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काम की बदौलत पांच साल बाद हीरो बनना चाहता हूं: मनोज तिवारी

एजेंडा आज तक 2014 के दूसरे दिन पहली पहली बार सेशन में भोजपुरी गायक व अभि‍नेता तथा बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने अपनी बात रखी. पढ़ें मनोज तिवारी ने क्या कहा...

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बबिता पंतनई दिल्ली, 14 December 2014
काम की बदौलत पांच साल बाद हीरो बनना चाहता हूं: मनोज तिवारी 'एजेंडा आज तक' में मनोज तिवारी

'एजेंडा आज तक' 2014 के दूसरे दिन 'पहली-पहली बार' सेशन में भोजपुरी गायक व अभि‍नेता तथा बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने अपनी बात रखी. पढ़ें मनोज तिवारी ने क्या कहा...

सवाल: पहली बार सांसद बनने का अनुभव कैसा है?
जवाब: अनुभव तो अच्‍छा है, लेकिन खतरा भी है. लोगों की उम्‍मीदें ज्‍यादा हैं. वरना हीरो से विलेन बनने में देरी नहीं लगेगी.

सवाल: दिल्‍ली में चुनाव नजदीक हैं. आप पर दबाव ज्‍यादा है. पूर्वांचल के वोट बैंक के लिहाज से आपको अपना मिशन कितना सार्थक होता लग रहा है?
जवाब: मैं यहां बहुत सोच-समझकर आया हूं. मुझे पता था कि मेरे मित्र विरोध भले ही न करें, लेकिन वो साथ नहीं देंगे. मेरा एक ही उद्देश्‍य था नरेंद्र मोदी को पीएम बनाना, जिसमें मैं सफल हुआ.

सवाल: आपने तो समाजवादी पार्टी से भी चुनाव लड़ा था?
जवाब: वो बात अलग थी.

सवाल: तो आपको तब पता था आप हार जाएंगे. इस बार पता था जीतने वाले हैं?
जवाब: उस वक्‍त मैं शूटिंग कर रहा था और चार्टर्ड प्‍लेन से नामांकन भरने के लिए उठाया गया था.

सवाल: क्‍या ये जीत आपके लिए ट्रॉफी की तरह है?
जवाब: मैंने बहुत मेहनत की है. अपनी मेहनत से घर बनाया है. यूपी-बिहार से होने के नाते बहुत लाठियां खाईं हैं. बहुत सौतेला व्‍यवहार हुआ. मुझे उत्तर भारत के लोगों ने हीरो बनाया है. उनके लिए मेरी भी कुछ जिम्‍मेदारी है. चुनाव जीतकर मैं कर्ज चुकाना चाहता था.

सवाल: आपने बनारस में झाड़ू लगाया. दिल्‍ली में आप नहीं दिखे?
जवाब: मैं कैमरे में झाड़ू नहीं लगाता. स्‍वच्‍छता दिखावे से नहीं मन में होती है.

सवाल: साध्‍वी निरंजन ज्‍योति जैसे लोगों के बयान तो मन की स्‍वच्‍छता के प्रतीक नहीं हो सकते?
जवाब: मैं और मेरी पार्टी उस बयान के साथ नहीं है. ऐसे बयानों से दुख होता है. मुझे गर्व है कि मैं ऐसी पार्टी से हूं जिसका नेतृत्‍व इन बयानों का खंडन करता है. हम ऐसे बयानों को बढ़ावा नहीं देते क्‍योंकि हम जानते हैं कि इससे हमारे विपक्षियों को मौका मिलेगा.

सवाल: आप यमुना की सफाई के लिए क्‍या-क्‍या सोच रहे हैं?
जवाब: बहुत कुछ सोचा है. अगर आपको कुछ सालों में दिल्‍ली में यमुना किनारे छोटी-छोटी नावें चलती दिखें और प्‍लेन उतरते दिखें तो आश्‍चर्य मत कीजिएगा. हम यहां यमुना जी के किनारे टूरिज्‍म को बढ़ावा देंगे.

सवाल: आप फिल्‍म इंडस्‍ट्री से हैं और पत्रकारिता को भी दूर से देखा है?
जवाब: (बीच में रोकते हुए) हमसे जटिल सवाल मत कीजिए. हमसे सब सच्‍चा-सच्‍चा ही कहा जाएगा.

सवाल: आपकी पार्टी का फोकस क्‍या है?
जवाब: हमारा एजेंडा सिर्फ विकास का है. नॉर्थ ईस्‍ट दिल्‍ली की स्थिति देखिए. लगेगा नहीं कि ये दिल्‍ली का हिस्‍सा है. मैं कुछ किए बिना बोलना नहीं चाहता. पांच साल बाद मैं जवाब दूंगा. मैं पांच साल बाद हीरो बनना चाहता हूं.

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