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बजट में उत्पाद शुल्क, सेवा कर ना बढ़े: उद्योग जगत

आगामी बजट में प्रोत्साहन पैकेज की वापसी की संभावना से चिंतित भारतीय उद्योग ने वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से अपील की कि जब तक आर्थिक वृद्धि दर संकट पूर्व के 9 फीसदी के स्तर पर नहीं पहुंचे उत्पाद शुल्क या सेवा कर न बढ़ाए जाएं.

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भाषानई दिल्ली, 19 February 2010
बजट में उत्पाद शुल्क, सेवा कर ना बढ़े: उद्योग जगत

आगामी बजट में प्रोत्साहन पैकेज की वापसी की संभावना से चिंतित भारतीय उद्योग ने वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से अपील की कि जब तक आर्थिक वृद्धि दर संकट पूर्व के 9 फीसदी के स्तर पर नहीं पहुंचे उत्पाद शुल्क या सेवा कर न बढ़ाए जाएं.

फिक्की के अध्यक्ष हषर्पति सिंघानिया ने कहा ‘हमें आशंका है कि प्रोत्साहन पैकेज यदि आंशिक रूप से भी वापस लिया गया तो इससे वृद्धि की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और औद्योगिक क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.’ उन्होंने कहा कि प्रोत्साहन पैकेज और एक साल या कम से कम 31 अक्‍टूबर तक जारी रखना चाहिए. अर्थव्यवस्था अभी भी संकट पूर्व के 9 फीसदी सालाना की आर्थिक वृद्धि के स्तर पर नहीं पहुंची है.

माना जा रहा है कि वित्त मंत्री वैश्विक संकट के असर से निपटने के लिए उद्योग को दिए गए प्रोत्साहन पैकेज वापस लेने पर विचार कर रहे हैं. बजट 26 फरवरी को पेश होना है. प्रोत्साहन के तौर पर सरकार ने दो चरण में उत्पाद शुल्क घटाकर 14 फीसदी से आठ फीसद कर दिया जबकि सेवा कर 12 फीसदी से घटाकर 10 फीसद कर दिया गया था.

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने भी प्रोत्साहन के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में पीटीआई से कहा ‘हम 1929 के बाद के सबसे बुरे वित्तीय संकट के दौर से गुजरे हैं और स्पष्ट है कि सुधार धीमा होगा जिसमें मंदी के दौर में वापसी का जोखिम है.’

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