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लाल बही-खाता पर सीतारमण ने दिया ऐसा जवाब, सुनकर लोग हंसने लगे!

इंडिया टुडे के खास कार्यक्रम बजट राउंडटेबल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विस्तार से बताया कि उन्होंने ब्रीफकेस वाली परंपरा क्यों तोड़ दीं.

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aajtak.in
अमित कुमार दुबे नई दिल्ली, 09 July 2019
लाल बही-खाता पर सीतारमण ने दिया ऐसा जवाब, सुनकर लोग हंसने लगे! लाल बही-खास को लेकर निर्मला सीतारमण ने दिया जवाब

हर बार बजट पेश करने के लिए देश के वित्त मंत्री ब्रीफकेस के साथ नजर आते थे, लेकिन इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस परंपरा को तोड़ दिया. वित्त मंत्री जब मंत्रालय पहुंचीं तो उन्होंने सबको चौंका दिया, क्योंकि उनके हाथ में रेड ब्रीफकेस की जगह एक मखमली लाल कपड़ा था, जिसमें बजट की कॉपी बंद थी. लाल कपड़े में भारत का राष्ट्र चिन्ह बना हुआ था और इसे लाल-पीले रिबन से बांधा गया था.

अब इंडिया टुडे के खास कार्यक्रम बजट राउंडटेबल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विस्तार से बताया कि उन्होंने ब्रीफकेस वाली परंपरा क्यों तोड़ी. उन्होंने कहा कि ब्रीफेक्स में बजट की कॉपियां लेकर अरसे से वित्त मंत्री संसद पहुंच रहे थे. लेकिन भारतीय परंपरा का ब्रीफेक्स से कोई गहरा नाता नहीं है, इसलिए इस बार पारंपारिक लाल कपड़े में लपेटकर वो बजट की कॉपियां लेकर संसद पहुंचीं. उन्होंने कहा कि बही-खाता और भारतीय परंपरा एक-दूसरे से बेहद नजदीक है.

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हालांकि वित्त मंत्री ने कहा कि उन्हें बही-खाता का उच्चारण करने में कठिनाई होती है. क्योंकि यह शुद्ध हिन्दी के शब्द हैं. उन्होंने कहा, मैं आज भी बही-खाता का सही से उच्चारण नहीं कर पा रही हूं, और ना ही इसका सही अर्थ पता है.' कार्यक्रम के दौरान भी निर्मला सीतारमण बही-खाता का उच्चारण करने में अटक गईं, जिसके बाद वो खुद हंस पड़ीं और कार्यक्रम में मौजूद लोग भी हंसने लगे.

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे हैं चमड़े के ब्रीफकेस को हमने इसलिए बदल दिया कि उससे मुझे नकारात्मक संकेत मिल रहा था. बही-खाता से स्थिरता का संदेश जाता है.

देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री ने कहा, 'मैं अंग्रेजों की इस परंपरा से बाहर निकलना चाहती थी. मुझे लगा कि बजट एक पवित्र दस्तावेज है और हम अपनी पुस्तकों को वर्ष की शुरुआत में देवताओं के सामने कैसे रखते हैं, यह बजट के साथ भी होना चाहिए. इसलिए ब्रीफेक्स वाली परंपरा को पीछे छोड़ दिया.'

गौरतलब है कि 1860 में ब्रिटेन के 'चांसलर ऑफ दी एक्‍सचेकर चीफ' विलियम एवर्ट ग्‍लैडस्‍टन फाइनेंशियल पेपर्स के बंडल को लेदर बैग में लेकर आए थे. तभी से यह परंपरा निकल पड़ी थी. ब्रिटेन के वित्त मंत्री अपने साथ लाल रंग के लेदर सूटकेस का इस्तेमाल करते हैं. आजादी के भारत में ब्रीफेक्स का आकार और रंग कई बार बदला. लेकिन पहली बार ब्रीफकेस की जगह बही-खास लेकर निर्मला सीतारमण संसद पहुंचीं.

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