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यूपी की इस सीट पर होगा 'बहू-बेटी' का हाई प्रोफाइल मुकाबला

बीजेपी ने रविवार को अपनी दूसरी लिस्ट जारी की, जिसमें उन्होंने लखनऊ कैंट से कांग्रेस छोड़कर आईं रीता बहुगुणा को टिकट दिया है. इस सीट पर सबकी नजरें हो सकती हैं, क्योंकि यहां रीता का मुकाबला सीधे-सीधे मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव से होगा.

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aajtak.in
लव रघुवंशी नई दिल्ली, 23 January 2017
यूपी की इस सीट पर होगा 'बहू-बेटी' का हाई प्रोफाइल मुकाबला रीता बहुगुणा और अपर्णा यादव

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, अब वैसे-वैसे पार्टियों ने उम्मीदवारों को टिकट देना शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा और बीजेपी अपने-अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर रही हैं. अभी तक बसपा ही अपने सभी उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर पाई है.

बीजेपी ने रविवार को अपनी दूसरी लिस्ट जारी की, जिसमें उन्होंने लखनऊ कैंट से कांग्रेस छोड़कर आईं रीता बहुगुणा को टिकट दिया है. इस सीट पर सबकी नजरें हो सकती हैं, क्योंकि यहां रीता का मुकाबला सीधे-सीधे मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव से होगा. अपर्णा यादव के भी लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ने के आसार है, हालांकि अखिलेश यादव ने अभी तक उनके नाम पर मुहर नहीं लगाई है. लेकिन मुलायम पहले ही उनके नाम का ऐलान कर चुके हैं, ऐसे में पूरी संभावना है कि लखनऊ कैंट से अपर्णा को टिकट मिल जाए.

पूर्व सीएम की बेटी हैं रीता बहुगुणा
रीता बहुगुणा भी यूपी की राजनीति में अपर्णा से काफी अनुभवी हैं और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री एचए बहुगुणा जोशी की बेटी हैं. इसके अलावा वह कांग्रेस की राज्य प्रमुख भी रही हैं. रीता की मां भी सांसद थीं.

अपर्णा बनी यादव परिवार में कलह की वजह
रीता बहुगुणा ने 2012 में कांग्रेस के टिकट पर लखनऊ कैंट से चुनाव जीता था. इस बार वो बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगीं. अपर्णा यादव मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी के बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं. इससे पहले जब मुलायम सिंह यादव ने 325 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया था तो सपा में कलह की शुरुआत हो गई थी. उस समय खबर थी कि अखिलेश मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव को टिकट दिए जाने से नाराज हैं. मुलायम ने अपर्णा को लखनऊ कैंट से पार्टी उम्मीदवार घोषित किया था.

शिवपाल के खेमे की हैं अपर्णा
इस निर्वाचन क्षेत्र से सपा कभी नहीं जीत पाई है. यहां अपना आधार मजबूत करने के लिए अपर्णा काफी मेहनत भी कर रही हैं. अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव के बीच हुई खींचतान में अपर्णा को शिवपाल खेमे का माना जाता है. अखिलेश के करीबियों का मानना है कि अपर्णा यादव की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अपने जेठ की जगह सपा का चेहरा बनने की हैं और आगे चलकर वह यूपी मुख्यमंत्री की उम्मीदवार के रूप में भी खुद को देखती हैं.

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