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आखिर क्यों सीनियर बादल के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं कैप्टन?

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आखिर क्यों मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं? अचानक क्यों कांग्रेस ने पंजाब में अपनी रणनीति बदली है?

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मनजीत सहगल [Edited By: खुशदीप सहगल]चंडीगढ़, 16 January 2017
आखिर क्यों सीनियर बादल के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं कैप्टन? कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रकाश सिंह बादल

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आखिर क्यों मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ना चाहते हैं? अचानक क्यों कांग्रेस ने पंजाब में अपनी रणनीति बदली है?

यहां आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के आरोपों का जिक्र करना दिलचस्प होगा. केजरीवाल ये रट लगाते रहे हैं कि कांग्रेस और अकाली दल के बीच रणनीतिक समझदारी है और अतीत में भी दोनों एक दूसरे की मदद करते रहे हैं. केजरीवाल ने अपने ताजा ट्वीट में ये आरोप लगाया है कि कैप्टन को चुनाव अभियान का खर्च बिक्रमजीत सिंह मजीठिया से मिल रहा है, जो कैप्टन के रिश्तेदार भी हैं. केजरीवाल ने ये आरोप भी लगाया कि कैप्टन ने तीन साल पहले मजीठिया को सीबीआई जांच से बचाया था.

केजरीवाल ने ट्वीट में कैप्टन से पूछा है- 'सर, बादलों ने कुछ महीने पहले आपके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले बंद कर दिए थे. क्यों? पंजाब जानना चाहता है कि क्या डील हुई थी.' केजरीवाल ने ये दावा भी किया है कि अकाली दल और कांग्रेस एक दूसरे को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केजरीवाल के आरोपों को खारिज किया है. लेकिन माना जा रहा है कि केजरीवाल के आरोपों की वजह से ही कैप्टन ने प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया. दरअसल, आम आदमी पार्टी के आरोपों की कांग्रेस हवा निकालना चाहती है, इसीलिए कैप्टन को बादल के खिलाफ खड़ा करने का फैसला किया.

बादल के खिलाफ खड़ा होने से कैप्टन की उम्मीदवारी को बल मिलेगा. ये पहली बार है जब प्रकाश सिंह बादल को अमरिंदर की ओर से उन्हीं के गढ़ में चुनौती दी जा रही है. इस फैसले से आम आदमी पार्टी के आरोपों की जहां मजबूत काट हो सकेगी वहीं अमरिंदर पहले से भी ज्यादा मजबूत कांग्रेस नेता के तौर पर उभरेंगे. हालांकि ये पहली बार नहीं है कि कैप्टन किसी दिग्गज नेता के खिलाफ मैदान में उतरे हैं. 2014 लोकसभा चुनाव में कैप्टन ने अमृतसर सीट से बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को 1.65 लाख वोटों से मात दी थी.

कैप्टन लंबी विधानसभा सीट से प्रकाश सिंह बादल को चुनौती देने जा रहे हैं जो सीनियर बादल की पारंपरिक सीट रही है. कैप्टन ने रविवार को कहा, मैं बुजुर्ग व्यक्ति (प्रकाश सिंह बादल) को बताऊंगा कि राजनीति क्या होती है. मैं एक योद्धा हूं और हारना पसंद नहीं करता. मैं लंबी और पटियाला से चुनाव लड़ूंगा.

बादल सिर्फ अकेले राजनेता नहीं हैं जिन्हें कैप्टन ने चुनौती दी है. कैप्टन ने AAP के प्रमुख अरविंद केजरीवाल को भी चुनाव में सीधे दो-दो हाथ करने का न्योता दिया था लेकिन कैप्टन फिर खुद ही पीछे हट गए. केजरीवाल ने ट्वीट-युद्ध में कैप्टन को कायर तक करार दे डाला. केजरीवाल ने कहा कि अगर कैप्टन दो जगह से चुनाव लड़ते हैं तो ये कायराना कदम होगा. केजरीवाल ने कहा कि कैप्टन को सिर्फ लंबी सीट से लड़ना चाहिए, ना कि पटियाला जैसी सुरक्षित सीट से.

