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अब दिल्ली में 'आम आदमी' की सरकार बनना तय, आज उपराज्यपाल से मिलेंगे अरविंद केजरीवाल

आम आदमी पार्टी (आप) दिल्ली में कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने के रास्ते में है और इसके नेता अरविंद केजरीवाल ने सत्ता में आने का स्पष्ट संकेत देते हुए वायदा किया कि घोषणा-पत्र में किए गए वायदों को पूरा किया जाएगा.

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भाषा [Edited by: मलखान सिंह]नई दिल्ली, 23 December 2013
अब दिल्ली में 'आम आदमी' की सरकार बनना तय, आज उपराज्यपाल से मिलेंगे अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली में सभा को संबोधित करते केजरीवाल

आम आदमी पार्टी (आप) दिल्ली में कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने के रास्ते में है और इसके नेता अरविंद केजरीवाल ने सत्ता में आने का स्पष्ट संकेत देते हुए वायदा किया कि घोषणा-पत्र में किए गए वायदों को पूरा किया जाएगा.

केजरीवाल ने कहा कि सप्ताहभर चले आप के रायशुमारी कार्यक्रम में लोगों की जबर्दस्त भागीदारी रही. इसमें सवाल किया गया था कि पार्टी को कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनानी चाहिए या नहीं. उन्होंने कहा कि राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक के बाद सोमवार को वे उपराज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात करेंगे.

भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करने वाली करीब एक साल पुरानी पार्टी के नेता केजरीवाल ने कहा कि जनसभाओं में लोगों की जबर्दस्त भागीदारी रही और करीब 80 प्रतिशत लोगों ने सरकार बनाने का समर्थन किया, लेकिन अंतिम फैसला राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक के बाद किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके बाद वह सोमवार दोपहर साढ़े 12 बजे नसीब जंग से मिलेंगे.

यह पूछे जाने पर कि क्या वह घोषणापत्र में किए गए वायदों को पूरा कर पाएंगे, केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी ‘मजबूत घोषणापत्र’ को पूरा करेगी, जिसे विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श कर तैयार किया गया था. आप नेता ने कहा कि घोषणापत्र की कुछ चीजों को तो सरकार गठन के कुछ ही घंटों में लागू किया जा सकता है और ऐसा किया जाएगा. पानी से जुड़े मुद्दे और बिजली वितरण कंपनियों का लेखा परीक्षण के लिए आदेश उनके एजेंडा में सबसे ऊपर पर हैं.

नौकरशाह से राजनीतिक दल के नेता बने केजरीवाल ने रविवार को अपने विधानसभा क्षेत्र नई दिल्ली में चार जनसभाएं कीं और सभी स्थानों पर लोगों ने सरकार बनाने का समर्थन किया.

दिल्ली विधानसभा के लिए हुए चुनावों की मतगणना आठ दिसंबर को ही संपन्न हो गई थी, जिसमें आप को 28 सीटें मिली थीं जबकि कांग्रेस को आठ सीटें मिली थीं. सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी रही थी, जिसे 31 सीटें मिली थीं. दिल्ली में करीब दो हफ्ते तक राजनीतिक गतिरोध बना रहा.

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