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बिहार चुनाव: रिजल्ट से पहले गांव में बेफिक्री के आलम में जीतनराम मांझी

पूर्व मुख्यमंत्री और एनडीए के साझीदार जीतनराम मांझी मतदान के बाद गया के अपने गांव महकार में बेफिक्र होकर खेती को समेटने में जुटे हैं. कभी अपनी गोशाला में गायों को देख रहे हैं तो कभी फसल की कटनी का हिसाब ले रहे हैं. नतीजों के पहले की इस बेफिक्री के पीछे कितनी चिंताएं छुपी है और दिलों की धड़कन कितनी तेज है यह मांझी की बातों से झलकता है.

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aajtak.in
ब्रजेश मिश्र पटना, 07 November 2015
बिहार चुनाव: रिजल्ट से पहले गांव में बेफिक्री के आलम में जीतनराम मांझी

पूर्व मुख्यमंत्री और एनडीए के साझीदार जीतनराम मांझी मतदान के बाद गया के अपने गांव महकार में बेफिक्र होकर खेती को समेटने में जुटे हैं. कभी अपनी गोशाला में गायों को देख रहे हैं तो कभी फसल की कटनी का हिसाब ले रहे हैं. नतीजों के पहले की इस बेफिक्री के पीछे कितनी चिंताएं छुपी है और दिलों की धड़कन कितनी तेज है यह मांझी की बातों से झलकता है.

खिजरसराय के महाकार गांव में कभी कच्चे ईंट का मकान अब बंगले की शक्ल ले चुका है. रंग-रोगन गहरे हरे रंग का है और और गांव का इकलौता मकान ये एहसास करा देता है कि आप जीतनराम मांझी के गांव में हैं.

बिहार चुनाव के ओपिनियन पोल पर उन्होंने कहा कि कोई ओपिनियन पोल यूं ही कह दे कि इतनी सीटें आएंगी ये सोच से परे है लेकिन हमें टुडे चाणक्या का ओपिनियन पोल सच्चाई से नजदीक दिखता है. मांझी ने कहा, 'तीन फैक्टर की वजह से हम जीत रहे हैं- महिलाएं, युवा और दलित फैक्टर. इन्होंने हमारे पक्ष में काम किया हैं. पहली बार दलितों ने इतने अग्रेसिव होकर वोट किया है. इन्हीं तीनों फैक्टर की वजह से पोल प्रतिशत बढा है जो एनडीए के पक्ष में गया है.

लालू प्रसाद पर ली चुटकी
पूर्व सीएम ने कहा कि लालू पहले भी झांसा देते रहे हैं. लालू सीटों के बारे में जो बोल दें लेकिन 8 के बाद यही लालू कहेंगे कि नरेन्द्र मोदी ने सारा ईवीएम बदल दिया है.

मांझी फैक्टर को लेकर जब उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा- मांझी फैक्टर के बारे मैं नहीं जानता लेकिन इतना कह सकता हूँ कि मैं जब बोलता था तो हमारे वोटर वो समझ रहे थे. ये परिवर्तन के लिए नहीं बल्कि अपमान का बदला लेने का मूड दिखा है.

मुख्यमंत्री के रेस में नहीं, एनडीए को बिना शर्त समर्थन
जीतनराम मांझी ने एक बार फिर साफ किया कि वह मुख्यमंत्री बनने की रेस में शामिल नहीं हैं. उन्होंने कहा- 'नरेन्द्र मोदी को जब वचन दिया था तो बिना शर्त समर्थन देने की बात कही गई थी. मैंने कहा था कि मैं मुख्यमंत्री का उम्मीदवार नहीं हूं, आप जिसे बनाना चाहें बनाएं लेकिन मैंने कहा था कि जितनी ज्यादा सीट हमें देंगे आपको उतना फायदा होगा. कम देंगे तो घाटा भी आपको होगा.' उन्होंने कहा कि सीटों को लेकर एनडीए के दूसरे पार्टनरों ने सवाल भी उठाए हैं, लेकिन वह हमेशा शांत रहे हैं.

मांझी ने कहा कि यदि रिजल्ट में उनकी सीटें, दूसरी पार्टियों के मुकाबले ज्यादा रहीं तो बीजेपी को पछतावा होगा कि उन्होंने हमें और सीटें क्यों नहीं दीं. उन्होंने कहा- अगर जोड़तोड कर सरकार बनाने की नौबत आई तो उन्हें पछताना पड़ेगा कि काश हमने हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा को ज्यादा सीटें दी होती.

