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अब तो कुछ करो सरकार, लोग कहने लगे- ऐसी मंदी नहीं देखी!

aajtak.in
19 August 2019
अब तो कुछ करो सरकार, लोग कहने लगे- ऐसी मंदी नहीं देखी!
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देश की अर्थव्यवस्था पर मंदी के काले बादल छा चुके हैं. सबसे ज्यादा बुरा हाल ऑटो इंडस्ट्री का है. देश में गाड़ियों की बिक्री 19 साल के निचले स्तर पर आ चुकी है. जुलाई में गाड़ियों की बिक्री में लगातार 9वें महीने में भी गिरावट दर्ज की गई. सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमाबाइल मैन्यूफैक्चरर्स यानी सियाम के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में गाड़ियों की घरेलू बिक्री 30.9 फीसदी कम हो गई है. (Photo: Getty)
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इससे पहले दिसंबर 2010 में 21.81 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी. ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े लोग मानते हैं कि उन्होंने मंदी का ये दौर सालों से नहीं देखा है. ऑटो सेक्टर में मंदी के 5 बड़े कारण जिम्मेदार हैं. पहला- उधार देने वाली कंपनियों में नकदी की कमी. दूसरा- GST और टैक्स की मार, तीसरा- BS-6 इंजन की वजह से गाड़ियों की क़ीमत में इजाफा. चौथा- ग्रामीण इलाकों के लोगों की इनकम में कमी, पांचवां- गाड़ियों के लिए सुरक्षा नियमों का कड़ा होना.
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इन्हीं कारणों की वजह से कार बनाने और बेचने वाली कंपनियों की स्थिति डांवाडोल है. अर्थव्यवस्था में नकदी संकट को खत्म करने के लिए RBI इस साल 7 महीनों के भीतर 4 बार ब्याज दरों में कटौती कर चुका है. बार-बार ब्याज दरों में कटौती इकोनॉमी में मांग बढ़ाने के लिए की जा रही है. लेकिन इसका भी कोई असर दिखता नजर नहीं आ रहा है. इस बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर कब दूर होगी ये मंदी? (Photo: Getty)
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देश में कारों की बिक्री को रफ्तार देनी है तो कारों की लागत को कम करना होगा. ऑटो इंडस्ट्री पर टैक्स का भारी भरकम बोझ है. इसी टैक्स की वजह से कारों की कीमतों में इजाफा हो जाता है. ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ACMA के मुताबिक अभी गाड़ियों के 70 फीसदी पार्ट्स पर 18 परसेंट GST लगता है. 30 फीसदी कलपुर्जों पर 28% GST लगता है. (Photo: Getty)
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कारों और बाइक्स पर भी 28% GST लगता है. इस पर 1% से 15% तक सेस भी लागू होता है. ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की GST की दर को घटाकर एक समान 18% करने की मांग है, ताकि डिमांड बढ़े और लाखों लोगों की नौकरियां बच सकें. (Photo: Getty)
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ऑटो उद्योग को मंदी से उबारने के लिए सरकार को जल्द ही बड़े एक्शन लेने की जरूरत है. अगर ऑटो सेक्टर में मंदी का दौर यूं ही जारी रहा तो देश के लाखों परिवारों पर रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा. (Photo: Getty)
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ऑटो सेक्टर से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर साढ़े 3 करोड़ लोगों का घरबार चलता है. अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान करने वाले इस सेक्टर की सेहत अगर जल्दी नहीं सुधरी तो फिर नौकरियां जाने वालों की गिनती लाखों से करोड़ों में जाने पर देर नहीं लगेगी. (Photo: Getty)
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देश के 3 करोड़ 70 लाख लोगों पर रोजी-रोटी का संकट आ चुका है. इन लोगों के घरों का चूल्हा कार या इससे जुड़ी कंपनियों से मिलने वाली तनख्वाह से चलता है. अब इन लोगों पर छंटनी की तलवार लटकी हुई है. ऑटो सेक्टर पर मंदी इस कदर हावी है कि कार कंपनियां अप्रैल से अब तक करीब साढ़े 3 लाख लोगों की छंटनी कर चुकी हैं. (Photo: Getty)
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कार और मोटरसाइकिल निर्माताओं ने 15,000 और ऑटो पार्ट्स मैन्यूफैक्चरर्स ने 1 लाख लोगों को निकाला है. जबकि बाकी नौकरियां डीलरशिप्स में से गई हैं. ऑटो सेक्टर से जुड़े लोगों का दावा है कि हरेक कंपनी पहली कटौती नौकरियों पर ही करने के लिए तैयार है. यानी राहत पैकेज की दरकार इस सेक्टर को शिद्दत से है. (Photo: File)
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इस राहत पैकेज में सबसे बड़ी मांग तो जीएसटी घटाने को लेकर है. इसके लिए वित्त मंत्री से ऑटो सेक्टर के दिग्गजों की मुलाकात भी हुई. हालांकि अभी सिर्फ सुनवाई हुई है और फैसला आना बाकी है. (Photo: Getty)
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अब भी अगर सरकार अपने वादे के मुताबिक जल्द ही ऑटो सेक्टर को संकट से नहीं उबारेगी तो छंटनियों का ये आंकड़ा तो महज एक शुरुआत भर होकर रह जाएगा. बीते दिनों एक रिपोर्ट में ऑटो सेक्टर की 10 लाख नौकरियों पर तलवार लटकने की आशंका जाहिर की गई थी. ऐसे में मोदी सरकार के लिए ऑटो सेक्टर में मंदी सबसे ज्यादा बड़ी चुनौती साबित होती नजर आ रही है. अगर दिग्गज ऑटो कंपनियों का जिक्र करें तो हालात की गंभीरता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. (Photo: File)
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देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी ने पिछले छह महीनों में अपने अस्थायी कर्मचारियों की संख्या में 6 फीसदी की कटौती की है. टाटा मोटर्स ने पिछले दो हफ्तों में अपने चार प्लांट्स को बंद कर दिया है. जबकि महिंद्रा ने कहा है कि अप्रैल और जून के बीच उसके प्लांट्स में करीब 5 से 13 दिनों तक कोई उत्पादन ही नहीं हुआ. होंडा ने 16 जुलाई से राजस्थान में अपने प्लांट में कुछ कार मॉडल का प्रॉडक्शन बंद कर दिया है. (Photo: File)
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