एडवांस्ड सर्च

वित्त मंत्री के खजाने से क्‍या चाहता है रियल एस्‍टेट क्षेत्र

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की हर हरकत पर इस वक्त देश की नजर है. क्या आम और क्या खास सब प्रणव मुखर्जी से उम्मीद लगाए बैठे हैं. अब इंतजार है 26 तारीख का जब एक बार फिर प्रणब दा अपना ब्रीफकेस खोलेंगे. उनके खजाने से किसको क्या उम्मीदें हैं?

Advertisement
ऋचा रावतनई दिल्ली, 20 February 2010
वित्त मंत्री के खजाने से क्‍या चाहता है रियल एस्‍टेट क्षेत्र

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की हर हरकत पर इस वक्त देश की नजर है. क्या आम और क्या खास सब प्रणव मुखर्जी से उम्मीद लगाए बैठे हैं. अब इंतजार है 26 तारीख का जब एक बार फिर प्रणब दा अपना ब्रीफकेस खोलेंगे. उनके खजाने से किसको क्या उम्मीदें हैं?

बात रियल एस्टेट सेक्टर की. हर आम का सपना होता है की उसका भी एक घर हो. प्रणब से जितनी उम्मीद घर खरीदने वाले कर कर रहे हैं उससे कहीं ज्यादा उम्मीद डेवलपर्स लगाए हुए हैं. सरकार भी मान रही है की देश में ढाई करोड़ घरों की कमी है. ऐसे में वित्त मंत्रीजी से क्या उम्मीद लगाई जाए ?

पिछले बजट में तो रियल इस्टेट सेक्टर के हाथ कुछ लगा नहीं. ऊपर से मंदी के चलते महंगे घरों का सपना बेच रहे डेवलपर्स को भी अफॉर्डेबल हाउसिंग का रास्ता अपनाना पड़ा लेकिन फिर भी खरीदार नहीं माने. इस बजट में रियल इस्टेट सेक्टर की सरकार से कई मांगे हैं जिससे रुठे हुए खरीदारों को भी मनाया जा सके और अपने लिए भी रास्ता आसान हो.

रियल इस्टेट की मांग है कि इस बजट में

-होम लोन्स पर ब्याज के रूप में दी जाने वाली छूट को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख किया जाये.

-होम लोन की प्रिंसिपल रिपेमेंट की छूट 1 लाख रुपये से 2 लाख रुपये की जाये.

-अफॉर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिए सेक्शन 80 आई बी (10) के अंतर्गत टैक्स हॉलिडे
-रिहाइशी संपत्ति के किराये से होने वाली आय पर 30 फीसदी की बजाय 10 फीसदी टैक्स हो.

-इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा लोग घर ले सके इसके लिए ब्याज दरें कम रखी जाए

गौरतलब है कि फिलहाल देश में करीब ढाई करोड़ घरों की ज़रूरत है और इस अंतर को कम करने में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप कारगर साबित भी हो सकती है बशर्ते रियल इस्टेट सेक्टर को ज़रूरी सुविधायें मुहैया कराई जायें और उनको इस्तेमाल सही तरह से किया जाये.

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay