एडवांस्ड सर्च

सस्ता-महंगा के अलावा बजट-2015 के ये हैं 8 अहम बिंदु

वित्त मंत्री अरुण जेटली 20 दिन बाद संसद में खड़े होंगे. बजट दस्तावेज लेकर. जिम्मेदारी है दो साल के भीतर एशिया की इस तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी को 7-8 प्रतिशत की ग्रोथ तक पहुंचाने की.

Advertisement
धीरेंद्र राय 12 February 2015
सस्ता-महंगा के अलावा बजट-2015 के ये हैं 8 अहम बिंदु जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली फिलहाल तो दिल्ली चुनाव में व्यस्त हैं. लेकिन 20 दिन बाद वे संसद में खड़े होंगे. बजट दस्तावेज लेकर. जिम्मेदारी है दो साल के भीतर एशिया की इस तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी को 7-8 प्रतिशत की ग्रोथ तक पहुंचाने की. लेकिन आम लोगों और कारोबारियों की नजर बजट के इन 8 हिस्सों पर होगी-

1. सब्सीडी?
यूपीए सरकार ने पेट्रोल और एनडीए सरकार ने डीजल को बाजार भरोसे छोड़ दिया है. यानी अब सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने की भरपाई अपने खजाने से नहीं करेगी. सिवाय एलपीजी के. इस बारे में कोई भी फैसला लोगों को तकलीफ पहुंचाने वाला ही होगा. क्योंकि फिलहाल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दाम कम हैं, लेकिन जब ये बढ़ेंगे तो असर सीधे आम लोगों पर पड़ेगा. हालांकि, अर्थशास्त्री ईंधन ही नहीं, खाने और फर्टिलाइजर से भी सब्सीडी कम करने की वकालत कर रहे हैं. ताकि बजट घाटा कम किया जा सके.

2. बजट घाटा?
सरकार के खर्चे ज्यादा और आमदनी कम का मतलब है बजट घाटा. जो पिछली सरकार के दौर में बढ़ता ही गया. जेटली पर जिम्मेदारी है इसे कम करने की. वे लक्ष्य लेकर चल रहे हैं बजट घाटा कम करते हुए 2015-16 में जीडीपी का 3.6 प्रतिशत और 2016-17 में 3 प्रतिशत तक ले आने का.

3. वेलफेयर रिफॉर्म्स?
बजट में उम्मीद है कि जेटली मनरेगा जैसी दुनिया की सबसे बड़ी वेलफेयर स्कीम को और बेहतर बनाने के सुझाव देंगे. अकेली इसी योजना से 5 करोड़ घरों तक पैसा पहुंच रहा है. इसी योजना की वजह से सूखे के दौरान ग्रामीणों द्वारा खेत बेचने के मामलों में कमी आई है. लेकिन इस योजना पर खर्च होने वाला पैसा टैक्सपेयर्स का है. योजना में भयंकर भ्रष्टाचार व्याप्त है.

4. इन्फ्रास्ट्रक्चर?
वित्त मंत्रालय मानता है कि यदि भारत को 7 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज करनी है तो उसे 800 बिलियन का निवेश चाहिए होगा. उद्योगपति उम्मीद कर रहे हैं कि जेटली अब बजट घाटे को कम करते हुए उद्योगों की तरफ ध्यान देंगे. लेकिन जेटली संभवत: ज्यादा फोकस इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर देंगे. उम्मीद है कि वे मार्च 2016 तक रोड, रेल, बंदरगाह और सिंचाई व्यवस्थाओं पर खर्च के लिए 50 बिलियन डॉलर से ज्यादा का मद रखें.

5. मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर?
इस बजट का सबसे अहम हिस्सा होगा यह. क्योंकि यही मोदी के मेक इन इंडिया प्रोग्राम का हिस्सा है. संभव है कि कई सेक्टर को टैक्स में छूट और इंसेंटिव दिया जाए. इसी के जरिए देश में नौकरी के अवसर बढ़ाने का रास्ता खुलेगा. और धीमी अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी.

6. गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स?
जेटली ने वादा किया है कि वे 1 अप्रैल 2016 से देशभर में जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स लागू कर देंगे. दिसंबर में उन्होंने संसद में एक बिल भी पेश किया था, जिसमें उन्होंने राज्य और केंद्र के अप्रत्यक्ष करों को इस तरह से बनाने को कहा था, जिसे देशभर में एक समान और तार्किक सेल्स टैक्स कहा जा सके. हालांकि, जीएसटी का लागू होना इसी बात पर निर्भर करेगा, कि जेटली राज्यों को होने वाले रेवेन्यू लॉस की भरपाई के कितने इंतजाम करते हैं. इस बजट में उस भरपाई के भी एलान की उम्मीद है.

7. जनरल एंटी-अवॉइडेंस रूल्स (गार) ?
निवेशकों को गार रूल्स के लागू होने का इंतजार है, क्योंकि ये उन कंपनियों और निवेशकों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं जो मॉरीशस जैसे टैक्स हैवेन देशों से पैसा देश में भेजते हैं. इन रूल्स को 2014 से ही लागू होना था, लेकिन निवेशकों में घबराहट न फैल जाए, इसलिए इसे 2016 तक टाल दिया गया.

8. बैंकिंग रिफॉर्म्स?
संभव है कि जेटली इस बजट में खस्ताहाल पब्लिक सेक्टर बैंकों को लेकर कुछ घोषणाएं करें. खासतौर पर उनके डिफाल्ट लोन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर. पिछले महीने एक बैठक में सरकारी बैंकों के आला अफसरों ने सरकार को सुझाव दिया था कि वे सभी बैंकों की एक होल्डिंग कंपनी बना दे और उसमें सरकार की हिस्सेदारी को 51 फीसदी से भी कम कर दिया जाए.

2015-16 के आम बजट को मोदी सरकार के लिए आर-पार वाला माना जा रहा है. मोदी ने माहौल तो बना दिया है, लेकिन नौ महीने बाद सेंसेक्स 5 फीसदी ही ऊपर है.

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay