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मोइली की वित्त मंत्री से मांग, ईंधन कीमत पर विशेषज्ञ समिति का हो गठन

वित्त मंत्रालय द्वारा पेट्रोल और डीजल कीमतों में बदलाव के जरिये सब्सिडी में भारी कटौती के कदम पर पेट्रोलियम मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने चिंता जताई है. मोइली को आशंका है कि इससे पेट्रोलियम कंपनियों पर काफी गहरा प्रभाव पड़ेगा.

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आज तक वेब ब्यूरो/भाषानई दिल्ली, 27 February 2013
मोइली की वित्त मंत्री से मांग, ईंधन कीमत पर विशेषज्ञ समिति का हो गठन वीरप्पा मोइली

वित्त मंत्रालय द्वारा पेट्रोल और डीजल कीमतों में बदलाव के जरिये सब्सिडी में भारी कटौती के कदम पर पेट्रोलियम मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने चिंता जताई है. मोइली को आशंका है कि इससे पेट्रोलियम कंपनियों पर काफी गहरा प्रभाव पड़ेगा.

मोइली ने वित्त मंत्री पी चिदंबरम से यह मामला एक विशेषज्ञ समिति को भेजने का आग्रह किया है. वित्त मंत्रालय ने पेट्रोलियम मंत्रालय को सूचित किया है कि ईंधन कीमतों का दाम इस प्रकार तय किया जाना चाहिए कि उसका निर्यात किया जा सके.

अभी पेट्रोल और डीजल का दाम रिफाइनरी पर 2.5 प्रतिशत का सीमा शुल्क तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन भेजने के परिवहन शुल्क को जोड़कर तय किया जाता है.

वित्त मंत्रालय परिवहन तथा ढाई प्रतिशत का सीमा शुल्क समाप्त करना चाहता है. इसकी वजह यह है कि इससे पेट्रोलियम कंपनियों का नुकसान बढ़ रहा है और साथ ही सरकार को भी कोई बहुत ज्यादा राजस्व नहीं मिल पा रहा है.

रिफाइनरी के मुहाने पर दाम और खुदरा दाम में अंतर पेट्रोलियम कंपनियों की अंडर रिकवरी यानी लागत से कम मूल्य पर ईंधन बिक्री से होने वाला नुकसान होता है. सरकार इस नुकसान की भरपाई बजट से करती है.

वित्त मंत्रालय का मानना है कि परिवहन तथा सीमा शुल्क को समाप्त किए जाने से उसका सब्सिडी पर खर्च कम होगा. पेट्रोलियम मंत्रालय का हालांकि मानना है कि पेट्रोलियम कंपनियों को वास्तव में आयात शुल्क के अलावा कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल बनाने के लिए कच्चे माल का मालभाड़ा देना पड़ता है.

उनको इससे वंचित किए जाने से उनके वित्त पर गंभीर असर पड़ेगा. मोइली ने इसी सप्ताह चिदंबरम को पत्र लिखकर इस मसले पर एक विशेषज्ञ समिति के गठन का आग्रह किया है.

पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि सी रंगराजन और विजय केलकर की अगुवाई वाली विशेषज्ञ समिति ने जो मौजूदा कीमत तय करने का तौर तरीका बताया है या फिर वित्त मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित नए कीमत मॉडल से पेट्रोलियम कंपनियों को भारी नुकसान होगा.

वित्त मंत्रालय का कहना है कि मौजूदा कीमतें संरक्षणवादी हैं और इससे प्रणाली में अक्षमता पनपती है. वित्त मंत्रालय के इस तर्क कि पूर्वोत्तर की रिफाइनरियों का प्रदर्शन पानीपत में स्थित रिफाइनरी से बेहतर रहता है, पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि पूर्वोत्तर की रिफाइनरियों को उत्पाद शुल्क में छूट मिलती है, जिससे वे ज्यादा मुनाफा कमाती हैं.

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