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नहीं घोषित हुई गुजरात चुनाव की तारीख, कांग्रेस बोली-EC मोदी सरकार के दबाव में

आयोग की घोषणा पर वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय ने कहा कि 2012 में अप्रैल के पहले हफ्ते में चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ था और हिमाचल और गुजरात का चुनाव कार्यक्रम एक साथ घोषित हुआ था. तब हिमाचल में चार नवंबर को वोटिंग हुई थी लेकिन मतगणना 20 दिसंबर को हुई थी. गुजरात में तब दो चरणों में वोटिंग हुई थी और 13 व 17 दिसंबर को वोट डाले गए थे.

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aajtak.in
नंदलाल शर्मा/ विजय रावत नई दिल्ली , 12 October 2017
नहीं घोषित हुई गुजरात चुनाव की तारीख, कांग्रेस बोली-EC मोदी सरकार के दबाव में मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति

विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग की प्रेसवार्ता ने आज राजनीतिक जानकारों को हैरान कर दिया. विपक्ष ने इसको लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है. हालांकि लोगों को उम्मीद थी कि आज मुख्य चुनाव आयुक्त हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करेंगे. लेकिन, इसके विपरीत चुनाव आयोग ने महज हिमाचल प्रदेश के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की और बताया कि हिमाचल में 9 नवंबर को वोटिंग और 18 दिसंबर को मतगणना होगी.

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार चुनाव आयोग पर दबाब डाल गुजरात चुनाव को मुल्तवी कराना चाहती है. लेकिन, जनता बीजेपी को चलता करने का मन बना चुकी है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गुजरात में चुनाव आचार संहिता की घोषणा इसलिए नहीं हो रही क्योंकि नरेंद्र मोदी 16 अक्टूबर को लुभावने जुमले देने वहाँ जा रहे हैं?

हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति से जब पूछा गया कि परंपरा को तोड़ते हुए वे गुजरात और हिमाचल प्रदेश का चुनाव कार्यक्रम एक साथ घोषित क्यों नहीं कर रहे तो उनका जवाब था कि दोनों प्रदेशों में मतगणना एक ही दिन यानी 18 दिसंबर को होगी.

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि राज्य के मुख्य सचिव से आयोग को पत्र मिला है, जिसमें कहा गया है कि जुलाई में आई बाढ़ के चलते कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य चल रहा है. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार आयोग को वीवीपैट (VVPAT) की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी है.

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के तहत चुनाव आयोग मतदान की तारीख से अधिकतम 21 दिन पहले ही अधिसूचना जारी कर सकता है. उन्होंने कहा कि गुजरात में भी मतदान 18 दिसंबर से पहले करा लिया जाएगा.

आयोग की घोषणा पर वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय ने कहा कि 2012 में अप्रैल के पहले हफ्ते में चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ था और हिमाचल और गुजरात का चुनाव कार्यक्रम एक साथ घोषित हुआ था. तब हिमाचल में चार नवंबर को वोटिंग हुई थी लेकिन मतगणना 20 दिसंबर को हुई थी. गुजरात में तब दो चरणों में वोटिंग हुई थी और 13 व 17 दिसंबर को वोट डाले गए थे.

नीलांजन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे. उन्होंने इस बात पर नाखुशी जाहिर की थी कि लंबे चुनावी शेड्यूल की वजह से विकास कार्यों पर असर पड़ता है क्योंकि चुनावी अधिसूचना जारी रहती है. पीएम मोदी इस समय 'वन नेशन, वन इलेक्शन' कैंपेन की वकालत करते रहे हैं, उसके मूल में भी उनकी यही सोच है. हालांकि मतगणना हिमाचल और गुजरात दोनों की एक साथ 18 दिसंबर को होगी.

वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने कहा कि चुनाव आयोग से फैसले से हिमाचल प्रदेश में अधिसूचना लागू हो जाएगी, जबकि गुजरात की सरकार को थोड़ा समय और मिल जाएगा ताकि अगर वो चाहे तो लोगों को लाभ के लिए अहम घोषणाएं कर सके.

कांग्रेस नेता मुकेश नायक ने चुनाव आयोग के फैसले पर हैरानी जताई और कहा कि आयोग का निर्णय समझ से परे हैं. अगर गुजरात में चुनाव में देरी होगी तो सत्ता में जो पार्टी है उसे जनता को लुभाने के लिए आधारहीन और गैरजरूरी लोकलुभावन घोषणाएं करने का वक्त मिल जाएगा जो चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सकता है.

हालांकि बीजेपी प्रवक्ता सैयद जफर इस्लाम ने चुनाव आयोग के फैसले का बचाव किया और कहा कि दोनों राज्यों के चुनाव साथ घोषित नहीं हो सकते क्योंकि हिमाचल विधानसभा का सत्र 7 जनवरी को खत्म होगा जबकि गुजरात का 21 जनवरी को होगा. उन्होंने कहा कि लोकलुभावन घोषणाएं तो कोई भी सरकार पहले भी कर सकती है. उसके लिए अंतिम दिनों का इंतजार करने की जरूरत नहीं रहती.

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