एडवांस्ड सर्च

समाजवादी पार्टी में घमासान के सात दिनों की 7 बड़ी बातें

पिछले सात दिनों के दौरान सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल को बाहर का रास्ता दिखाया गया तो स्वयं मुख्यमंत्री भी बाहर किए गए और तो और अखिलेश ने बगावती तेवर दिखाए और शक्ति प्रदर्शन किया. तामाम जोड़ तोड़ की कोशिशें की गईं लेकिन कुछ भी हों, पार्टी के भीतर इन सात दिनों की गतिविधियों ने सपा को हाशिए पर ला खड़ा किया है.

Advertisement
aajtak.in
अभिजीत श्रीवास्तव लखनऊ, 05 January 2017
समाजवादी पार्टी में घमासान के सात दिनों की 7 बड़ी बातें सपा में कलह के बीच चुनावी तारीखों का ऐलान

चुनाव आयोग ने बुधवार को दीर्घप्रतीक्षित पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के तारीखों का ऐलान कर दिया है. जिन पांच राज्यों में चुनाव होने हैं उनमें सबसे हाईप्रोफाइल उत्तर प्रदेश है जो आजादी के बाद से ही देश की राजनीति की धुरी पर रहता है. 2012 के विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश की जनता ने अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी को बहुमत दिया लेकिन राज्य और खुद पार्टी के अंदरूनी हालात चुनाव से पहले ठीक नहीं हैं. चाचा शिवपाल के साथ भतीजे अखिलेश की चल रही नूरा कुश्ती ने पार्टी के कमर को चुनाव से पहले झुका रखा है. खास कर पिछले एक हफ्ते से पार्टी के भीतर मचे घमासान ने आने वाले चुनावों के लिए अखिलेश की राहें मुश्किल कर दी हैं.

पिछले सात दिनों के दौरान सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल को बाहर का रास्ता दिखाया गया तो स्वयं मुख्यमंत्री भी बाहर किए गए और तो और अखिलेश ने बगावती तेवर दिखाए और शक्ति प्रदर्शन किया. तामाम जोड़ तोड़ की कोशिशें की गईं लेकिन कुछ भी हों, पार्टी के भीतर इन सात दिनों की गतिविधियों ने सपा को हाशिए पर ला खड़ा किया है.

2015 के दिसंबर महीने में चाचा शिवपाल ने अखिलेश के तीन करीबियों को पार्टी के बाहर कर इस घमासान की शुरुआत की. लेकिन 2016 के दिसंबर महीने के आते आते चाचा भतीजे के बीच ये द्वंद्व बहुत विकराल रूप ले चुका था. 2016 के अंतिम कुछ दिन और साल 2017 की शुरुआत पार्टी के लिए हंगामेदार रहा. देखें पिछले सात दिनों के दौरान समाजवादी पार्टी के अंदर क्या क्या हुआ?

28 दिसंबर 2016: मुलायम सिंह यादव ने 325 उम्मीवारों की सूची जारी की. इसमें शिवपाल के चहेतों की भरमार जबकि अखिलेश के करीबियों को दरकिनार किया गया. मुलायम की जारी सूची में 176 मौजूदा विधायकों को टिकट दिया गया.

29 दिसंबर 2016: पिता मुलायम द्वारा अपने चहेतों की अनदेखी से बौखलाए अखिलेश ने गुरुवार को दिन भर की बैठक के बाद देर शाम अपने 235 उम्मीदवारों की सूची जारी की जिसमें मौजूदा 171 और 64 नए उम्मीदवारों को जगह दी गई.

30 दिसंबर 2016: मुलायम सिंह यादव ने बेटे सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और अपने भाई रामगोपाल यादव को विधानसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करने के दंड स्वरूप पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया.

31 दिसंबर 2016: एक दिन बाद आजम खान के बीच बचाव के बाद मुलायम सिंह ने अखिलेश और रामगोपाल को वापस पार्टी में ले लिया. इससे पहले इसी दिन अखिलेश ने अपने विधायकों की मीटिंग बुलाई जिसमें पार्टी के 229 में से 200 विधायक शामिल हुए. एक तरह से यह अखिलेश का बतौर मुख्यमंत्री शक्ति प्रदर्शन था.

01 जनवरी 2017: 2016 की अंतिम शाम को पार्टी में वापसी के बाद अखिलेश ने 2017 की शुरुआत बड़े ही चौंकाने वाले अंदाज में किया. दोपहर को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने अखिलेश को पार्टी का नया अध्यक्ष घोषित किया तो चाचा शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाया गया और अमर सिंह को पार्टी से निष्कासित किया. हालांकि इसके जवाब में शाम तक मुलायम सिंह ने भाई रामगोपाल यादव को एक बार फिर पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया.

02 जनवरी 2017: मुलायम सिंह चुनाव आयोग पहुंचे और समाजवादी पार्टी के चुनाव चिह्न साइकिल पर अपना दावा पेश किया.

03 जनवरी 2017: रामगोपाल ने चुनाव आयोग से अपनी मुलाकात में कहा, ‘अखिलेश के नेतृत्व वाली पार्टी ही असली समाजवादी पार्टी है और 90 फीसदी सदस्य हमारे साथ हैं.’

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay