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'बजट' से जुड़ी महत्‍वपूर्ण शब्‍दावलियां

आम तौर पर हमारे देश के लोग 'बजट' से काफी अपेक्षाएं रखते हैं. बजट को लेकर लोगों के मन में जिज्ञासा होती है. पेश हैं बजट से जुड़ी कुछ महत्‍वपूर्ण शब्‍दावलियां और उनके सामान्‍य अर्थ.
'बजट' से जुड़ी महत्‍वपूर्ण शब्‍दावलियां
आज तक ब्‍यूरोनई दिल्‍ली, 19 February 2010

आम तौर पर हमारे देश के लोग 'बजट' से काफी अपेक्षाएं रखते हैं. बजट को लेकर लोगों के मन में जिज्ञासा होती है. पेश हैं बजट से जुड़ी कुछ महत्‍वपूर्ण शब्‍दावलियां और उनके सामान्‍य अर्थ.

क्‍या है 'बजट'
किसी संस्‍था या सरकार द्वारा सालभर में किए जाने वाले व्‍यय और होने वाली आय के लेखा-जोखा को ही 'बजट' कहते हैं. 'बजट' लैटिन शब्‍द 'बोजते' से बना है, जिसका अर्थ होता है, 'चमड़े का थैला'. मध्‍यकाल में पश्चिमी देशों के व्‍यापारी रुपए-पैसे रखने के लिए चमड़े के थैले का प्रयोग करते थे. बाद में आय-व्‍यय का ब्‍योरा 'बजट' भी सदन में पेश करने के लिए बैग में ही रखकर लाया जाने लगा. बाद में 'बजट' शब्‍द सरकार की संभावित आय और व्‍यय के ब्‍योरे के लिए प्रयुक्‍त होने लगा.

सीमा शुल्‍क
देश की सीमा पार से व्‍यापार किए जाने की स्थिति में सरकार कुछ शुल्‍क लेती है. इस तरह निर्यात या आयात की जाने वाली वस्‍तु पर जो शुल्‍क देय होता है, वह सीमा शुल्‍क या कस्‍टम ड्यूटी कहलाता है. आयातकों और निर्यातकों, दोनों को ही यह शुल्‍क देना होता है. इससे सरकार को पर्याप्‍त आय होती है.

कर
राज्‍य द्वारा व्‍यक्‍ितयों या संस्‍थाओं से जो अधिभार या धन लेती है, उसे कर या टैक्‍स कहा जाता है. राष्‍ट्र के अधीन आने वाली संस्‍थाएं भी तरह-तरह के कर लगाती हैं. मोटे तौर पर कर दो तरह के होते हैं- प्रत्‍यक्ष कर और अप्रत्‍यक्ष कर. सरकार के लिए कर लगाना एक बुनियादी जरूरत है, भले ही इसे जनता पर बोझ के रूप में देखा जाता है.

सकल घरेलू उत्‍पाद
देश में किसी एक वर्ष के भीतर उत्‍पादित वस्‍तुओं और सेवाओं के कुल बाजार मूल्‍य को सकल घरेलू उत्‍पाद कहा जाता है.प्रत्‍यक्ष कर
किसी व्‍यक्ति या संस्‍था को होने वाली आय और उसके स्रोत पर लगाया जाने वाले कर प्रत्‍यक्ष कर के अंतर्गत आते हैं.

अप्रत्‍यक्ष कर
किसी वस्‍तु के उत्‍पादन, आयात अथवा निर्यात पर लगाए जाने वाले कर अप्रत्‍यक्ष कर की श्रेणी में आते हैं.

आयकर
यह विभिन्‍न स्रोतों से होने वाली की किसी की वैयक्तिक आय पर लगाया जाने वाला कर है. मसलन, वेतन, विनेश, ब्‍याज आदि से होने वाली आय.

बिक्री कर
वस्‍तुओं के खुदरा बिक्री पर लगाए जाने वाले कर को बिक्री कर कहते हैं.

योजना खर्च
राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सहायता के अतिरिक्‍त केंद्र सरकार की योजनाओं पर होने वाले सभी तरह के खर्च योजना खर्च के अंतर्गत आते हैं.

गैर योजना खर्च
गैर योजना खर्च के अंतर्गत ब्‍याज की अदायगी, रक्षा, सब्सिडी, पेंशन, आर्थिक सेवाएं, सार्वजनिक उपक्रमों को दिए जाने वाले ऋण्‍ा आदि आते हैं. राज्‍यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विदेशी सरकारों को दिए जाने वाले ऋण इसी मद में आते हैं. राजस्‍व खर्च
इसके अंतर्गत सरकारी मंत्रालयों, विभागों और अन्‍य सेवाओं पर होने वाले खर्च आते हैं. इसमें सरकार द्वारा पिछली कर्जों की ब्‍याज अदायगी का खर्च भी शामिल किया जाता है.

वित्तीय घाटा
भारत जैसे लोककल्‍याणकारी राज्‍य में परंपरा रही है कि बजट में सरकार की आय की तुलना में विविध मदों में व्‍यय ज्‍यादा किया जाता है. आय और व्‍यय के इसी अंतर को बजटीय घाटा कहा जाता है.

प्राथमिक घाटा
वित्तीय घाटे में से ब्‍याज के तौर पर किए गए भुगतान को घटाकर, जो राशि बचती है, उसे प्राथमिक घाटा कहा जाता है.

राजस्‍व सरप्‍लस
यदि राजस्‍व की प्राप्ति राजस्‍व व्‍यय की तुलना में ज्‍यादा है, तो इन दोनों के अतंर को राजस्‍व सरप्‍लस कहा जाता है. हालांकि भारत जैसे लोककल्‍याणकारी राज्‍य में इस तरह की स्थिति देखने को नहीं मिलती है.

पूंजी बजट
बजट में सरकार की आमदनी का ब्‍योरा भी पेश किया जाता है. इस आमदनी में सरकार को होने वाली पूंजीगत आय भी शामिल होती है. इस तरह की आमद के अंतर्गत सरकार द्वारा रिजर्व बैंक और विदेशी बैंक से लिए जाने वाले कर्ज, ट्रेजरी चालानों की ब्रिकी से होने वाली आय के साथ-साथ राज्‍यों को दिए गए कर्जों की वसूली से प्राप्‍त धन आते हैं. इस तरह ये सभी पूंजी बजट का हिस्‍सा हैं.

पूंजीगत सामान
किसी भी उत्‍पाद के उत्‍पादन में काम आने वाली मूल वस्‍तु को पूंजीगत सामान कहा जाता है. बजट में अक्‍सर पूंजीगत सामान की चर्चा आती है.पूंजी भुगतान
किसी परिसंपत्ति आदि की खरीद के लिए सरकार द्वारा किए गए भुगतान पूंजी भुगतान के अंतर्गत आते हैं. केंद्र सरकार द्वारा राज्‍यों, केंद्रशासित प्रदेशों, सार्वजनिक उपक्रमों को मंजूर ऋण और अग्रिम भुगतान राशि भी पूंजी भुगतान का हिस्‍सा हैं.

पूंजी प्राप्तियां
सरकार को पूंजीगत मद से होने वाली आमदनी पूंजी प्राप्तियां कहलाती हैं. इसके अंतर्गत रिजर्व बैंक से प्राप्‍त कर्ज, ट्रेजरी चालान की बिक्री से होने वाली आमदनी आदि आती हैं. राज्‍यों, केंद्रशासित प्रदेशों को दिए गए पिछले ऋणों की उगाही और सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्‍सेदारी बेचने से होने वाली आय इसी श्रेणी में आती है.

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