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बजट 2015: अच्छे दिन आएंगे, टैक्स घटेंगे!

अब आपके अच्छे दिन आने वाले हैं. वित्त मंत्रालय डायरेक्ट टैक्सों के ढांचे को दुरुस्त करने जा रहा है. इसका मतलब हुआ कि इनकम टैक्स में न केवल कटौती होगी बल्कि कुछ अन्य फायदे भी होंगे.

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aajtak.in [Edited By: मधुरेन्द्र सिन्हा]नई दिल्ली, 20 February 2015
बजट 2015: अच्छे दिन आएंगे, टैक्स घटेंगे! बजट 2015

अब आपके अच्छे दिन आने वाले हैं. वित्त मंत्रालय डायरेक्ट टैक्सों के ढांचे को दुरुस्त करने जा रहा है. इसका मतलब हुआ कि इनकम टैक्स में न केवल कटौती होगी बल्कि कुछ अन्य फायदे भी होंगे. इसकी वजह यह है कि सरकार चाहती है कि जनता के पास पैसे रहें और वह खर्च कर सकें तथा निवेशकों को भी यहां का माहौल पसंद आए.

एक अंग्रेजी अखबार ने खबर दी है कि सरकार देश में निवेश बढ़ाना चाहती है और अनावश्यक बाधाओं को हटाना चाहती है. इसके लिए वह टैक्स स्लैब में बदलाव करने का विचार कर रही है और बचत करने वालों को इंसेंटिव देने जा रही है. इससे देश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा.

काफी समय से एक्सपर्ट और अब रिजर्व बैंक यह मांग करता आ रहा था कि लोगों को और बचत करने के लिए प्रेरित किया जाए. इस बार सरकार ऐसे कदम उठाने जा रही है जिससे लोगों को बचत करने में काफी फायदा होगा. देश में बचत करने की आदत घटती जा रही है जिससे सरकार को अपनी योजनाओं के लिए धन जुटाने में दिक्कत आ रही है.

पिछले साल बजट में सरकार ने इनकम टैक्स में छूट की सीमा में 50,000 रुपये की बढो़तरी की थी. लेकिन टैकस स्लाब को ज्यों का त्यों छोड़ दिया गया था. अब सरकार टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी का इरादा रखती है.

सरकार इनकम टैक्स के प्रावधान 80C में भी बढ़ोतरी कर सकती है. अभी इसके तहत डेढ़ लाख रुपये तक के निवेश की अनुमति है लेकिन इसे बढ़ाकर दो लाख रुपये करने की बात हो रही है. इसके अलावा भी सरकार कुछ और तरीके से छूट देने पर विचार कर रही है ताकि लोग पहले से ज्यादा खर्च करें और देश में निवेश को बढ़ावा मिले.

सरकार इस बात से भी परेशान है कि भारत के टैक्स कानूनों को बहुत जटिल माना जा रहा है. वह उसमें बदलाव करना चाहती है ताकि विदेशी निवेशक इस ओर ध्यान दें. वर्तमान प्रावधानों में बदलाव की बहुत संभावना है और मोदी सरकार उस ओर पूरा ध्यान दे रही है. वह चाहती है कि एक पारदर्शी टैक्स प्रणाली पुरानी टैक्स व्यवस्था की जगह ले ताकि निवेशकों को परेशानी न हो और जनता भी खर्च कर सके. टैक्स ढांचे में सुधार की मांग तमाम व्यापारिक संगठन अर्से से करते आ रहे हैं.

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