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रिमोट से नहीं चला रहा सरकार: नीतीश

एजेंडा आज तक के सेशन 'क्या खोया क्या पाया' में जेडीयू नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी शिरकत की. उन्होंने बिहार और केंद्र की मौजूदा राजनीति, समाजवादी विचारधारा और नरेंद्र मोदी की राजनीति पर खुलकर बातें कीं. पढ़ें उनसे बातचीत:
रिमोट से नहीं चला रहा सरकार: नीतीश Nitish Kumar
धीरेंद्र राय [Edited By: कुलदीप मिश्र]नई दिल्ली, 13 December 2014

एजेंडा आज तक के सेशन 'क्या खोया क्या पाया' में जेडीयू नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी शिरकत की. उन्होंने बिहार और केंद्र की मौजूदा राजनीति, समाजवादी विचारधारा और नरेंद्र मोदी की राजनीति पर खुलकर बातें कीं. पढ़ें उनसे बातचीत:

आपने क्या खोया ? क्या पाया ?
राजनीति में पाने की इच्छा नहीं होनी चाहिए. छात्र जीवन से ही मैं सामाजिक विचारधारा से जुड़ा, जिसमें विचारधारा ही सब कुछ है. जेपी मूवमेंट में जब भाग लिया तब तो सोचा भी नहीं था कि कभी चुनाव लड़ेंगे. आज की पावर पालिटिक्स की खासियत है कथनी और करनी में फर्क. कुछ भी कह दो ताकि वोट मिल जाए. हमारा कभी ऐसा सोचना नहीं रहा ऐसे में कुछ खोने का कोई गम ही नहीं.

ये समझ नहीं आया कि आपको बीजेपी मंजूर है, लेकिन मोदी नहीं?
अगर कोई समझना चाहे तो समझ जाएगा. बीजेपी से सहयोग हुआ. बिहार में परिवर्तन की जवाबदारी ली. लेकिन बुनियादी फर्क को लोग नजरअंदाज करते हैं. 1995 में बीजेपी का सम्मेलन मुंबई में था. मुंबई में ही मेरी आडवाणी-अटलजी से बात हुई. हमारे बीच गठबंधन की बात हुई और तय हुआ कि विवादित तीन मुद्दे अलग रखे जाएं. आडवाणी और अटल जी के नेतृत्व में हमारे संवैधानिक मूल्यों की हमेशा रक्षा हुई. लेकिन अब जो बात है वह समाज को बांटने की बात है. ऊपर से भले ही बात हो सबका साथ सबका विकास. अब सिर्फ एक नेता नहीं, पूरी पार्टी कट्टरपंथ की ओर जा रही है. मेरे लिए इस पर फैसला लेना मुश्किल नहीं था. हम कोई सरकारी नौकरी करने नहीं आए. सिर्फ सत्ता में बने रहने के लिए साथ बना रहे, ये गलत लगा.

हमने बिहार में कोशिश की है कानून का राज कायम करने की और ऐसे कदम उठाने की जिससे बिहार के लोग राज्य के बाहर मजाक का पात्र न बनें.

आप मोदी का टेप चला रहे हैं, लेकिन चुनाव में बीजेपी आपका टेप चलाएगी, जिसमें आप कह रहे हैं कि लालू के राज में जंगल का राज था?
जंगल नहीं, आतंक का राज था. जंगल में तो भी नियम होते हैं. लेकिन हमने यह ठीक करने के लिए काम किया. लेकिन अब कोई यह नहीं कह सकता है कि हम बीजेपी से समझौते बनाए रखें और उनकी गलत बात मानते रहें. मैं कम बोलने का आदी हूं. काम करने में विश्वास करता हूं. पहले बच्चियां साइकिल से बाजार नहीं ले जा पाती हैं, आज 9 बजे तक बड़े आराम से बाजार खुले रहते हैं. कोई कहीं भी आ जा सकता है.

लेकिन सुना है कि यादवों का आतंक फिर हावी हो रहा है ?
हमारी सरकार आरजेडी के सपोर्ट से चल रही है, लेकिन अब बिहार पुराने दौर में लौटने वाला नहीं.

आपकी अगुवाई में चुनाव लडा जाएगा बिहार में ?
अगर जनता हमें चुनती है तो लोगों की बुनियादी बातें ही आगे की जाएंगी.

अभी रिमोट से सरकार चला रहे हैं ?
हम तो डायरेक्ट सरकार चला रहे थे. चुनाव के बाद कहा गया कि मुझे इस्तीफा देना चाहिए. उन्हें नहीं मालूम था कि मैं इस्तीफा दे ही दूंगा. अब जब मैंने खुद सत्ता छोडी है तो रिमोट की बात बेमानी है.

बिहार में आरजेडी और जेडीयू का विलय हो रहा है ? नेता कौन होगा ?
साथ बैठेंगे, बात होगी तो हो सकता है. पहले सब साथ थे. नेता कौन होगा, यह तो बनने वाली पार्टी तय करेगी.

आपने दिल्ली में रैली की थी, जो बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दे देगा हम उसके साथ हो जाएंगे ?
हमने ये कहा था कि जो नेता बिहार से चुन कर जाएं, उन्हें ये मुददा बनाना चाहिए कि जो बिहार को स्पेशल दर्जा दे उसे समर्थन देंगे.

तो यदि मोदी ये मांग पूरी कर दें तो ?
ये तो उन्होंने भाषण में कहा है्. अब तक उन्हें ये काम कर देना चाहिए. लेकिन वे तो पहले से मंजूर पैकेज में कटौती कर रहे हैं.

तो चुनाव मोदी के ऑडियो टेप्स पर लड़ा जाएगा?
बिलकुल. इसमें गलत क्या है. ये तो राजनीति के स्तर को ऊपर उठाने वाली बात है. हम अनर्गल आरोप नहीं लगाएंगे. लेकिन यह तो बताएंगे कि इस बात की कथनी-करनी में अंतर है. लोग इंतजार कर रहे हैं कालाधन लाकर आप लोगों के खाते में जो भी 15-20 लाख डालने वाले थे, डालिए. इनकी सच्चाई देख्िाए, ये 85 प्रतिशत हिंदू बहुसंख्यकों को 15 प्रतिशत अल्पसंख्यकों से डरवा रहे हैं.

क्या आप मानते हैं कि 2014 के चुनाव में मोदी विचारधारा की लड़ाई जीत गए?
अगर हम इससे इनकार भी करें तो कोई मानेगा. लेकिन विचारधारा कभी नहीं हारती. हम अपनी बात को ठीक से नहीं रख पाए, वे उन्हें अपनी बात रखने पर सफलता मिली. हालांकि उन्हें सिर्फ 31 प्रतिशत वोट मिला है, लेकिन हमारा सिस्टम है फर्स्ट पास्ट द पोस्ट इज विनर.

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