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अब हील्स पहनकर भी बॉक्सिंग कर लेती हूं

एजेंडा आज तक के दूसरे दिन 'देसी गर्ल' प्रियंका चोपड़ा ने भी अपने सिनेमा और लाइफ पर बातें कीं. उन्होंने बताया कि वह जल्दी बोर हो जाती हैं, इसलिए डांस, एक्टिंग, सिंगिंग सब करती रहती हैं.
अब हील्स पहनकर भी बॉक्सिंग कर लेती हूं एजेंडा आज तक में प्रियंका चोपड़ा
सौरभ द्विवेदी [Edited by: कुलदीप मिश्र]नई दिल्ली, 05 December 2013

एजेंडा आज तक के दूसरे दिन 'देसी गर्ल' प्रियंका चोपड़ा ने भी अपने सिनेमा और लाइफ पर बातें कीं. उन्होंने बताया कि वह जल्दी बोर हो जाती हैं, इसलिए डांस, एक्टिंग, सिंगिंग सब करती रहती हैं. बॉक्सर मैरीकॉम का पर्दे पर रोल निभाने को लेकर चल रही तैयारियों का जिक्र करते हुए प्रियंका बोलीं कि फिल्म के लिए उन्होंने थोड़ी-बहुत बॉक्सिंग सीखी है और अब वह हाई हील्स पहनकर भी बॉक्सिंग कर लेती हैं.

और कई मुद्दों पर बोलीं प्रियंका, पढ़िए उन्हीं की जुबानी...

बॉक्सर मैरीकॉम के रोल को लेकर
हां, कुछ ही दिनों में मेरे डोले दिखने लगेंगे आपको. जब भी लोग बायोपिक करते हैं तो अकसर ऐसा होता है कि उनकी जिंदगी का वह सुनहरा दौर पूरा हो चुका है. मगर मैरीकॉम अब भी एक्टिव हैं. तो बहुत मुश्किल था. मैं इसे हर लड़की की कहानी के तौर पर ट्रीट कर रही हूं. यह हर उस लड़की की कहानी है, जिसे बताया गया है कि तुम्हें इस तरह से चलना है, ऐसे करना है. जैसे मैरीकॉम ने बैरियर तोड़े, दूसरी लाखों लड़कियां भी तोड़ती हैं.

ट्रेनिंग के दौरान मुझे बहुत अच्छे से बॉक्सिंग आ गई है. अब मैं हाई हील्स में भी बॉक्स कर सकती हूं. मैराथन भी दौड़ सकती हूं. (प्रियंका खड़े होकर बॉक्सिंग के टिप्स भी देती हैं)

मैरीकॉम को अपने नाखून कटवाने पसंद नहीं हैं. लंबे नाखून हैं और उन पर नेल पॉलिश सजी रहती है. ऐसे में बॉक्सिंग करने से उनको इंजरी भी बहुत हुईं. मगर मैंने इस रोल की प्रैक्टिस के दौरान अपने नाखून कटवा लिए.

वैसे मैं कभी इस स्पोर्टस में नहीं रही. तो बहुत मुश्किल ट्रेनिंग रही. आप खेल की एक्टिंग नहीं कर सकते न. मुझे जिम जाना पसंद नहीं. डायटिंग करना पसंद नहीं. मगर इस फिल्म की ट्रेनिंग के लिए बहुत कुछ करना पड़ा. 6 घंटे की बॉक्सिंग प्रैक्टिस के बाद कुछ घास-फूस खिला देते थे. मैं एक चोपड़ा हूं, तो सोचिए पंजाबी के साथ कितना अत्याचार है.

मुझे नहीं लगता कि फील्ड में कोई है मुकाबले के लिए. वैसे इंडियन फिल्म एक्ट्रेसेस से बहुत पूछा जाता है कि नंबर वन और टू कौन है. कौन आगे है, कौन पीछे है. मगर मैं खुद को किस्मत वाली मानती हूं कि हर साल मुझे कुछ अच्छी फिल्में मिल जाती हैं.

