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मणिपुरः कभी फुटबॉलर रहे बीरेन सिंह संभालेंगे BJP सरकार का गोल पोस्ट

मणिपुर में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने जा रही है. पार्टी ने एन बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री चुना है. बीजेपी विधायक थोंगम विश्वजीत भी इस पद के दावेदार थे पर आखिरकार बाजी बीरेन सिंह के हाथ लगी. बीरेन सिंह कभी नेशनल लेवल के फुटबॉलर भी रह चुके हैं. बता दें कि 11 मार्च को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस बहुमत नहीं पा सकी, जिसके बाद बीजेपी ने कम सीट होते हुए भी सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है.

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Sahitya Aajtak 2018
aajtak.in [Edited by: रुचिका सैनी]नई दिल्ली, 15 March 2017
मणिपुरः कभी फुटबॉलर रहे बीरेन सिंह संभालेंगे BJP सरकार का गोल पोस्ट एन बीरेन सिंह

मणिपुर में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने जा रही है. पार्टी ने एन बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री चुना है. बीजेपी विधायक थोंगम विश्वजीत भी इस पद के दावेदार थे पर आखिरकार बाजी बीरेन सिंह के हाथ लगी. बीरेन सिंह कभी नेशनल लेवल के फुटबॉलर भी रह चुके हैं. बता दें कि 11 मार्च को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस बहुमत नहीं पा सकी, जिसके बाद बीजेपी ने कम सीट होते हुए भी सहयोगियों के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है. राज्यपाल नजमा हेपतुल्लाह के सामने बीजेपी ने दावा किया है कि 60 सीट वाली विधानसभा में उसके पास 32 विधायकों का सपोर्ट है.

जानिए कौन हैं मणिपुर के अगले मुख्यमंत्री

2002 से शुरू हुआ था राजनीतिक करियर
- राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर रहे 56 वर्षीय नॉन्गथोमबाम बीरेन सिंह ने अपना राजनीतिक करियर 2002 में शुरू किया था.
- 2002 में डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी के टिकट पर विधायक का चुनाव लड़ा था.
- डीआरपीपी ने 2002 के राज्य विधान सभा चुनाव में 23 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से केवल दो को जीत मिली थी. इन दो विधायकों में एक बीरेन सिंह थे.
- चुनाव जीतने के बाद बीरेन और उनकी पार्टी कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा बन गए.
- इबोबी सिंह सरकार में बीरेन मंत्री बनाए गए थे. साल 2004 के लोक सभा चुनाव से पहले डीआरपीपी का कांग्रेस में विलय हो गया.
- 2007 में बीरेन ने पहली बार कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर विधान सभा चुनाव लड़ा और जीता.

अखबार चलाने के लिए बेची थी जमीन
- पेशेवर फुटबॉलर रहे बीरेन ने स्थानीय भाषा में एक दैनिक अखबार की शुरुआत की थी.
- अखबार चलाने के लिए उन्हें अपने पिता से विरासत में मिली दो एकड़ जमीन बेचनी पड़ी थी.
- हालांकि, राजनीति में आने के लिए उन्होंने साल 2001 में अपना अखबार दो लाख रुपये में बेच दिया था.

जब छोड़ा कांग्रेस का हाथ
- 2016 अक्टूबर में बीरेन ने अंसतोष जाहिर करते हुए इबोबी सिंह सरकार और कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.
- जिसके बाद अक्टूबर 2016 में वो आधिकारिक तौर पर बीजेपी में शामिल हो गए.


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