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मेरे पास एक रुपये का बैंकबैलेंस भी नहीं, न ही एक टुकड़ा जमीन, एजेंडा आज तक में बोले बाबा रामदेव

एजेंडा आज तक का अगला सेशन था 'धर्म या धंधा'. बातचीत के लिए सामने थे मशहूर योग गुरु बाबा रामदेव, धर्मगुरु चिदानंद मुनि और सर्वानंद सरस्वती. इस मौके पर बाबा रामदेव ने योग और आयुर्वेद के नाम पर व्यापार करने के आरोपों पर भी जवाब दिया.

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सौरभ द्विवेदी [Edited by: कुलदीप मिश्र]नई दिल्ली, 05 December 2013
मेरे पास एक रुपये का बैंकबैलेंस भी नहीं, न ही एक टुकड़ा जमीन, एजेंडा आज तक में बोले बाबा रामदेव एजेंडा आज तक में बाबा रामदेव

एजेंडा आज तक का अगला सेशन था 'धर्म या धंधा'. बातचीत के लिए सामने थे मशहूर योग गुरु बाबा रामदेव, धर्मगुरु चिदानंद मुनि और सर्वानंद सरस्वती. इस मौके पर बाबा रामदेव ने योग और आयुर्वेद के नाम पर व्यापार करने के आरोपों पर भी जवाब दिया.

उन्होंने कहा कि उनके पास न तो बैंक अकाउंट है और न ही एक रुपये की बचत. उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जितने मुकदमे कर ले, मगर सच यही है कि मेरे पास एक टुकड़ा जमीन का नहीं. बाबा रामदेव बोले कि मुझे तो भक्तों ने लाखों एकड़ जमीन और टापू देने का प्रस्ताव दिया था. अगर स्वीकार कर लेता तो मीडिया बवाल खड़ा कर देता.

अपने कारोबार पर रामदेव बोले कि मैंने अरबों का मुनाफा कमाने वाली मल्टी नेशनल कॉस्मेटिक्स और पेय पदार्थ कंपनियों की दुकानें बंद करवानी शुरू कर दीं. इसलिए ये सब बातें हो रही हैं. उन्होंने कहा कि पहले लोग जिन पदार्थों के लिए हजारों रुपये देते थे. अब वही पतंजलि योग पीठ कुछ सौ रुपयों में मुहैया कराता है. रामदेव ने पूछा कि इस तरह का काम धंधा कैसे हो सकता है.

इस सेशन में आए श्रीपीठम के चांसलर सर्वानंद सरस्वती बोले कि इस देश में बाबा के नाम पर कई गुरु घंटाल पैदा हो गए हैं. उन्होंने कहा कि बाबा नाम जुड़ते ही कारोबार शुरू हो जाता है. धर्मगुरुओं के आडंबर पर सवाल उठाते हुए सर्वानंद ने कहा कि हर बाबा फाइव स्टार होटल नुमा आश्रम बनाने की जुगत में लगा है. विदेश यात्रा करना चाहता है. भोग की चीजें जुटाना चाहता है. उन्होंने कहा कि ये गुरु घंटाल बच्चों से ये नहीं कहते कि अपने मां-बाप की पूजा करो. अपनी पूजा करने की. अपनी फोटो टांगने की नसीहत देते हैं.

इस प्रवचन को सुनकर बाबा रामदेव भी कुछ श्लोक सुनाते हुए धर्म की परिभाषा समझाने लगे और बोले कि बेईमानों को बाहर निकालो, चाहे वह मंदिर में बैठे हों, मस्जिद में या फिर संसद में.

बहस में शामिल होते परमार्थ निकेतन के चिदानंद महाराज बोलते कि धंधा वह है, जो सिर्फ अपने लिए सोचता है और धर्म वह है, जो सबके लिए सोचता है.चिदानंद ने एक ऑटो वाले का उदाहरण दिया. जिसकी गाड़ी के पीछे लिखा था. प्रभु सबका भला करो. शुरुआत मुझसे करो.चिदानंद बोले कि आज धर्म की यही हालत हो गई है. पहले मेरा धंधा दुरुस्त हो जाए.

सर्वानंद सरस्वती ने राजनीति से पहले धर्म की सफाई के सवाल पर कहा कि धर्मगुरु अपनी चाकरी करवाने में इतना मगन रहते हैं कि उनके मुंह से सफाई की बात भली नहीं लगती.

अंत में चिदानंद सरस्वती बोले कि अगर कभी किसी को किसी धर्म से जुड़े व्यक्ति से शिकायत होती है, तो उसे ध्यान रखना चाहिए कि यह व्यक्ति का मसला है, उसे पूरे धर्म से न जोड़ा जाए.बाबा रामदेव ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि धर्म कभी व्यक्तिवादी नहीं रहा.

बाबा रामदेव ने चलते चलते दोहराया कि नरेंद्र मोदी में माद्दा है कि वह देश की बागडोर संभाल सकें.

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