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बीएसपी के लिए शाख बचाने की चुनौती

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के लिए राज्‍य में अपनी शाख बचाए रखने की चुनौती है. पिछले विधानसभा में स्‍पष्‍ट बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली बीएसपी के लिए इस बार राह इतनी आसान नहीं रहेगी.

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Sahitya Aajtak 2018
आजतक ब्‍यूरोनई दिल्‍ली, 18 January 2012
बीएसपी के लिए शाख बचाने की चुनौती

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के लिए राज्‍य में अपनी शाख बचाए रखने की चुनौती है. पिछले विधानसभा में स्‍पष्‍ट बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली बीएसपी के लिए इस बार राह इतनी आसान नहीं रहेगी. पार्टी नेताओं पर भ्रष्‍टाचार के आरोपों समेत तमाम ऐसे कारण है जो पार्टी के लिए मुश्किलों का सबब बन सकते हैं.

बीएसपी का गठन मुख्यत: भारतीय जाति व्यवस्था के नीचे माने जाने वाले बहुजन (अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक) का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया गया था और ऐसा कहा जाता है कि दल का दर्शन डॉ. आंबेडकर के दर्शन से प्रेरित है.

बीएसपी का गठन हाई प्रोफाइल करिश्माई नेता कांशीराम द्वारा 1984 में किया गया था. पार्टी का राजनीतिक प्रतीक (चुनाव चिन्ह) एक हाथी है. 13वीं लोकसभा (1999-2004) में पार्टी के 14 सदस्य थे. मायावती कई सालों से पार्टी की अध्यक्ष हैं. 11 मई 2007 को उत्तर प्रदेश राज्य के विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद 1991 से पूर्ण बहुमत प्राप्त करने वाली बीएसपी पहली एकल पार्टी बन गई है.

15 सालों तक त्रिशंकु विधानसभा के बाद, बीएसपी भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य में एक स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर सत्ता में आई. पार्टी अध्यक्ष मायावती ने नए मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश में अपने चौथे कार्यकाल को शुरू किया. 13 मई 2007 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

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