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दिल्‍ली की सियासत में ट्विस्‍ट, कांग्रेस के 3 विधायक AAP को समर्थन के खिलाफ

दिल्ली में एक ओर कड़ाके की ठंड पड़ रही है, तो दूसरी ओर यहां की सियासत लगातार उबाल खा रही है. दिल्‍ली में सरकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी को समर्थन देने के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राय है. कांग्रेस के जीते हुए 8 विधायकों में से 3 AAP को समर्थन देने के पक्ष में नहीं हैं.

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आजतक ब्‍यूरो [Edited By: अमरेश सौरभ]नई दिल्‍ली, 25 December 2013
दिल्‍ली की सियासत में ट्विस्‍ट, कांग्रेस के 3 विधायक AAP को समर्थन के खिलाफ सरकार पर जारी है तकरार!

दिल्ली में एक ओर कड़ाके की ठंड पड़ रही है, तो दूसरी ओर यहां की सियासत लगातार उबाल खा रही है. दिल्‍ली में सरकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी को समर्थन देने के मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राय है. कांग्रेस के जीते हुए 8 विधायकों में से 3 AAP को समर्थन देने के पक्ष में नहीं हैं.

कांग्रेस के बाकी 5 विधायकों को लगता है कि AAP को समर्थन देने का फैसला उचित है. समर्थन के मसले पर असंतुष्ट विधायकों में पूर्व मंत्री हारुन यूसुफ, अरविंदर सिंह लवली और जयकिशन का नाम सामने आया है. आम आदमी पार्टी के मंत्रिमंडल गठन से पहले ही बड़ी सियासी हलचल मच गई है.

इससे पहले कांग्रेस प्रवक्‍ता जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि AAP को समर्थन देने से कांग्रेस का एक बड़ा त‍बका खुश नहीं है. जनार्दन द्विवेदी ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करके बताया कि पार्टी के सीनियर लीडरों का एक बड़ा तबका मानता है कि AAP समर्थन देने की कोई जरूरत नहीं है. हालांकि उन्‍होंने संकेत दिया कि कांग्रेस दिल्‍ली विधानसभा में सीमित रूप से 'विपक्ष की भूमिका' निभाती रहेगी.

इतना ही नहीं, जनार्दन द्विवेदी ने एक कदम आगे बढ़कर परोक्ष रूप से AAP पर हमला करते हुए कहा कि 'अतिवाद' और 'आतंकवाद' में ज्‍यादा फर्क नहीं होता है. उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस कभी भी अतिवादी रुख नहीं रखती है.

दूसरी ओर, AAP के भीतर भी सरकार बनने से पहले ही 'बगावत' के सुर सुनाई पड़ने लगे हैं. संभावित मंत्रियों की लिस्‍ट में अपना नाम न पाने के बाद AAP के एमएलए विनोद बिन्‍नी काफी नाराज बताए जा रहे हैं.

विनोद बिन्‍नी ने मंगलवार रात को कहा कि उनके अनुभव के बावजूद मंत्रिमंडल में जगह न दिए जाने से वे काफी दुखी है. उन्‍होंने कहा, 'मेरा अपमान हुआ है. मैं कल बड़ा फैसला करूंगा.' समझा जा रहा है कि बिन्‍नी बुधवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करके 'बड़ा धमाका' कर सकते हैं. जानकारी के मुताबिक, बिन्‍नी को समझाने के काम में पार्टी के सीनियर लीडर मनीष सिसोदिया और योगेंद्र यादव को लगाया गया है.

विवाद तब खड़ा हुआ, जब केजरीवाल कैबिनेट के संभावित मंत्रियों के नाम मीडिया में सामने आए. मंत्रियों की लिस्‍ट में जगह नहीं मिलने के बाद विनोद बिन्‍नी ने मंगलवार शाम को केजरीवाल से मुलाकात की. दोनों के बीच 10 मिनट से भी कम समय तक बात हुई. बाद में बिन्‍नी नाराज मुद्रा में बाहर निकल आए.

बहरहाल, दिल्‍ली में सियासी घमासान अपने चरम पर है. यह घमासान आगे क्‍या मोड़ लेता है, यह देखने वाली बात होगी.

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