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मोदी के विकास से नहीं, अंदरूनी कलह से हारी कांग्रेस: शंकर सिंह वाघेला

गुजरात विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं. गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर पंचायत आजतक के मंच पर आए पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि गुजरात में कांग्रेस की हार मोदी के विकास मॉडल की वजह से नहीं, बल्कि अपनी पार्टी की कलह से है.

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aajtak.in [Edited By: कुबूल अहमद]नई दिल्ली, 13 October 2017
मोदी के विकास से नहीं, अंदरूनी कलह से हारी कांग्रेस: शंकर सिंह वाघेला पूर्व मुख्य़मंत्री शंकर सिंह वाघेला

गुजरात विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं. गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर पंचायत आजतक के मंच पर आए पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि गुजरात में कांग्रेस की हार मोदी के विकास मॉडल की वजह से नहीं, बल्कि अपनी पार्टी की कलह से है.

उन्होंने कहा कि 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने आखिरी वक्त पर 28 टिकट बदल दिए. अगर ये टिकट नहीं बदले जाते तो बीजेपी हार जाती. कांग्रेस हाईकमान के इशारे पर टिकट दिए गए, कार्यकर्ता को नजरअंदाज कर दिया गया. शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है. आज ऐसी कोई पार्टी नहीं है जिसके पास कोई विचारधारा हो. सभी पार्टियों को सत्ता का लालच है.

वाघेला ने कहा कि मैं लगातार कहता रहा कि कांग्रेस के विधायक पार्टी छोड़ने वाले हैं लेकिन कांग्रेस आलाकमान खामोश रहीं. जैसे मैच फिक्सिंग चल रही हो. वाघेला ने कहा कि गुजरात की जनता पेंडुलम की तरह नहीं है. वो कांग्रेस से नाखुश होकर बीजेपी के पास गई और उसने 20 साल से उसे सत्ता सौंप रखी है. जनता बीजेपी से भी मायूस हुई तो क्या उसे फिर कांग्रेस के पास जाना चाहिए. क्यों तीसरा विकल्प नहीं होना चाहिए.

जब वाघेला से पूछा गया कि उन्हें तो बीजेपी की बी टीम कहा जा रहा है जो कांग्रेस को हराने के लिए मैदान में है तो वाघेला का जवाब था कि क्या केजरीवाल ने कांग्रेस को हराने के लिए दिल्ली में आम आदमी पार्टी बनाई थी. हमारे जितने भी प्वाइंट हैं वो सरकार के खिलाफ हैं. हमें बीजेपी का बी टीम बताना जनता का अपमान है. हम तीसरा विकल्प देंगे.

वाघेला से जब पूछा गया कि गुजरात में तो तीसरे विकल्प का इतिहास रहा नहीं है. केशु भाई पटेल ने कोशिश की थी लेकिन विफल रहे इसपर वाघेला ने कहा कि विकल्प हर जगह होता है. आप पार्टी क्या दिल्ली में थी. बीजू पटनायक की पार्टी क्या थी पहले, शिवसेना पहले थी क्या, मुलायम की पार्टी थी क्या. ममता बनर्जी गईं तो क्या बीजेपी या कांग्रेस अथवा सीपीएम के वोट तोड़ने गईं थीं. सब अपने लिए जाते हैं.

वाघेला ने कहा कि गुजरात में कोई लेउआ पटेल है, कोई कडुआ है, कोई क्षत्रिय, कोई परमार, कोई दलित, कोई ब्राह्मण है. यहां तीसरे मोर्चे की भरपूर संभावनाएं हैं. हम लोगों से पूछकर टिकट देंगे और जिसे जनता भ्रष्ट बताएगी उसे उम्मीदवार नहीं बनाएंगे.

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