्मी विलास बैंक के देशभर में 569 शाखाएं, 1046 एटीएम हैं. वहीं अगर इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस की बात करें तो देशभर में 220 शाखाएं हैं. विलय प्रस्‍ताव के तहत लक्ष्मी विलास बैंक के शेयरधारकों को प्रति 100 शेयर के बदले इंडियाबुल्स के 14 शेयर मिलेंगे.
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प्रस्तावित विलय के बाद बनने वाली कंपनी के पास अधिक और मजबूत खुदरा एसेट, ग्रोथ के लिए अधिक पूंजी , नए कारोबारों में कदम रखने के लिए बड़े पैमाने पर अवसर होंगे.
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इसके अलावा लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) की मार्च 2018 अंत में कुल एसेट 40,429 करोड़ रुपये थी और उसके पास 2,328 करोड़ रुपये की सेविंग फंड है. दिसंबर 2018 के अंत में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस की कुल एसेट 1,31,903 करोड़ रुपये की थी और उसकी एकीकृत शुद्ध संपत्ति 17,792 करोड़ रुपये थी. लक्ष्मी विकास बैक ने पिछले महीने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) के जरिए 460 करोड़ रुपये जुटाए. यह बैंक लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा है. 
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ग्राहकों पर भी असर
इस विलय के बाद नए ग्राहकों के लिए ब्याज दर अलग हो सकती है. इसके अलावा ग्राहकों की चेकबुक, एटीएम आदि पर बैंक का नाम बदल सकता है. वहीं विलय की प्रकिया से ग्राहकों को केवाईसी प्रकिया दोबारा करानी पड़ सकती है. विलय से ब्रांचों और एटीएम की संख्या बढ़ जाएगी. इससे ग्राहकों को दूर नहीं जाना पड़ेगा.
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बता दें कि 1926 में लक्ष्‍मी विलास बैंक वजूद में आया लेकिन इसको रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से 1958 में लाइसेंस मिला. इसके बाद लक्ष्‍मी विलास बैंक कॉमर्शियल बैंक बन गया. साल 1974 से बैंक के ब्रांच का विस्‍तार शुरू हुआ. बैंक के ब्रांच और फाइनेंशियल सेंटर आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल के अलावा दिल्‍ली, मुंबई और कोलकाता में भी मौजूद हैं.

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