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सरकार ने कहा- BS6 ने ऑटो सेक्टर का बिगाड़ा खेल, मंदी नहीं जिम्मेदार

अमित दुबे
11 September 2019
सरकार ने कहा- BS6 ने ऑटो सेक्टर का बिगाड़ा खेल, मंदी नहीं जिम्मेदार
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भारत में एक अप्रैल 2020 से सिर्फ बीएस-6 मानक वाली ही गाड़ियां बिकेंगी. इस एक फैसले ने ऑटो इंडस्ट्री से लेकर आम आदमी तक को दुविधा में डाल दिया है. अब सरकार भी कह रही है कि ऑटो सेक्टर में मंदी की असली वजहों में से एक BS4 से BS6 में तब्दीली है. (Photo: Getty)
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दरअसल बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वाहन निर्माता कंपनियों को बीएस-6 मानक लागू करने 1 अप्रैल 2020 की तारीख तय कर दी. कोर्ट के इस डेडलाइन से साफ हो गया कि 1 अप्रैल 2020 से सिर्फ बीएस-6 मानक वाले वाहन ही बिकेंगे, वर्ना उसका रजिस्ट्रेशन नहीं होगा.
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फिलहाल देश में भारत स्टेज-4 मानक वाले दुपहिया और चारपहिया वाहन ही बिक रहे हैं. हालांकि बीएस-6 लागू होने के बाद भी पहले से सड़क दौड़ रहे बीएस-4 वाहनों पर किसी तरह का बैन नहीं लगाया जाएगा.
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बीएस के जरिए ही भारत सरकार गाड़ियों के इंजन से निकलने वाले धुएं से होने वाले प्रदूषण को रेगुलेट करती है. BS के साथ जो नंबर होता है उससे ये पता चलता है कि इंजन कितना प्रदूषण फैलाता है. यानी जितना बड़ा नंबर उतना कम प्रदूषण. इसी तर्ज पर BS3, BS4 और BS6 निर्धारित किया जाता है.
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क्या होते हैं BS नॉर्म्स?
गाड़ियां कितना प्रदूषण फैलाती हैं, इसको नापने के लिए भारत स्टेज नाम का स्केल बनाया गया है. भारत स्टेज एमिशन स्टैंडर्ड्स को 2000 में पेश किया गया था. ये एमिशन स्टैंडर्ड्स हैं जिसे केंद्र सरकार तय करती है.
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क्या है बीएस-6?
बीएस का मतलब है- भारत स्टेज. इसका संबंध उत्सर्जन मानकों से है. बीएस-6 वाहनों में खास फिल्टर लगेंगे, जिससे 80-90 फीसदी तक पीएम 2.5 जैसे कण रोके जा सकेंगे. नाइट्रोजन ऑक्साइड पर नियंत्रण लगेगा.

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बीएस-6 के फायदे
भारत स्टेज 6 की गाड़ियां बेहद कम प्रदूषण करती हैं और दुनिया के बेहतरीन देशों में लागू प्रदूषण के नियमों की बराबरी करती हैं. BS-6 लागू होने के बाद प्रदूषण को लेकर पेट्रोल और डीजल कारों के बीच ज्‍यादा अंतर नहीं रह जाएगा. डीजल कारों से 68 फीसदी और पेट्रोल कारों से 25 फीसदी तक नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन कम हो जाएगा. साथ ही डीजल कारों से PM का उत्सर्जन 80 फीसदी तक कम होने की संभावना है. (Photo: Getty)
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परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि बीएस-6 वाहन में हवा में प्रदूषण के कण 0.05 से घटकर 0.01 रह जाएंगे. यानी बीएस-6 वाहन और बीएस-6 पेट्रोल-डीजल होने पर प्रदूषण 75 फीसदी कम हो जाएगा.
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बीएस-4 के बारे में
बीएस-4 के मुकाबले बीएस-6 में प्रदूषण फैलाने वाले खतरनाक पदार्थ काफी कम होंगे. बीएस-4 और बीएस-3 ईंधन में सल्फर की मात्रा 50 पीएम होती है. बीएस-6 मानकों में यह घटकर 10 पीएम रह जाएगा, जिससे प्रदूषण कम होगा. बीएस-4 इंजन वाली गाड़ियां बीएस-3 इंजन के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाती हैं. 
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बीएस-6 से माइलेज बढ़ने का दावा
बीएस-6 ईंधन क्षमता बढ़ाने से कारें 4.1 लीटर में 100 किलोमीटर से अधिक माइलेज देंगी. वर्तमान में हकीकत में गाड़ियां उतना माइलेज नहीं देती हैं, जितना दावा किया जाता है. नए नियम लागू होने पर कंपनियों को इसका पालन करना होगा. बीएस-6 से वाहनों की इंजन की क्षमता बढ़ेगी, जिससे उत्सर्जन कम होगा. (Photo: Getty)
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महंगी होंगी गाड़ियां
कंपनियां अब धीरे-धीरे अपनी गाड़ियों को बीएस-4 से बीएस-6 में अपग्रेड कर रही हैं. अपग्रेडशन से गाड़ियों की लागत बढ़ जाएंगी. पेट्रोल गाड़ियों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है, वहीं डीजल गाड़ियों की कीमतें ढाई लाख रुपये तक बढ़ सकती हैं. बीएस-6 वाहन में नया इंजन और इलेक्ट्रिकल वायरिंग बदलने से वाहनों की कीमत में 15 फीसदी का इजाफा हो सकता है.
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