बर्फी का रोल ऐसे मिला मुझे
मेरे लिए जिंदगी का सबसे एक्साइटिंग रोल था ये. अनुराग बसु मेरे घर से आए. मैं शूटिंग से लौटी थी. वह बैठे ड्राइंग रूम में. पांच मिनट हैलो हाय के बाद बोले- अब चलता हूं. मैंने पूछा कि बताइए, कुछ बात थी क्या. लेकिन उन्होंने नहीं बताया. मैंने पूछा-क्या हुआ तो बोले मैं फिल्म के लिए आया था. पर तुम ना बोल दोगी. तुम नहीं करोगी. प्रियंका ने जब जबरन पूछा तो उन्होंने रोल सुनाया. एक ऑटिस्टिक लड़की है. तो प्रियंका ने पूछा कि ये रोल तो कई लोग कर चुके हैं. अनुराग बोले कि जब तक मैं किसी लड़की को रियल में कास्ट नहीं कर लेता, इस कैरेक्टर को ठीक से लिख नहीं पाऊंगा. मैंने उनसे कहा, बस पांच दिन दीजिए और उसके बाद जो हुआ, वो आपके सामने है.

गाना क्यों गाया मैंने
मुझे विरासत में मिला है. मेरे पापा सिंगर थे. बहुत अच्छा गाते थे. डॉक्टर थे, मगर फौज में सब उनको सिंगिंग सर्जन कहते थे. तो मैं बचपन से ही गाने लगी. पापा का सपना था कि मैं सिंगर बनूं. जब यूनिवर्सल ने मुझसे एलबम की बात की, तो डैड बहुत एक्साइटेड हो गए. तीन-चार साल पहले की बात है. तब उनकी तबीयत भी खराब चल रही थी. मगर वह बहुत खुश थे. अब लगता है कि ये पापा का सपना है, तो ज्यादा से ज्यादा बेहतर ढंग से करना चाहिए.

अफवाहों से कितना असर पड़ता है?
मैं प्राइवेट रहती हूं. पॉलिटिकली करेक्ट या कुछ और नहीं हूं. मुझे लगता है कि 90 फीसदी मैं एक्टिंग के जरिए पब्लिक को देती हूं. तो 10 फीसदी अपने और फैमिली के लिए बनता ही है न.

इसे ऐसे समझिए. रात में हम घर पर होते हैं. सोने से पहले पाजामे में होते हैं. कई बार घंटी बजते ही हम गाउन पहन लेते हैं. ये सब इंस्टिक्ट से होता है. हमें पता होता है कि कितना पर्सनल होना है या नहीं. वही चीज इंडस्ट्री को लेकर भी है. कब पाजामा में रहना है, कब गाउन के साथ. मैं पब्लिक पर्सन हूं मगर मैं एक लड़की हूं और मुझे हक है कि अपनी निजी जिंदगी को खुद तक रख सकूं.

मुझे अफवाहें ज्यादा प्रभावित नहीं करतीं. मगर जब लोग, जर्नलिस्ट या राइटर्स अपना ओपिनियन बिना सच्चाई जाने देते हैं, तो तकलीफ होती है.

पापा की अंगूठी का किस्सा क्या है?
मेरे पापा ने मुझे बहुत लाड दिया है. इसीलिए मेरी कलाई पर लिखा है डैडीज लिटिल गर्ल. मुझे नहीं पता कि कितनी बेटियों को अपने पापा से इतना प्यार मिलता है. कि उनके पापा उनके बेस्ट फ्रेंड हों. मैं उनसे हर बात कर सकती थी. साथ ही आंखों की शर्म भी थी. ऐसा ही लाइफ पार्टनर भी चाहिए मुझे. जब पापा ने मुझे ये कीमती रिंग दी थी तो यह एक सिंबल था. कि जो भी मेरी जिंदगी में आएगा, उसे इतना ही खयाल रखना होगा. मगर मीडिया में खबरें उड़ती रहीं कि ये प्रियंका को रिंग किसने दी.

क्या करण जौहर कैंप में आपकी एंट्री बंद है?
हां मेरे करण जौहर से कुछ मतभेद हैं. मैं इससे इनकार नहीं करूंगी. हमने एक महीने बात नहीं की. मगर अब सब ठीक है. मैंने हाल में कॉफी विद करण किया.तो आई गेस अब सब ठीक है.

लड़कियों को लेकर समाज में पाबंदी को लेकर
जब मैं 18 साल की थी तो मुझे 10 बजे तक घर लौटना होता था. ये मेरे पापा का रूल था. हर घर में हेड ऑफ द फैमिली तय करता है. मैं यहां बैठकर नहीं कह सकती कि लड़कियों को कब तक बाहर रहना चाहिए या नहीं रहना चाहिए. मगर हमारे देश के कल्चर को हम दिन पर दिन बांधने वाला न बनाएं. मर्यादा फैमिली के ऊपर निर्भर करती है. इसे बाकी सब लोग आप पर नहीं थोप सकते.

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