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सऊदी अरब को हुआ भारतीय शक्ति का अहसास, PAK को किया नजरअंदाज!

aajtak.in [Edited By: अमित दुबे]
11 March 2019
सऊदी अरब को हुआ भारतीय शक्ति का अहसास, PAK को किया नजरअंदाज!
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एक तरफ भारत और पाकिस्तान के बीच पुलवामा हमले के बाद तनाव बरकरार है. भारत की मौजूदा शक्ति का अहसास कई देशों को हुआ है, जिसमें सऊदी अरब भी एक बड़ा देश है. पाकिस्तान को नजरअंदाज कर सऊदी अरब भारत के साथ रिश्ते को प्रगाढ़ करने में जुटा है. इसी का असर है कि महज 3 हफ्ते में दूसरी बार सऊदी अरब के तेल मंत्री भारत पहुंचे और आर्थिक राह पर साथ-साथ चलने का वादा किया.
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इसी कड़ी में भारत ने रणनीतिक तेल भंडारण सुविधा के क्षेत्र में सऊदी अरब को निवेश के लिए आमंत्रित किया है. जिसको लेकर सऊदी अरब भी इच्छुक दिख रहा है. भारत सरकार सउदी अरब के साथ मिलकर 44 अरब डॉलर यानी करीब 3.08 लाख करोड़ रुपये की लगात से एक नया तेल शोधन और पेट्रोरसायन संयंत्र स्थापित करने की परियोजना को जीवित रखने की कोशिश कर रही है. महाराष्ट्र के रत्नागिरि जिल में स्थापित की जाने ली इस परियोजना के लिए वहां की सरकार तय जगह पर जमीन का प्रबंध नहीं कर सकी है.
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महज तीन हफ्ते में दूसरी बार भारत आए सउदी अरब के तेल मंत्री खालिद अल फालीह ने पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ तेल शोधन एवं पेट्रोरसायन परिसर के बारे में चर्चा की. दरअसल, महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने शिवसेना के साथ चुनावी गठबंधन के लिए हुए समझौते के तहत सरकार ने इस परियोजना के लिए रत्नागिरि में जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना वापस ले ली है.
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पेट्रोलियम मंत्रालय ने बयान में कहा, 'दोनों मंत्रियों ने भारतीय तेल एवं गैस क्षेत्र में सऊदी अरब के निवेश के प्रस्तावों की समीक्षा की, इनमें करीब 44 अरब डॉलर की लागत से महाराष्ट्र में तैयार होने वाली संयुक्त पश्चिम तटीय परिशोधन एवं पेट्रोरसायन परियोजना भी शामिल थी.'
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हालांकि सरकार की ओर से परियोजना के लिए वैकल्पिक जगह के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई. इस परियोजना में सऊदी अरब की कंपनी अरामको और उसकी भागीदार संयुक्त अरब अमीरात की एडनॉक ने 50 फीसदी हिस्सेदारी के लिए करार पर हस्ताक्षर कर रखे हैं. शेष हिस्सेदारी भारत की सार्वजनिक कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के पास रहेगी. 
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धमेंद्र प्रधान ने मुलाकात के बाद ट्वीट में लिखा, 'सऊदी अरब के तेल मंत्री खालिद अल फलीह को भारत के रणनीतिक भंडार कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया और देश के परिशोधन एवं पेट्रोरसायन क्षेत्र में सऊदी अरब का निवेश बढ़ाने का आह्वान किया. ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक भागीदारियों से दोनों देशों को फायदा होगा और हमारे द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे.' बयान में कहा गया कि भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम में सऊदी अरब की भागीदारी के बारे में भी बातचीत की गई. (Photo: Reuters)
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इसके अलावा प्रधान ने सऊदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री के सामने ईंधन की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाया और कीमतों को कम करने में अहम भूमिका निभाने की मांग की है. हालांकि भारत की मांग के संबंध में अल-फलीह ने क्या कहा इसके बारे में नहीं बताया गया.
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गौरतलब है कि पिछले एक महीने में पेट्रोल और डीजल के दामों में कम से कम 2 रुपये लीटर की तेजी आई है. जिसके बाद पेट्रोलियम मंत्री ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी को लेकर चिंता जताई. प्रधान ने ओपेक समेत अन्य देशों के उत्पादन में कटौती के निर्णय को देखते हुए भारत को कच्चे तेल और रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
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गौरतलब है कि सऊदी अरब कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए भारत को क्षेत्रीय केंद्र बनाने पर विचार कर रहा है और भंडारण सुविधाओं के निर्माण तथा रिफाइनरी को सुदृढ़ करने में अरबों डॉलर निवेश करेगा. दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक सऊदी अरब यहां पेट्रालियम उत्पादों के वितरण और विपणन क्षेत्र में भी निवेश करेगा. (Photo: Reuters)
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सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान के प्रतिनिधिमंडल में शामिल विदेश मंत्री अदेल बिन अहमद अल-जुबेर ने पिछले महीने कहा था कि उनका देश भारत को बढ़ती आर्थिक शक्ति के रूप में देखता है और उसकी आगे की वृद्धि को लेकर आशावान है. (Photo: Reuters)
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