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एजेंडा: छोटे राज्यों के फेवर में बीजेपी:फड़नवीस

महाराष्ट्र और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों से बात मोदी के नारे कोऑपरेटिव स्लोगन से शुरू हुई, जिसमें वे राज्यों की भूमिका को ज्यादा स्पेस देने की बात करते हैं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि मोदी खुद मुख्यमंत्री रहे हैं और वे इस परेशानी को समझते हैं इसलिए उन्होंने राज्यों के सहयोग पर बल दिया है और इसका फायदा राज्यों को ही होगा.
<b><span style="color:red">एजेंडा: </span></b>छोटे राज्यों के फेवर में बीजेपी:फड़नवीस Devendra fadnavis and Haris Rawat
धीरेंद्र राय [Edited by: नंदलाल शर्मा]नई दिल्ली, 13 December 2014

महाराष्ट्र और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों से बात मोदी के नारे कोऑपरेटिव स्लोगन से शुरू हुई, जिसमें वे राज्यों की भूमिका को ज्यादा स्पेस देने की बात करते हैं. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि मोदी खुद मुख्यमंत्री रहे हैं और वे इस परेशानी को समझते हैं इसलिए उन्होंने राज्यों के सहयोग पर बल दिया है और इसका फायदा राज्यों को ही होगा.

हालांकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसके उलट बात कही, अनिश्चितता है. प्लानिंग कमीशन नहीं है. पता नहीं चलता आर्थिक सहयोग के लिए किससे बात करें. वहां हमारी बात सुनी जाती थी. लेकिन अब हमारे जैसे राज्यों के आगे बड़ी परेशानी है, जो केंद्र की मदद पर बहुत ज्यादा निर्भर है.

फड़नवीस ने प्रस्तावित नई व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि 1990 से पहले प्लानिंग कमीशन ने अच्छा काम किया था, लेकिन उसके बाद से जब अर्थव्यवस्था बदली, तो फंडिंग की व्यवस्था भी बदलनी चाहिए थी. यूपीए के समय ही मुख्यमंत्री शिकायत करते थे कि लगता है मानो हम प्लानिंग कमीशन के आगे भीख मांगते हैं. फिर रावत जी को विश्वास क्यों नहीं है? इस सवाल पर फड़नवीस ने कहा कि राजनीति की कुछ मजबूरियां होती हैं, इसलिए उन्हें विरोध करना पड़ रहा है.

रावत ने कहा कि इस समय यहां कोई समझा नहीं पा रहा है कि यदि प्लानिंग कमीशन में कोई बदलाव की बात है, तो उसे करने के लिए किसी ने क्या प्रधानमंत्री के हाथ पकड़े हैं. सिर्फ उसे खत्म करना ही उपाय था? प्रधानमंत्री ने इस बारे में देश में आम राय कायम नहीं की, जबकि ये 60 साल पुरानी व्यवस्था थी. अब ये भी नहीं बताया जा रहा है कि इसके बदले में क्या व्यवस्था होगी.

फड़नवीस ने स्पष्ट किया कि ये मोदी ने नहीं बल्कि मनमोहन सिंह ने अपने अंतिम भाषण में ही प्लानिंग कमीशन को खत्म करने की बात उठाई थी. और ये बता देना चाहता हूं कि जब तक नई व्यवस्था नहीं आ जाती, प्लानिंग कमीशन काम करता रहेगा. जब प्रधानमंत्री लालकिले से कह चुके हैं कि प्लानिंग कमीशन खत्म किया जा रहा है, तो यदि वहां कोई सेक्रेटरी बैठता भी है तो वह किस मैंडेट से काम करेगा. प्रधानमंत्री ने तो उस पर रोक लगाने की बात कही है. इसीलिए राज्यों को लगता है कि जब वे अपना प्लान भेजेंगे, तो कौन अप्रूव करेगा.

सवालों का दौर
फड़नवीस से पूछा गया कि यदि राज्यों में परिणाम बीजेपी के अनुकूल नहीं, तो भी क्या ऐसा ही चलेगा? फड़नवीस बोले बिलकुल चलेगा. प्लानिंग कमीशन समाप्त किया जा रहा है, प्लानिंग की व्यवस्था नहीं समाप्त की जा रही है. नई व्यवस्था में राज्यों को ज्यादा अधिकार मिलेगा उसमें.

फड़नवीस से पूछा गया कि विदर्भ राज्य कब बनेगा और वे कहां के मुख्यमंत्री होना चाहेंगे? वे बोले कि अभी, तो मैं महाराष्ट का मुख्यमंत्री हूं. हमारी पार्टी छोटे राज्यों की अवधारणा की पक्षधर है. विदर्भ राज्य कब बनाना है य‍ह केंद्र का विषय है. सरकार जब चाहेगी विदर्भ बनाएगी.

प्लानिंग कमीशन में 1265 कर्मचारी हैं, उनका क्या होगा? इस सवाल पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा कि देश 1265 कर्मचारियों के लिए नहीं, बल्कि विकास के लिए चलता है. उनकी पोस्टिंग कहां होगी, कैसे सैलेरी आएगी, ये चिंता नहीं करनी चाहिए. जहां तक प्लानिंग कमीशन को लेकर कंसल्टेशन की बात है, तो जितना प्रधानमंत्री ने कंसल्टेशन किया उतना किसी ने नहीं किया. चार हजार अर्थशास्त्रियों से राय मंगाई गई है.

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