'नीतीश-लालू को धाराशायी करने को बनाई पार्टी'
बिहार के पूर्व सीएम ने कहा कि उन्होंने HAM का गठन लालू-नीतीश को धराशायी करने के लिए किया है. उनके साथ जाने या मदद करने का कोई औचित्य नहीं. कम सीट आए ज्यादा आए. हम एनड़ीए के साथ हैं और रहेंगे.

'बीजेपी से ज्यादा होगा HAM का स्ट्राइक रेट'
बीजेपी के सीएम उम्मीदवार को लेकर उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी की बात अलग हैं. मोदी के विचार के बिना बिहार में कोई मुख्यमंत्री नहीं बनेगा. ऐसे में मोदी पर मुझे पूरा विश्वास है कि वह सही फैसला लेंगे. मांझी ने कहा- बीजेपी का सीएम चेहरा कौन होगा इस पर राय देने की स्थिति में मैं नहीं हूं लेकिन अगर पूछा जाएगा तो अपनी राय जरूर दूंगा. उन्होंने यह भी कहा कि सवर्ण में कई ऐसे चेहरे हैं जो दलितों के लिए सोचते हैं. दलितों में भी ऐसे हैं सवर्णों के लिए सोचते हैं, जिसे नरेंद्र मोदी चुन देंगे उसका समर्थन करेंगे.

मांझी ने कहा कि अगर अगड़ी जाति का कोई नेता सीएम बने तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं. उन्होंने कहा- अगर फॉरवर्डों ने मदद नहीं की होती तो ना तो बाबा साबह अंबेडकर यहां होते ना ही जीतनराम मांझी.' जीत के सवाल पर उन्होंने कहा कि मेरा स्ट्राइकिंग रेट बीजेपी से भी ज्यादा होगा. ये प्रतिशत के हिसाब से हैं. अगर हम 20 में 17 जीत रहे हैं तो बीजेपी को 150 में कितना और पासवान को कितना जीतना चाहिए आप देख लीजिए.

मोहन भागवत को खुला समर्थन
मांझी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का खुला समर्थन करते हुए कहा कि भागवत ने आरक्षण पर कोई गलत बात नहीं कही और गलत इसलिए नहीं कि 1962 में पार्लियामेंट में जवाहर लाल नेहरू ने भी यही कहा था कि बिना सोचे समझे रिन्युअल नहीं होना चाहिए. समीक्षा का मतलब ये है कि 16 प्रतिशत आबादी से ज्यादा भी तो हो सकता है. उन्होंने कहा कि जो अच्छा आदमी और सच्चा आदमी होता है वो बड़े फलक पर बात करता है लेकिन गलत आदमी उसे गलत तरीके से पेश करता है. भागवत अच्छे आदमी हैं उन्होंने अच्छी बात रखी. वो विचारवान आदमी है उनकी कोई गलत मंशा नहीं थी.

मांझी ने यह भी कहा कि दलित मुस्लिम और दलित आदिवासी की बात नहीं होनी चाहिए, क्योंकि तब तो संविधान में संशोधन करना पड़ेगा.

खेती में लगता है मांझी का मन
गांव में समय बिताने को लेकर उन्होंने कहा कि गांव में अधिक मन लगता है, इसलिए मुख्यमंत्री रहते भी बार-बार यहां आ जाते थे. मांझी ने बताया कि उनका खेती में बहुत मन लगता है. चुनाव हारे तो खेती के बल पर ही चलते रहे. उन्होंने कहा, 'चुनाव के पहले मेरी कोई धड़कन नहीं बढ़ी है मैं बिल्कुल शांत हूं. काम करते वक्त तक धड़कन बढ़ती थी. गीता के श्लोक पर विश्वास है. जिससे मन शांत हो जाता है.

उन्होंने कहा कि चुनाव जीतकर सरकार बनाएंगे तो कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाऐंगे उसी पर चलेंगे. निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू करेंगे. मांझी ने यह भी कहा कि नीतीश और लालू की दोस्ती दरक रही है. रिजल्ट के बाद देखिएगा कैसे टूटती है.

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