केजरीवाल ने अमरिंदर पर निशाना साधते हुए एक और ट्वीट किया- 'सर, क्या आप दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं या सिर्फ लंबी सीट से. लोग आपको कायर कहेंगे अगर आपने दोनों सीटों से चुनाव लड़ने का फैसला किया.'

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस पंजाब में अपनी रणनीति बदलते हुए दिग्गजों के खिलाफ दिग्गज उम्मीदवार का दांव खेलना चाहती है. पार्टी ने पहले जलालाबाद में सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ नवजोत सिंह सिद्धू और लांबी में प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ रवनीत सिंह बिट्टू को उतारने का मन बनाया था लेकिन सिद्धू ने जलालाबाद से लड़ने से इनकार कर दिया. ऐसे में अब बिट्टू को जलालाबाद में सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ उतारा जा सकता है.

लांबी में प्रकाश सिंह बादल को त्रिकोणीय मुकाबले का सामना करना पड़ेगा. कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह के अलावा इस सीट पर आम आदमी पार्टी के जरनैल सिंह भी ताल ठोक रहे हैं. कैप्टन को कांग्रेस यहां से एक-दो दिन में उम्मीदवार घोषित कर सकती है. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ही सत्ता विरोधी वोटों को अपनी ओर खींचने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही हैं. संघर्ष तीखा होगा, ऐसे में ये संभावना है कि सत्ता विरोधी वोट कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में बंट जाएं और इसका फायदा सीनियर बादल को मिले जो 1997 से लेकर 2012 तक लगातार चार चुनाव जीत चुके हैं. 2012 में प्रकाश सिंह बादल को 55.71 फीसदी वोट मिले थे. जबकि उनके खिलाफ उतरे कांग्रेस उम्मीदवार को 35.44 फीसदी वोट ही मिल सके थे.

लांबी को बादल का गढ़ माना जाता रहा है. ये वो विधानसभा क्षेत्र हैं जिसे पंजाब में सबसे ज्यादा तरजीह दी जाती रही है. बादल पिता-पुत्र को अपने अपने निर्वाचन क्षेत्रों पर फंड की बरसात करने के साथ अन्य फायदे देने के लिए भी जाना जाता है. दूसरे शब्दों में कहें तो अकाली दल के गढ़ से चुनाव जीतना विरोधी दलों के लिए आसान नहीं होगा. लांबी में सीनियर बादल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी, दोनों को ही कड़ी चुनौती देंगे.

प्रकाश सिंह बादल ने कैप्टन अमरिंदर के अपने खिलाफ चुनाव लड़ने के फैसले पर कहा कि ये राहुल गांधी की कैप्टन से छुटकारा पाने की चाल है क्योंकि वो कैप्टन को पसंद नहीं करते हैं. अकाली दल का मानना है कि अमरिंदर सिंह और अरविंद केजरीवाल सिर्फ गीदड़-भभकियां देने की कोशिश करेंगे और पार्टी इनका अच्छी तरह जवाब देना जानती है.

बादल ने कहा, 'कैप्टन अमरिंदर सिंह का दोनों बाहों के साथ स्वागत है और मैं उनकी मौजूदगी का आनंद लूंगा. लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि वो अपनी सुरक्षा में बिना कोई बदलाव वापस जा सकेंगे.' उधर, उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को भी त्रिकोणीय संघर्ष का सामना करना पड़ेगा. उनके खिलाफ आम आदमी पार्टी ने संगरूर से अपने सांसद भगवंत मान को उतारा है. कांग्रेस भी जल्दी ही सुखबीर सिंह बादल और बिक्रमजीत सिंह मजीठिया के खिलाफ मजबूत उम्मीदवारों को उतार सकती है.

 

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