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चाहता हूं कि मोदी को ट्विटर पर फॉलो करूं, पर सियासत इजाजत नहीं देतीः अजय माकन

कोई किसी को फेंकू कहता है, कोई पप्पू. कोई साहबजादा तो कोई लुटेरा. चुनावी मौसम में राजनीति के संबोधन इतने अशिष्ट क्यों हो जाते हैं. इस पर बात करने के लिए एजेंडा आज तक के मंच पर पहुंचे बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद और कांग्रेस के मीडिया प्रभारी अजय माकन.

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सौरभ द्विवेदी [Edited by: कुलदीप मिश्र]नई दिल्ली, 06 December 2013
चाहता हूं कि मोदी को ट्विटर पर फॉलो करूं, पर सियासत इजाजत नहीं देतीः अजय माकन एजेंडा आज तक में अजय माकन

कोई किसी को फेंकू कहता है, कोई पप्पू. कोई साहबजादा तो कोई लुटेरा. चुनावी मौसम में राजनीति के संबोधन इतने अशिष्ट क्यों हो जाते हैं. राजनीति में 'गंदी बात' क्यों होती है. इस पर बात करने के लिए एजेंडा आज तक के मंच पर पहुंचे बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद और कांग्रेस के मीडिया प्रभारी अजय माकन.

राजनीतिक शिष्टाचार के कुछ पुराने उदाहरण याद दिलाते हुए अजय माकन ने कहा कि कुछ दिन पहले बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा था कि वे संसद में अच्छे विपक्ष की भूमिका निभाना चाहते हैं, इसका स्वागत किया जाना चाहिए. 2010 में मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि जिस तरीके से राहुल गांधी लोगों के पास जा रहे हैं, मैं उसका स्वागत करता हूं.

मैंने सुषमा के पैर छुए, उन्होंने गले लगा लिया: माकन
अजय माकन ने याद दिलाया, 'मैं 1998 में एकमात्र चुनाव हारा. सुषमा स्वराज के खिलाफ इसी दिल्ली से. चुनाव के बाद जो हारता है, वह जाकर बधाई देता है. जब मैं सुषमा जी के पास गया. वह मुझसे बड़ी थीं. तब मैं 33-34 साल का था. मैं गया, पैर छुए. हाथ जोड़े और कहा आप चुनाव जीती हैं, मैं बधाई देने आया हूं. सुषमा जी ने मुझे गले से लगा लिया. हमारे यहां अच्छे और गंदे, दोनों राजनीतिक उदाहरण हैं.'

चूंकि शिष्ट उदाहरणों के जिक्र का मौका था तो रविशंकर प्रसाद भी बोले कि किसी दिन कॉफी हाउस में हम और माकन जी बैठें, और मीडिया को कैसे डील करें और अब तक कैसे किया, इस पर गप्पें लड़ाएं.

मोदी को फॉलो करने को दिल चाहता है: माकन
अपनी सदिच्छा जाहिर करते हुए माकन बोले, 'मेरा बहुत मन करता है कि मैं ट्विटर पर सुषमा स्वराज या रविशंकर प्रसाद को फॉलो करूं. मैं चाहता हूं कि जानूं कि वह क्या कह रहे हैं. मगर मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य ऐसा है कि ये मुमकिन नहीं है. मैं जानना चाहता हूं कि नरेंद्र मोदी ने क्यों ट्वीट किया. मगर जैसे ही मैं उन्हें ट्विटर पर फॉलो करने लगूंगा, मीडिया माहौल बना देगा. तो आज की सियासत इसकी इजाजत नहीं देती दरअसल.

अच्छी बहसें नहीं दिखाता मीडिया: माकन
राजनीतिक शिष्टाचार पर चर्चा थी लेकिन माकन ने मीडिया पर दोष मढ़ दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया सिर्फ नेगेटिव चीजें दिखाती है. उन्होंने कहा कि संसद में कई अच्छी बहसें होती हैं, वे नहीं दिखाई जातीं. अगर वेल में आकर हंगामा हुआ, तो बस वही बार-बार दिखाया जाता है.

'जब बैलगाड़ी पर संसद आए अटल'
रविशंकर प्रसाद बोले कि राजनीति को खांचों में नहीं बांटा जा सकता. जब चार-पांच लाख लोगों के सामने जाएंगे, तो तंज करेंगे. हास परिहास करेंगे.लेकिन शालीनता की सीमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए. उन्होंने एक वाकया किया, 'सन 67 में इस्राइल-अरब युद्ध हुआ. पेट्रोल की किल्लत थी. इंदिरा जी तांगे पर संसद आईं. अगले दिन अटल जी बैलगाड़ी पर आए. तो ऐसा हास परिहास भी होता था राजनीति में.'

शीला ही बनेंगी चौथी बार मुख्यमंत्री
अजय माकन ने कहा कि नई दिल्ली सीट से शीला चुनाव जीतेंगी और चौथी बार दिल्ली की सीएम बनेंगी. दिग्गी के बयान पर वह बोले कि पिछले छह महीने से दिग्विजय सिंह के सभी बयान पार्टी लाइन पर रहे हैं.

मोदी को हिटलर बताना कहां ठीक
प्रसाद ने मोदी को फेंकू कहे जाने पर ऐतराज जताया और कहा कि यह गलत है. रविशंकर प्रसाद बोले कि इंदिरा के वक्त में जयप्रकाश नारायण को फासिस्ट बोला जाता था. आजकल कांग्रेस सरकार के सूचना प्रसारण मंत्री फिल्म फेस्टिवल में भी हमारे नेता को हिटलर कहते फिरते हैं. चाहे कोई संदर्भ हो या न हो. प्रसाद ने कहा, 'इमरजेंसी के बाद चुनाव हुए. कांग्रेस हारी. जेपी दिल्ली आए तो सबसे पहले इंदिरा से मिलने का प्रोग्राम बनाया. जब सबने पूछा ये क्या कर रहे हैं. उन्होंने आपको 18 महीने जेल रखा. तो जेपी बोले कि मैं अपने बड़े भाई जवाहर की बेटी इंदू से मिलने जा रहा हूं.'

मोदी ने नहीं उड़ाया सोनिया का मजाक: प्रसाद
प्रसाद ने कहा कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज गरिमा का ख्याल रखते हैं. और उनके लिए कांग्रेस के दिग्विजय सिंह हल्की भाषा में कहते हैं कि पप्पू फेल हो गया. मोदी का बचाव करते हुए प्रसाद ने कहा कि जब उन्होंने सोनिया को बीमार कहा तो उनका मकसद मजाक उड़ाना नहीं था.

इस पर माकन ने जवाब दिया कि जबसे मैं मीडिया सेल का हेड बना हूं. हमने ये तय किया है कि किसी भी नेता की हलकी बात का समर्थन न किया जाए.

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